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नई दिल्ली. आने वाले वर्ष के दौरान एशिया-पैसिफिक (APAC) रीजन में मंदी की आशंका नहीं है. हालांकि, क्षेत्र पर ऊंची ब्याज दरों और ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ धीमी रहने का असर जरूर पड़ेगा. रेटिंग एजेंसी मूडीज एनालिटिक्स (Moody’s Analytics) ने गुरुवार को यह कहा.

‘एपीएसी आउटलुक: ए कमिंग डाउनशिफ्ट’ (APAC Outlook: A Coming Downshift) शीर्षक वाले अपने विश्लेषण में मूडीज ने कहा है कि अगले वर्ष भारत धीमी वृद्धि की दिशा में बढ़ रहा है जो इसकी लॉन्ग टर्म संभावना के अनुरूप है. सकारात्मक पक्ष को देखें तो निवेश का प्रवाह और टेक्नोलॉजी और कृषि में प्रोडक्टिविटी गेन से ग्रोथ को गति मिलेगी.

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इसमें कहा गया कि अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 6 फीसदी के ऊपर रखना होगा जिससे जीडीपी की वृद्धि मंद पड़ जाएगी. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मूडीज ने अगस्त में अनुमान जताया था कि 2022 में भारत की वृद्धि धीमी पड़कर 8 फीसदी रहेगी, 2023 में यह और धीमी होकर 5 फीसदी पर आ जाएगी. 2021 में यह 8.5 फीसदी रही थी.

एशिया-पैसिफिक रीजन की इकोनॉमी की गति धीमी 
अपने विश्लेषण में मूडीज ने कहा कि एशिया-पैसिफिक रीजन की इकोनॉमी की गति धीमी पड़ रही है और व्यापार पर निर्भर यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार में सुस्ती के असर को झेल रहा है. मूडीज एनालिटिक्स में चीफ इकोनॉमिस्ट (एपीएसी) स्टीव कोचरेन ने कहा, ‘‘ग्लोबल इकोनॉमी में केवल चीन ही कमजोर कड़ी नहीं है बल्कि भारत समेत एशिया की अन्य बड़ी इकोनॉमी का निर्यात मूल्य अक्टूबर में सालाना आधार पर गिरा है. हालांकि, भारत की निर्यात पर निर्भरता कुछ कम है.’’

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यूरोप और उत्तर अमेरिका में सुस्त रहने वाला है इकोनॉमिक ग्रोथ
क्षेत्रीय परिदृश्य के बारे में मूडीज ने कहा कि भारत समेत एपीएसी रीजन की प्रमुख इकोनॉमी भले ही महामारी संबंधी पाबंदियों को हटाने में देरी करने के बाद विस्तार कर रही है, यूरोप और उत्तर अमेरिका में मंदी की आशंका के कारण 2022 की तुलना में 2023 इकोनॉमिक ग्रोथ के लिहाज से सुस्त रहने वाला है.

आगामी वर्ष में एपीएसी रीजन में मंदी की कोई आशंका नहीं 
उन्होंने कहा, ‘‘आगामी वर्ष में एपीएसी रीजन में मंदी की कोई आशंका नहीं है हालांकि इस क्षेत्र को ऊंची ब्याज दरों और ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ में नरमी से प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा.’’

Tags: Economic growth, Economy, Moody, Recession

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