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सीकर. अभाव में भी इंसान की सफलता हासिल करने की इच्छाशक्ति उसे किस मुकाम पर पहुंचा सकती है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण राजस्थान के सीकर के मोटाराम शर्मा हैं. पिछले 30 साल से सीकर के मोटाराम शर्मा मशरूम की अलग-अलग किस्मों की खेती कर रहे हैं. मोटाराम शर्मा का बचपन अभाव में गुजरा और इसलिए उनको पढ़ाई करने का मौका नहीं मिला. उनके पास कुछ खास जमीन भी नहीं थी. जिसमें वे बढ़िया तरीके से खेती कर सकें. मोटाराम शर्मा को एक बार जानकारी मिली कि मशरूम की खेती के लिए सरकारी प्रशिक्षण दिया जाता है तो उन्होंने उसे हासिल करने का फैसला किया.

मोटराम शर्मा का मानना था कि ज्यादा जमीन, बिना पानी और बिना पैसे के मशरूम उगाने के बिजनेस में हाथ आजमाया जा सकता है. मोटाराम शर्मा को मशरूम की उगाते हुए अब 30 साल का समय होने जा रहा है और उनका टर्नओवर इस समय करीब 65 लाख रुपये सालाना है. आज उनके दो प्लांट हैं. जिसमें एक साधारण प्लांट है और एक पूरी तरह एयर-कंडीशन प्लांट है. मोटाराम शर्मा की मशरूम खरीदने के लिए कनाडा सहित कई देशों से लोग आते हैं.

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कार्डिसेप्स मिलिट्री मशरूम की कीमत 2 लाख रुपया प्रति किलो
मोटाराम शर्मा शीटाके और गैनोडर्मा के साथ कार्डिसेप्स मिलिट्री जैसी किस्मों की मशरूम उगाते हैं. कार्डिसेप्स मिलिट्री मशरूम की कीमत 2 लाख रुपया प्रति किलो है. ये मशरूम इतनी महंगी इसलिए है क्योंकि इसमें कैंसर सेल को खत्म करने की शक्ति होती है और यह कैंसर की दवा बनाने में उपयोग होती है. इसके साथ ही शीटाके और गैनोडर्मा मशरूम में भी औषधीय गुण होते हैं.इनमें भी कैंसर को रोकने की क्षमता होती है.

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कम जमीन, कम लागत, कम पानी के साथ मशरूम सबसे बेहतर
मोटाराम शर्मा का मानना है कि मशरूम औषधीय गुणों और विटामिन से भरपूर हैं. इनके सेवन से कई तरह के रोगों से बचा जा सकता है. मोटाराम शर्मा का कहना है कि लोगों मशरूम को अपनी रोजाना की खुराक में शामिल करना चाहिए. जब मोटाराम शर्मा ने मशरूम बेचना शुरू किया तो उनको पता चला कि राजस्थान में कई जगहों पर लोगों को ये भ्रम है कि मशरूम कोई मांसाहारी पदार्थ है. इसे दूर करने में भी मोटाराम शर्मा को काफी मेहनत करनी पड़ी. मोटाराम शर्मा का कहना है कि युवाओं को मशरूम की खेती की तरफ आना चाहिए और नौकरी के पीछे नहीं भागना चाहिए, क्योंति उनका उदाहरण सबके सामने है. कम जमीन, कम लागत और कम पानी के साथ कोई भी व्यवसाय इतना मुनाफा नहीं दे सकता जितना मशरूम की खेती दे सकती है.

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हर साल देते हैं करीब 40 से 50 लोगों को ट्रेनिंग
मोटाराम शर्मा मानते हैं कि भारत में मशरूम का बहुत अच्छा भविष्य है. जिसके पास जमीन नहीं है ऐसे लोग मशरूम उगाने के क्षेत्र में आ सकते हैं. अपने प्लांट में मोटाराम शर्मा ने 7 लोगों को रोजगार दिया है. मोटाराम शर्मा मशरूम को प्रोसेस करके उससे पाउडर और कैप्सूल भी बनाते हैं. उनके इन प्रोडक्ट की लोगों के बीच भारी मांग है. मोटाराम शर्मा हर साल करीब 40 से 50 लोगों को ट्रेनिंग देते हैं. कई युवाओं ने मोटाराम शर्मा से प्रशिक्षण लेने के बाद मशरूम को उगाना शुरू किया और आज वे अपने रोजगार में बेहतरी की ओर बढ़ रहे हैं.

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100 से ज्यादा पुरस्कारों से सम्मानित हुए मोटाराम शर्मा
मोटाराम शर्मा को बचपन में पढ़ाई करने का मौका नहीं मिला था. इसलिए उन्होंने बाद में 12वीं की परीक्षा पास की और साथ ही एक्यूप्रेशर थेरेपी का भी कोर्स किया. मशरूम की खेती में अपना एक मुकाम हासिल करने वाले मोटाराम शर्मा को लोगों ने मशरूम किंग का नाम दिया है. मोटाराम शर्मा को 100 से ज्यादा पुरस्कार और सम्मान हासिल हो चुके हैं. जिसमें कृषि रतन, कृषि वैज्ञानिक, राजस्थान का बेस्ट किसान का पुरस्कार भी शामिल है.

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