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शिवगंगाः तमिलनाडु के शिवगंगा की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को कचनाथम ट्रिपल मर्डर केस में 27 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. शिवगंगा जिले के कचनाथम गांव में 28 मई, 2018 को एक प्रभावशाली समुदाय के हथियार बंद गिरोह ने तीन दलितों की हत्या कर दी थी. इसी केस में 4 साल बाद अदालत से फैसला आया है.

शिवगंगा जिले के तिरुप्पचेट्टी के पास 28 मई, 2018 की रात को कचनंथम गांव के अनुसूचित जाति समुदाय के तीन लोगों के. अरुमुगम (65), ए. णमुगनाथन (31), और वी. चंद्रशेखर (34) की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. मंदिर में आयोजित एक समारोह में सम्मान देने को लेकर हुए विवाद के बाद इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था.

शिवगंगा में SC/ST (POA) अधिनियम के तहत मामलों की विशेष सुनवाई करने वाली अदालत ने सजा सुनाई. अदालत के न्यायाधीश मुथुकुमारन ने 1 अगस्त, 2022 को इस हत्याकांड में 27 आरोपियों को दोषी ठहराया था. सजा का ऐलान 5 अगस्त को हुआ.

हत्याकांड में 33 लोग थे आरोपी
इस मामले में चार किशोरों सहित एक प्रभावशाली समुदाय के कुल 33 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था. मुकदमे के दौरान एक की मौत हो गई थी. दोषियों को दी जाने वाली सजा पर विशेष अदालत के न्यायाधीश ने 3 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दोषियों और पीड़ितों के परिजनों को सुना था.

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने 2019 में कुछ आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि जिस क्रूर तरीके से प्रभावशाली समुदाय के पुरुषों के एक समूह ने अनुसूचित जाति के लोगों की हत्या की थी, वह सामंतवाद के बदसूरत चेहरे की याद दिलाता है. शिवगंगा जिले में जातिगत विद्वेष भड़काने और शांति व्यवस्था पर इस घटना का प्रभाव पड़ा.

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क्या था पूरा मामला?
दरअसल, 26 मई 2018 को 2 दलित पुरुषों द्वारा शिवगंगा के कचथानम गांव में करुपन्नास्वामी मंदिर उत्सव के दौरान उच्च जाति के एक 19 वर्षीय युवक को सम्मान नहीं देने के बाद यह घटना हुई थी. युवक सुमन ने अपने भाई अरुण और समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ 28 मई को दलित बस्तियों पर हमला किया और के. अरुमुगम, ए. षणमुगनाथन की हत्या कर दी. हमले में घायल एक अन्य दलित व्यक्ति, वी. चंद्रशेखर का 2 दिन बाद अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था.

Tags: Crime News, Tamil Nadu news

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