NIA के जरिए हमें डराने-धमकाने की कोशिश हो रही है: किसान नेता- India TV Hindi
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नई दिल्ली: किसान नेताओं ने कृषि कानूनों के खिलाफ रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि पंजाब और दूसरी जगह में एनआईए ने कुछ केस बनाने शुरू किए है। एनआईए हमारी मदद करने वालों पर राजद्रोह का केस बना रही है। उन्होनें कहा कि सरकार के साथ बैठक में हमें सबसे पहले ये बात रखी थी। तब तोमर जी ने वादा किया था की हम संज्ञान लेंगे। आज संयुक्त किसान मोर्चा इस मामले की निंदा करता है। हम हर तरह से इसका मुकाबला करेंगे।

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च करेंगे

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान मार्च का आयोजन 26 जनवरी को दिल्ली की अंदर होगा। आऊटर रिंग रोड़ पर दिल्ली की परिक्रम करके ये मार्च किया जाएगा। हम आशा करते है दिल्ली और हरियाणा की पुलिस इसमें कोई बाधा ना करे। उन्होनें कहा कि यह परेड शांतिपूर्ण रहेगी, किसी प्रकार के हथियार और भडकाऊ भाषण नही होगें। योगेंद्र यादव ने कहा कि गणतंत्र दिवस की परेड पर कोई विघन नही डाला जाएगा। योगेंद्र यादव ने कहा कि किसी चीज पर कब्जा नही किया जाएगा। लाल किला, संसद भवन पर कब्जे करने की जो बात हो रही है ऐसा कुछ नही होने वाला है। 

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किसान नेता ने कहा कि 19 जनवरी को सरकार से साथ बैठक पर कृषि मंत्री का बयान बता रहा है की देश के किसान इस कानून से खुश है। जो सरकार की मंशा बताता है। हम 19 को जवाब लेने जरूर जायेंगे। ऐसा बिल्कुल नही लगने देंगे की किसान बातचीत के लिए तैयार नही है।

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सरकार अपनी बात पर अड़ी रही तो 15 मिनट में बाहर आ जाएंगे: राकेश टिकैत

दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों के प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों के बीच नौवें दौर की बातचीत शुरू होने से पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार अपनी बात पर अड़ी रही तो 15 मिनट बाद बाहर आ जाएंगे। बैठक के लिए राकेश टिकैत विज्ञान भवन पहुंच गए हैं। उन्होंने आईएएनएस से कहा, सरकार अगर बात नहीं करेगी तो 15 मिनट बाद वापस आ जाएंगे। यदि सरकार अपनी मांगों पट डटी रही तो, बातचीत का फायदा नहीं।

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हालांकि तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किए जाने के बाद किसान नेता पहली बार केंद्रीय मंत्रियों से मिल रहे हैं। किसान यूनियनों के नेता केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून2020और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून2020को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।

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