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Rani Lakshmibai Death Anniversary: ‘बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी,  खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी’ इस कविता को पढ़ते हुए हम सब बड़े हुए हैं. ये वो पक्तियां हैं जिसे सुनकर ही हमारे अंदर अदम्य साहस और शक्ति का संचार होने लगता है. दुश्मनों को ललकारती महारानी लक्ष्मीबाई (Maharani Lakshmibai) की एक अनदेखी सी तस्वीर हमारे सामने खिंच जाती है. लक्ष्मीबाई की सोशल मीडिया पर एक तस्वीर अक्सर वायरल होती रहती है और दावा किया जाता है कि ये लक्ष्मीबाई की ही तस्वीर है. ये दावा कितना सच है, हम नहीं जानते लेकिन छोटे से लेकर बड़े पर्दे पर लक्ष्मीबाई को दिखाने की कोशिश कई बार की गई है. इतिहास के मुताबिक 18 जून 1857 को अंग्रेजों से लड़ते हुए लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुई थीं. उनके शहादत दिवस पर आपको बताते हैं उन फिल्मों और धारावाहिक के बारे में जिसकी मदद से वीरांगना की जिंदगी को छोटे-बड़े पर्दे पर पेश किया गया.

हमारे देश में बहुत सी वीरांगनाए हुईं हैं जिसने अपने देश की रक्षा और मान-सम्मान के लिए हंसते-हंसते प्राणों की आहुति दे दी है. लेकिन सबसे अधिक पॉपुलर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई हैं. आज भी किसी तेज-तर्रार महिला या लड़की को झांसी की रानी की उपाधि दे दी जाती है. ऐसे व्यक्तित्व ने फिल्मकारों को भी काफी आकर्षित किया है और फिल्म और टीवी धारावाहिक के माध्यम से लक्ष्मीबाई की वीरगाथा को दिखाया गया है.

रानी लक्ष्मीबाई के ऐतिहासिक तथ्यों के लिए 6 राइटर्स की ली मदद

‘मिर्जा गालिब’ जैसी फिल्में बना चुके सोहराब मोदी ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर सन 1953 में फिल्म ‘झांसी की रानी’ बनाई थी. कहते हैं कि वृंदावन लाल वर्मा के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म को बनाने में सोहराब ने ऐतिहासिक तथ्यों को दुरूस्त रखने और फिल्म के स्क्रीनप्ले के लिए करीब 6 राइटर्स की मदद ली थी. इतना ही नहीं लक्ष्मीबाई का रोल उनकी बीवी मेहताब ने निभाया था तो खुद सोहराब राजगुरू के रोल में थे.

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Jhansi ki Rani Film
‘झांसी की रानी’ बनाने के लिए सोहराब मोदी ने हॉलीवुड की मदद ली थी.

‘The Tiger And The Flame’

सोहराब मोदी ने जब इस फिल्म को बनाने की तैयारी की तो सबसे बड़ी मुश्किल टेक्निकल सपोर्ट की थी. उस दौर में इंडिया में फिल्म मेकिंग में अभी क्रांति नहीं आई थी. इसलिए सोहराब ने हॉलीवुड के फेमस सिनेमैटोग्राफर अर्नेस्ट हॉलर की मदद ली थी और एडिटिंग रसेल एलॉयड ने की थी. अमेरिका में ये फिल्म ‘द टाइगर एंड द फ्लेम’ के नाम से अंग्रेजी में रिलीज हुई थीं. स्टार कास्ट वही थी लेकिन फिल्म की भाषा अंग्रेजी थी. ये फिल्म हिंदी सिनेमा की क्लासिकल फिल्म मानी जाती है.

Jhansi ki Rani
कंगना रनौत स्टारर फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ .

‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’

अब बात उस फिल्म की जिसके लिए बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने काफी मेहनत की थी. फिल्म की मेकिंग से जुड़ा एक मीम्स अक्सर वायरल होता रहता है. ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ साल 2019 में रिलीज हुई थी. कंगना ने झांसी की रानी का रोल प्ले किया था और डायरेक्शन भी किया था. ‘बाहुबली’ के लेखक के वी विजयेंद्र प्रसाद ने फिल्म की कहानी लिखी थी. काफी महंगे बजट वाली इस फिल्म को लेकर काफी विवाद भी हुआ था. ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ में रानी लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर शादी और अंग्रेजों से युद्ध की कहानी दिखाई गई है. इस फिल्म को दुनिया भर के 50 देशों में और हिंदी समेत तमिल, तेलुगू में भी रिलीज किया गया था. कहते हैं कि फिल्म में करीब डेढ़ सौ साल पुराने हथियार इस्तेमाल किए गए.

Jhansi ki Rani serial
उल्का गुप्ता और कृतिका सेंगर ने शानदार तरीके से निभाया था लक्ष्मीबाई का किरदार.

‘झांसी की रानी’ टीवी सीरियल

 झांसी की रानी के बलिदान और साहस की गाथा पर फिल्म के अलावा टीवी धारावाहिक भी बनाया गया जो दर्शकों को बेहद पसंद आया था. साल 2009 में ‘झांसी की रानी’ सीरियल को टेलीकास्ट किया गया था. जितेंद्र श्रीवास्तव के निर्देशन में बना ये धारावाहिक काफी चर्चा में भी रहा. रानी लक्ष्मीबाई उर्फ मनु के बचपन के किरदार को निभाने वाली उल्का गुप्ता के तेजस्वी चेहरे को दर्शक आज भी याद करते हैं. उल्का की दमदार अदाकारी की वजह से इस शो की टीआरपी में भी खूब इजाफा हुआ था. बाद में जब युवा लक्ष्मीबाई के किरदार में कृतिका सेंगर को उतारा गया तो ऐसा लगा कि साक्षात लक्ष्मीबाई ही उतर आई हो. कृतिका ने भी इस सीरियल के साथ न्याय किया.

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सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता

झांसी को अंग्रेजों से बचाने और अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बांधकर युद्ध के मैदान में कूद पड़ने वाली महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर हम आपको राष्ट्रीय चेतना की सजग कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कालजयी कविता की कुछ पक्तियां पढ़वाते हैं जिसे आप-हम बचपन से सुन रहे हैं और आज की पीढ़ी भी पसंद करती है.

‘सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी.

गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी,दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी.

चहक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी’.

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