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नई दिल्ली. चीन से सटे वास्तविक नियंत्रक रेखा (LAC) से महज 50 किलोमीटर से कम दूरी पर स्थित लद्दाख के न्योमा में देश का सबसे ऊंचा एयरफील्ड बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. केंद्र सरकार ने शनिवार को इसके लिए बोलियां आमंत्रित की है. इस एयरफील्ड को चीन द्वारा सीमापार के अपने हिस्से में तेजी से बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भारत के जवाब के रूप में देखा जा रहा है.

News18 को इस प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज़ मिले हैं, जिसके अनुसार यह अपग्रेडेड एडवांस लैंडिंग ग्राउंड दो साल में लड़ाकू विमानों के संचालन के लिए तैयार होने की उम्मीद है. इस प्रोजेक्ट पर लगभग 214 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह नया एडवांस लैंडिंग ग्राउंड 1,235 एकड़ में फैला होगा, जहां सैन्य बुनियादी ढांचे के साथ 2.7 किलोमीटर लंबा रनवे बनेगा. इसे लेकर सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस काम को पूरा करने के लिए ठेकेदारों से बोली आमंत्रित की है.

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न्यूज़18 को मिले प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार, इस रनवे का एलाइनमेंट ऐसा होगा कि विमान दोनों दिशाओं में लैंड कर सके. इसके लिए इस रनवे की चौड़ाई 45 मीटर से अधिक होगी. नए रनवे का स्थान लेह-लोमा रोड के पास होगा. ऐसे में यह नया एयरफील्ड एक ऐसी रणनीतिक संपत्ति होगी, जिसके पूरी तरह तैयार हो जाने पर इस संवेदनशील क्षेत्र में सैनिकों और रसद दोनों की त्वरित आवाजाही संभव हो सकेगी.

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बता दें कि न्योमा दक्षिणी लद्दाख में 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. लेह से करीब 180 किलोमीटर दूर न्योमा में स्थित यह एडवांस लैंडिंग ग्राउंड भारत की सैन्य क्षमता में एक महत्वपूर्ण अंतर को पूरा करेगा. इस लैंडिंग ग्राउंड में अपाचे हेलिकॉप्टर, चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर, एमआई-17 हेलिकॉप्टर और सी-130जे स्पेशल ऑपरेशंस एयरक्राफ्ट का संचालन होता है.

बता दें कि भारत और चीन के बीच एलएसी पर वर्ष 2020 के बाद से ही तनावपूर्ण स्थिति बन हुई है, जब गलवान घाटी में झड़प के कारण हिंसा हुई थी. वहीं इस महीने की शुरुआत में तवांग में भी भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी.

Tags: India china dispute, LAC, Ladakh Border

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