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बाराबंकी. यूपी के बलिया के रहने वाले भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल रह चुके गोरख सिंह सेंगर ने लखनऊ से एक अनूठी पदयात्रा शुरू की है. उन्‍होंने सभी प्रकार की सुख सुविधाएं होने के बावजूद अयोध्या में बन रहे राम मंदिर तक पैदल जाने का निर्णय लिया है. वहीं, जब सेंगर से इस यात्रा का उद्देश्य जानने का प्रयास किया तो उन्‍होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है. इसी क्रम में उनकी यह जानने की प्रबल इच्छा हुई कि तमाम लोग सुविधा सम्पन्न नहीं हैं, ऐसे लोग यदि आस्था के चलते पैदल यात्रा करना चाहते हैं, तो उन्हें रामलला के मंदिर तक पहुंचने में कितना समय लगेगा. इसके साथ ही रास्ते के अनुभव क्या होंगे? क्या व्यवस्था मिल सकती है?

यही नहीं, इस पदयात्रा में गोरख सिंह सेंगर की 15 वर्षीय बेटी भी उनका बखूबी साथ दे रही है. रिटायर्ड कर्नल और उनकी बेटी की इस पदयात्रा का मकसद अयोध्या में बन रहे राम मंदिर तक पैदल चलकर रास्ते के अनुभवों और लोगों के विचार जानना है. इसके अलावा पिता और बेटी की जोड़ी अपनी इस पदयात्रा के दौरान केंद्र की अग्निपथ योजना को लेकर भी लोगों को संदेश देना चाहती है.

अग्निपथ योजना को लेकर कही ये बात
गोरख सिंह सेंगर ने कहा कि अग्निपथ और अग्निवीर मुद्दे पर युवा गुमराह हो गए, जिन्हें इस पदयात्रा के माध्यम से वह संदेश भी देना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि अग्निपथ और अग्निवीर जैसे फैसले एक रात में नही लिए जाते. प्रधानमंत्री मोदी कोई फैसला तुरंत नहीं लेते हैं. सेंगर ने बताया कि जब वह 10 साल पहले गुलमर्ग में पोस्टेड थे, तब जनरल बिपिन रावत ने इस योजना की चर्चा की थी. एक दशक से इस योजना पर विचार किया जा रहा था.

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सेना नौकरी का जरिया नहीं बल्कि राष्ट्रभावना
रिटायर्ड कर्नल सेंगर ने बताया कि सेना नौकरी का जरिया नहीं हो सकती बल्कि यह राष्ट्रभावना है. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को मजबूत करने के लिए युवाओं की आवश्यकता है. वह गुमराह न हों बल्कि इस सेवा से मिलने वालों लाभ पर विचार करते हुए भारतीय सेना को मजबूती देने का विचार करें.

15 साल की पलाशिका बनी पिता की हमराह
भारतीय सेना में कर्नल रह चुके सेंगर की 15 वर्षीय पुत्री पलाशिका भी उनकी पदयात्रा में सहभागी बनी हुई है. वह देहरादून स्थित एक स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही है. सेना के प्रति सम्मान रखने वाली पलाशिका ने बताया कि उसके पिता की इस यात्रा में वह स्वयं से तैयार हुई और सैनिक पिता के कदम से कदम मिलाकर इस यात्रा को पूरी करना चाहती है. जबकि अग्निपथ योजना का समर्थन करते हुए पलाशिका कहती है कि एक युवा के तौर पर वह इसका समर्थन करती है.

Tags: Agniveer, Ayodhya ram mandir, Indian army

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