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नई दिल्ली: कल्कि कोचलिन (Kalki Koechlin) एक अच्छी एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने लंदन के एक संस्थान से नाटक का अध्ययन किया है, लेकिन बॉलीवुड में एंट्री करने के बाद, उन्होंने देखा कि उनकी त्वचा के रंग की वजह से उन्हें गोरी लड़की या अपर क्लास के रोल में टाइपकास्ट किया जा रहा है. वे इस बात से काफी निराश हैं.

कल्कि ने एक इंटरव्यू में कहा कि एक बार एक निर्देशक ने उनसे कहा कि वे उन्हें ऐसा रोल दे रहे हैं, जिसमें वे अच्छा परफॉर्म करेंगी. दरअसल, उन्हें एक साइकोटिक का रोल निभाने के लिए दिया गया था. द लोकल को दिए इंटरव्यू में, कल्कि ने कहा, ‘मेरी त्वचा सफेद है, लेकिन मेरा दिल भूरा है.’

कल्कि वास्तव में भारत और बॉलीवुड में घर जैसा एहसास करती हैं, क्योंकि उन्होंने दक्षिण भारत में तमिलनाडु में अपना बचपन बिताया और पढ़ाई की, जहां वे तमिल, अंग्रेजी और फ्रेंच बोलती थीं. उन्होंने ‘देव डी’ में अपनी भूमिका के लिए हिंदी सीखी और इसके बाद फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए तारीफ बटोरी.

कल्कि अब अपनी बेटी के जन्म के बाद फिल्म में वापसी करने के लिए तैयार हैं. वे फिल्म ‘गोल्डफिश’ में दीप्ति नवल के नजर आएंगी, जो फिल्म में उनकी मां बनी हैं. फिल्म डिमेंशिया पर बात करती है. वे कहती हैं, ‘गोल्ड फिश मुझे एक्सपेरिमेंट करने की आजादी देगी.’

कल्कि का कहना है कि अब तक वे अपने गोरे रंग की वजह से अपर क्लास के किरदारों से जुड़ी हुई हैं. दूसरों के लिए भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं है. वे एक ऐसे एक्ट्रेस का उदाहरण देते हुए कहती हैं, जिसे हमेशा एक नौकरानी की भूमिका दी जाती है, क्योंकि उनका रंग सांवला है.

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