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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीनियर डिवीजन के 121 सिविल जजों का ट्रांसफर किया है. इसमें वाराणसी ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने और वजू खाने को सील किए जाने का आदेश देने वाले जज रवि कुमार दिवाकर का भी नाम शामिल है. उनको वाराणसी से बरेली भेजा गया है. वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल आशीष गर्ग ने तबादले की लिस्ट जारी की है. जबकि ट्रांसफर किए गए सभी जजों को 4 जुलाई की दोपहर तक अपना कार्यभार ग्रहण करना होगा.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सालाना तबादला लिस्ट में रवि कुमार दिवाकर का नाम सौवें नंबर पर है. उनको वाराणसी से बरेली ट्रांसफर किया गया है. दरअसल वाराणसी में तैनात सीनियर डिवीजन के सिविल जज रवि कुमार दिवाकर ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की सुनवाई कर रहे थे. हालांकि सर्वे के बाद जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो केस वाराणसी के जिला जज को ट्रांसफर किया गया. फिलहाल मामला वाराणसी जिला जल के अंडर में है. इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रैंक के 285 और सिविल जज जूनियर डिवीजन रैंक के 213 जजों का भी ट्रांसफर किया है.

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे का दिया था आदेश
वाराणसी के सिविल जज रवि कुमार दिवाकर ने पहले ज्ञानवापी विवादित परिसर का कमीशन से सर्वे कराए जाने का आदेश दिया था. वहीं, सर्वे के अंतिम दिन शिवलिंग मिलने के दावे पर ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने को सील किए जाने का भी आदेश दिया था. वहीं, इस मामले के सुनवाई के दौरान और बाद में उनको जान से मारने की धमकी भी मिली थी. इसके बाद वाराणसी पुलिस प्रशासन ने रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा में नौ पुलिस जवानों को तैनात किया था. जबकि वाराणसी जिला जज की सुरक्षा में 10 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. रवि कुमार दिवाकर को इस्लामिक आजाद मूवमेंट नामक संस्‍था की ओर से धमकी भरा पत्र भेजा गया था.

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बता दें कि वाराणसी के सिविल जज रवि कुमार दिवाकर ने ज्ञानवापी के सर्वे का फैसला सुनाते वक्त भी अपनी जान को खतरा बताया था. उन्होंने कहा था कि साधारण केस में भी डर का माहौल बनाया गया. यह डर इतना है कि मेरे परिवार को मेरी और मुझे अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता रहती है.

Tags: Allahabad high court, Gyanvapi Masjid Survey

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