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मॉस्को. यूक्रेन से चल रहे युद्ध के बीच में रूस की नौसेना ने जिरकॉन नाम की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया है. यह मिसाइल सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता को प्रदर्शित करती है. यह लॉन्च जिरकॉन के परीक्षण की सीरीज में नया था. इस मिसाइल को इस साल के अंत तक सेवा में लिया जाएगा. रक्षा मंत्री का कहना है कि मिसाइल का प्रक्षेपण बरेंट्स सागर में किया गया था.

मिसाइल ने सफेद सागर में करीब 1000 किमी दूर अपने अभ्यास लक्ष्य को सफलतापूर्वक मार गिराया था. यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. जिरकॉन का प्रक्षेपण भी उसी का एक हिस्सा है. विस्तार से समझते हैं क्या है जिरकॉन और क्यों है इतना अहम…

क्या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल?
पुतिन ने रूस के शस्त्रागार में मौजूद अजेय हथियारों के परिवार में हाइपरसोनिक मिसाइल को नया सदस्य बताया है. इससे पहले मॉस्को में किन्झल मिसाइल के प्रक्षेपण के दौरान बताया गया था कि हाइपरसोनिक मिसाइल मैक 5 या उससे तेज (ध्वनि की गति से 5 गुना ज्यादा) गति से आगे बढ़ती है. क्योंकि उसका प्रक्षेप पथ यानी ट्रेजेक्ट्री ( किसी भी फेंकी गई या प्रक्षेपित की गई वस्तु का रास्ता) नीचे होता है, उच्च गति, फुर्तीलेपन की वजह से अमेरिका के रक्षा सेटेलाइट और रडार का हाइपरसोनिक मिसाइल को पकड़ पाना बेहद मुश्किल होगा.

हालांकि इसकी परमाणु हथियारों को ले जाने की क्षमता देश के खतरे को बढ़ा सकती है. इससे परमाणु संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है. सैन्य विश्लेषक वासिली काशिन ने एएफपी को बताया कि युद्ध में हाइपरसोनिक मिसाइल के इस्तेमाल का यह पहला मामला है. रूस का कहना है कि उसने पहली बार युद्ध में अपनी सटीक मिसाइल किंझल या डैगर मिसाइल का मार्च में प्रयोग किया था.

मॉस्को के हायर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में कंप्रिहेन्सिव यूरोपियन एंड इंटरनेशनल स्टडीज विभाग के प्रमुख काशिन का कहना है कि क्रूज मिसाइल की तुलना में भूमिगत संग्रहण क्षेत्र को समाप्त करने की क्षमता हाइपरसोनिक हथियारों में ज्यादा होती है. हाइपरसोनिक मिसाइल की उच्च गति से चलने की वजह से इसकी उच्च भेदक और ध्वस्त करने की ताकत कई गुना ज्यादा हो जाती है. उन्होंने कहा कि इसी तरह इसके फुर्तीले होने की वजह से इसे पकड़ पाना भी बहुत कठिन होता है.

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जिरकॉन की क्षमता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बताया कि जिरकॉन ध्वनि की गति से 9 गुना तेज उड़ान भर सकती है और इसकी मारक क्षमता 1000 किमी की है. पुतिन ने कहा कि इसकी तैनाती से रूस की सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा. जिरकॉन का रूसी क्रूजर, युद्धपोत और पनडुब्बी में इस्तेमाल हो सकता है. इसे दुश्मन के जहाज और ज़मीन दोनों के खिलाफ प्रयोग किया जा सकता है. रूस में विकसित की जा रही कई हाइपरसोनिक मिसाइल में से यह एक है.

रूसी अधिकारियों ने जिरकॉन की क्षमताओं की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा एंटी मिसाइल सिस्टम से इसे पकड़ पाना नामुमकिन है.पुतिन जो यूक्रेन मामले में पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप को लेकर पहले भी चेतावनी दे चुके हैं. उन्होंने दोबारा चेताते हुए कहा कि जिरकॉन से लैस रूसी युद्धपोत रूस को तटस्थ जल में पल भर में फैसला लेने वाले केंद्रों पर हमला करने की क्षमता प्रदान करेंगे.

हाइपरसोनिक को लेकर रूस इतना उत्साहित क्यों?
रिपोर्ट बताती हैं कि हाइपरसोनिक हथियारों के प्रति रूस की जो प्रतिबद्धता है वह अमेरिकी नौसैनिक तकनीकी बढ़त का जवाब है. यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिकी नौसेना 12 परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट करियर के बेड़े रखने की योजना बना रही है, जबकि रूस के पास केवल एक ही है और अगर इसका इंजन बंद पड़ जाता है तो इसकी सहायता के लिए टगबोट का इस्तेमाल किया जाता है.

तमाम आधुनिक अमेरिकी विमानवाहक पोत होने के बावजूद यह जिरकॉन मिसाइल के लिए असुरक्षित ही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही रक्षा प्रणालियां 100 मील दूर से जिरकॉन का पता लगा लें, लेकिन उनके पास बचाव या जवाब देने के लिए महज एक मिनट ही होगा. स्क्रेमजेट पर आधारित विशुद्ध हाइपरसोनिक मिसाइल के उलट यह हाइब्रिड क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइल है. विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह अमेरिकी एजिस कॉम्बेट सिस्टम पर भारी पड़ सकती है.

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