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नई दिल्ली. ट्रेडमार्क का उल्लंघन, बिना बिल के दवाईयां बेचना, बिना रसीद के कच्चा माल खरीदना, गुणवत्ता अनुपालन के मुद्दे और नकली दवाओं का निर्माण और भी बहुत कुछ – दवा बनाने में आने वाली समस्याओं का पता लगाने के लिए भारत ने यह व्यापक अभियान चलाया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, जोखिम आधारित नजरिए के अनुसार चिन्हित दवा निर्माण इकाइयों में ऑडिट और छापे मारने के लिए राज्य दवा नियंत्रण प्रशासन के साथ-साथ छह टीमों का गठन किया गया है.

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