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देश की विभिन्‍न अदालतों (Courts) में जमानत (Bail) के मामलों की सुनवाई (Court Hearing) में होने वाली देरी पर

ने सोमवार को नाराजगी जताई है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान इस पर चिंता व्‍यक्‍त की कि कार्यप्रणाली की खामी के चलते आरोपियों को उनका केस पूरा होने तक 20 से 25 साल तक जेल में रहना पड़ता है.

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high Court) की ओर से रद्द की गई जमानत के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई हुई. इस दौरान सीजेआई रंजन गोगोई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि बड़ी संख्‍या में उन आरोपियों को 20 से 25 साल तक जेल काटनी पड़ती है, जिन्‍हें उनके मामले में जमानत मिल सकती है. अगर वे बाहर आ भी जाते हैं, तो इस दौरान उन्‍हें काफी कुछ झेलना पड़ चुका होता है.

एक मामले में आरोपी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए उसके वकील देवदत्‍त कामत ने दलील दी कि भविष्‍य में ऐसी कोई संभावना नहीं है कि उसकी अपील पर अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा. ऐसे में यह अन्‍यायपूर्ण होगा कि आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखा जाए.

‘पुराने मामलों की सुनवाई कर रहा हाईकोर्ट’
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गंभीरता जताई और माना कि इलाहाबाद हाईकोर्ट 25 साल पुराने मामलों पर सुनवाई कर रहा है. बेंच ने कहा, ‘हम क्‍या कर रहे हैं? यही सच्‍चाई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट काफी पुराने मामलों की अब सुनवाई कर रहा है. लेकिन क्‍या हम उन सभी आरोपियों को रिहा कर दें क्‍योंकि उनकी याचिकाएं लंबे समय से लंबित हैं? हम ऐसा भी नहीं कर सकते.’

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सुधार के लिए मांगे विचार
वकील देवदत्‍त कामत ने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे मामलों के लिए कुछ गाइडलाइन तय करने की मांग की. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने देवदत्‍त से इस मामले में अपने विचार पेश करने के लिए कहा. साथ ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्‍ट वकील आरएस सोढ़ी से भी विचार मांगे ताकि ऐसी स्थितियों को जल्‍द सुधारा जा सके. सोढ़ी दिल्‍ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज हैं. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई गुरुवार को करेगा.

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FIRST PUBLISHED : November 04, 2019, 15:01 IST

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