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नई दिल्ली. इन दिनों भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत के हादसे को लेकर खूब खबरें चल रही हैं, जिसमें बार-बार गोल्डन ऑवर का जिक्र हो रहा है. खबरों में बताया गया है कि ऋषभ पंत को उनके गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचा दिया गया, जिससे अब वो सुरक्षित हैं. हालांकि गनीमत रही कि भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत की हालत स्थिर है. पूरा देश उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है. आमतौर पर किसी दर्दनाक घटना के बाद के पहले घंटे को गोल्डन ऑवर (Golden Hour) कहा जाता है.

गोल्डन ऑवर के दौरान चिकित्सा सहायता दी जाती है तो इससे पीड़ितों के बचने की संभावना बढ़ जाती है और उनकी चोटों की गंभीरता भी कम हो जाती है. हालांकि ऋषभ पंत (Rishabh Pant) पूरे होश में थे. उनके सिर पर गंभीर चोट था. उन्होंने खुद अपने हाथों से कार का शीशा तोड़ा और जलती हुई कार से बाहर निकले थे. भारत में गोल्डन ऑवर को कानूनी मान्यता प्राप्त है. मोटर वेहिकल एक्ट, 1988 की धारा 2(12ए) इसे, ‘एक दर्दनाक चोट के बाद एक घंटे तक की समयावधि के रूप में परिभाषित करती है, जिसके दौरान शीघ्र चिकित्सा देखभाल के माध्यम ले मृत्यु को रोकने की संभावना सबसे अधिक होती है.’

‘गोल्डन ऑवर’ की अवधारणा पहली बार 1960 में डॉ. एडम काउली द्वारा पेश की गई थी, जिन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “यदि आप गंभीर रूप से घायल हैं, तो आपके पास जीवित रहने के लिए 60 मिनट से भी कम समय है. अब आप ठीक उसी समय मर सकते हैं, यह हो सकता है 3 दिन बाद या 2 सप्ताह बाद मरें. लेकिन आपके शरीर में कुछ ऐसा हुआ है जो पूर्ण नहीं है.” एक्सपर्ट का मानना है कि गोल्डन ऑवर के दौरान सही देखभाल से बचने की संभावना बढ़ जाती है और साथ ही चोट के प्रभाव कम हो जाते हैं. गोल्डन ऑवर में बहुत ही कम समय में घायल व्यक्ति को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर पहुंचाना चाहिए.

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Tags: Health News, Rishabh Pant

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