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हाइलाइट्स

भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो सेवा दिसंबर 2023 तक हमारे सामने होगी.
इस परियोजना के पूरा होने से लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी.
कोलकाता मेट्रो का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर 15 किलोमीटर लंबा है.

नई दिल्ली. बढ़ती टेक्नोलॉजी और विज्ञान हर दिन चीज़ों को बेहतर और आसान करने में लगी हुई है. इसी कड़ी में भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो सेवा दिसंबर 2023 तक हमारे सामने होगी. कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (केएमआरसी) ने शुक्रवार को कहा कि भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो सेवा, ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर परियोजना दिसंबर 2023 तक पूरी होने की उम्मीद है.

इस बारे में कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (KMRC) के महाप्रबंधक सिविल, शैलेश कुमार ने बताया कि चल रही अंडरवाटर टनल परियोजना दिसंबर 2023 तक पूरी होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि कुछ पुनर्वास कार्य प्रक्रिया में हैं और अन्य मुद्दे अंडरवाटर मेट्रो परियोजना को पूरा करने में देरी कर रहे हैं, लेकिन यह सब जल्द ही पूरे कर लिए जाएँगे.

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जर्मनी की मशीन के मदद से बन रहा है सुरंग
केएमआरसी के अधिकारी ने एएनआई को बताया कि हमने टनलिंग परियोजनाओं में विदेशी विशेषज्ञों की मदद लिया है, वर्तमान में हम मुश्किल काम को आसान बनाने के लिए विदेशों यानी जर्मनी से मशीनों का उपयोग कर रहे हैं. कोलकाता मेट्रो रेलवे कॉरपोरेशन ने जर्मन मशीनों और बेहतरीन विशेषज्ञों की मदद से सुरंग बनाने का काम शुरू किया है. बता दें, टनल के अंदर काम अभी भी जारी है.

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15 किलोमीटर लंबा है ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर
आपको बता दें कि कोलकाता मेट्रो का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर 15 किलोमीटर लंबा है. यह साल्ट लेक स्टेडियम से हावड़ा तक फैला है. साल्ट लेक सेक्टर-5 से साल्ट लेक स्टेडियम के बीच इस मेट्रो लाइन में करुणामयी, सेंट्रल पार्क, सिटी सेंटर और बंगाल केमिकल मेट्रो स्टेशन हैं.

कोलकाता मेट्रो के नाम एक और रिकॉर्ड
इस नए शुरुआत के साथ देश की पहली मेट्रो रेलवे कोलकाता मेट्रो के सर पर एक और उपलब्धि जुड़ गया है. 1984 में अपनी यात्रा शुरू करने वाली कोलकाता मेट्रो का विस्तार पूरे शहर और इसके बाहरी इलाकों में किया जा रहा है. वहीं इस परियोजना के पूरा होने से लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी क्योंकि यह व्यस्त हावड़ा और सियालदह रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ एस्प्लेनेड में कोलकाता मेट्रो की उत्तर-दक्षिण लाइन को जोड़ेगी.

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