e0a49ae0a4bfe0a495e0a4a8 e0a4b6e0a589e0a4aa e0a4b8e0a587 e0a4b8e0a4a4e0a58de0a4a4e0a4be e0a495e0a587 e0a4b8e0a4bfe0a482e0a4b9e0a4be
e0a49ae0a4bfe0a495e0a4a8 e0a4b6e0a589e0a4aa e0a4b8e0a587 e0a4b8e0a4a4e0a58de0a4a4e0a4be e0a495e0a587 e0a4b8e0a4bfe0a482e0a4b9e0a4be 1

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे ने एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है. नारायण राणे ने अपनी महाराष्ट्र स्वाभिमान पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया है. शिवसेना से राजनीति की शुरुआत करने वाले नारायण राणे अब बीजेपी के हो गए हैं. उनसे पहले उनके दो बेटे नीलेश और नितेश बीजेपी ज्वाइन कर चुके थे.

बीजेपी ने कंकावली से नितेश राणे को अपना उम्मीदवार बनाया है. इसका शिवसेना ने पुरज़ोर विरोध किया है. क्योंकि शिवसेना और पूर्व शिवसैनिक रह चुके नारायण राणे के बीच अदावत का इतिहास पुराना है. शिवसेना ने कंकावली से सतीश सावंत को उतारकर नितेश राणे को सबक सिखाने की बात की है.

नारायण राणे केवल साढ़े सात महीने ही सीएम रहे लेकिन महाराष्ट्र की सियासत में वो बड़ा कद और दखल रखते हैं. यही वजह है कि उनकी पार्टी के बीजेपी के विलय में मौजूद रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नारायण राणे की वजह से बीजेपी को फायदा पहुंचेगा.

चिकन शॉप से राजनीति के गलियारे का सफर

तकरीबन तीन दशक की सियासत में नारायण राणे ने बड़ी तेजी से करवटें बदली हैं. नारायण राणे का जन्म 10 अप्रैल 1952 को एक सामान्य परिवार में हुआ. राजनीति में आने से पहले नारायण राणे ने रोजगार के लिए एक चिकन शॉप खोली थी. नारायण राणे के विरोधी उनके आपराधिक इतिहास का आरोप लगाते हैं. राणे पर आरोप है कि साठ के दशक में वो उत्तर-पूर्व के चेंबूर इलाके में सक्रिय हरया-नारया गैंग से जुड़े थे. वहीं घाटला पुलिस स्टेशन में राणे के खिलाफ हत्या का भी मामला दर्ज बताया जाता है. ये भी कहा जाता है कि विरोधी गैंग के महादेव ठाकुर से बदला लेने के लिए राणे ने शिवसेना का दामन थामा था.

READ More...  महाराष्ट्र में किसानों के बीच लोकप्रिय होने की बालासाहेब थोराट की ये है बड़ी वजह

युवाओं के बीच लोकप्रिय थे नारायण राणे

साल 1968 में केवल 16 साल की उम्र में ही नारायण राणे युवाओं को शिवसेना से जोड़ने में जुट गए. शिवसेना में शामिल होने के बाद नारायण राणे की लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती चली गई. युवाओं के बीच नारायण राणे की ख्याति को देखकर शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे भी प्रभावित हुए. उनकी संगठन की क्षमता ने उन्हें जल्द ही चेंबूर में शिवसेना का शाखा प्रमुख बना दिया.

साल 1990 में पहली बार बने विधायक

राणे के युवा जोश और नेतृत्व क्षमता ने उनके सियासी कद को बड़ी तेजी से ऊंचा उठाने का काम किया. साल 1985 से 1990 तक राणे शिवसेना के कारपोरेटर रहे. साल 1990 में वो पहली दफे शिवसेना की पार्टी से विधायक बने. इसके साथ ही वो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बने.

छगन भुजबल का शिवसेना छोड़ना रहा टर्निंग पाइंट

लेकिन राणे के सियासी करियर ने रफ्तार तब पकड़ी जब छगन भुजबल ने शिवसेना छोड़ दी. साल 1996 में शिवसेना-बीजेपी सरकार में नारायण राणे राजस्व मंत्री बने. इसके बाद मनोहर जोशी के मुख्यमंत्री पद से हटने पर राणे को सीएम की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला. 1 फरवरी 1999 को शिवसेना-बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार में नारायण राणे मुख्यमंत्री बने. हालांकि सीएम की कुर्सी का सुख थोड़े समय तक ही रहा.

उद्धव ठाकरे की ताजपोशी पर राणे ने की बगावत

इसके बाद शिवसेना से राणे के मोहभंग होने की शुरुआत हुई. उद्धव ठाकरे के शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष के ऐलान होते ही नारायण राणे के सुरों में बगावत हावी होने लगी. राणे ने उद्धव की प्रशासनिक योग्यता और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए जिसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. शिवसेना छोड़ने के बाद नारायण राणे 3 जुलाई 2005 में कांग्रेस में शामिल हो गए.

READ More...  OSSTET Answer Key 2021: ओडिशा TET 2021 की आंसर की जारी, इस लिंक से करें डाउनलोड

शिवसेना से बगावत करने के बावजूद राणे विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक बने. कांग्रेस सरकार में भी राणे राज्य के राजस्व मंत्री बने. हालांकि महाराष्ट्र की पृथ्वीराज सरकार की भी आलोचना कर नारायण राणे सुर्खियां बटोर चुके हैं.

अब शिवसेना और कांग्रेस का सफर तय करने के बाद राणे बीजेपी में शामिल हुए हैं. देखना होगा कि राणे की महत्वाकांक्षाओं को बीजेपी में उड़ान मिलती है या नहीं. अब सवाल ये है कि नारायण राणे के बीजेपी में शामिल होने से महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? क्या नारायण राणे को बीजेपी और बीजेपी को राणे से फायदा मिलेगा?

Tags: Maharashtra asembly election 2019, Maharashtra Assembly Election 2019, Narayan Rane

Article Credite: Original Source(, All rights reserve)