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हाइलाइट्स

बाली जात्रा महोत्‍सव को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने किया जिक्र
जी20 में अपने संबोधन के दौरान बताया महोत्‍सव का महत्‍व
ओडिशा में हर साल मनाया जाता है ये महोत्‍सव, है बहुत खास

नई दिल्‍ली. इंडोनेशिया में हो रहे G20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि मैं आपसे बाली में बात कर रहा हूं, यहां से करीब 1500 किलोमीटर दूर ओडिशा के कटक में बाली जात्रा नाम का मेला लगता है. यह आयोजन भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों साल पुराने व्यापार संबंधों का जश्न मनाता है.’ दरअसल बाली जात्रा उत्सव, जो हर साल ओडिशा में होता है. अतुल्य उड़ीसा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बार बाली जात्रा उत्सव कटक में 8 नवंबर को शुरू हुआ है. ओडिशा द्वारा मनाया जाने वाला यह त्योहार क्या है और इसका इंडोनेशिया के बाली से संबंध क्या है?

‘जब प्राचीन नाविक बाली के लिए रवाना हुए थे’
वार्षिक भव्य बाली जात्रा महोत्सव ओडिशा के कटक में महानदी नदी के तट पर मनाया जाता है. यह उस दिन की याद में आयोजित होता है जब यहां के प्राचीन साधबास ( प्राचीन नाविक) इंडो‍नेशिया के बाली की यात्रा पर रवाना हुए थे. बाली की सुदूर भूमि के लिए यह यात्रा व्यापार और सांस्कृतिक रूप से विस्तार करने के लिए थी. यह उत्‍सव, कार्तिक के महीने के दौरान आयोजित सभी धार्मिक उत्सवों की परिणति का भी प्रतीक है, जिसे हिंदू वर्ष के 12 महीनों में सबसे शुभ माना जाता है. त्योहार में इसे देखने आने वाले लाखों लोगों के लिए कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं. इस उत्‍सव में मेले का आयोजन भी शामिल है जिसमें बच्‍चे और बड़ों के लिए कई आकर्षण होते हैं. साथ ही राज्य भर से ओडिया व्यंजनों की बिक्री करने वाले फूड स्टॉल भी हैं. अन्य विक्रेता हस्तशिल्प, करघे, क्यूरियो और अन्य सामान बेचते हैं.

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ओडिशा के नाविकों ने पूर्णिमा के दिन शुरू की थी यात्रा
त्योहार की किंवदंती के अनुसार, ओडिशा के नाविकों ने पूर्णिमा के दिन को दूर की भूमि पर जाने के लिए अत्यधिक शुभ माना था. भारतीय संस्कृति की एक रिपोर्ट बताती है कि कलिंग साम्राज्य (आधुनिक ओडिशा) अपने शानदार समुद्री इतिहास के लिए प्रसिद्ध था. कलिंग की भौगोलिक स्थिति के कारण, ईसा पूर्व चौथी और पांचवीं शताब्दी में इस क्षेत्र में बंदरगाहों का विकास हुआ. ताम्रलिप्ति, माणिकपटना, चेलितालो, पलूर और पिथुंडा उन प्रसिद्ध बंदरगाहों में से थे, जिन्होंने भारत को समुद्र के द्वारा अन्य देशों के साथ जुड़ने की अनुमति दी थी. कलिंगों ने जल्द ही श्रीलंका, जावा, बोर्नियो, सुमात्रा, बाली और बर्मा के साथ व्यापार संबंध स्थापित किए. बाली चार द्वीपों में से एक था जिसे सामूहिक रूप से सुवर्णद्वीप के रूप में जाना जाता है, जिसे अब इंडोनेशिया के रूप में जाना जाता है.

इंडोनेशियाई द्वीपों के साथ व्यापार करने के लिए बनाई थीं बड़ी नावें 

कलिंगों ने ‘बोइतास’ के नाम से जानी जाने वाली बड़ी नावों का निर्माण किया और उनका उपयोग इंडोनेशियाई द्वीपों के साथ व्यापार करने के लिए किया. इन जहाजों में तांबे के पतवार थे और 700 आदमी और जानवर ले जा सकते थे. रिपोर्ट में कहा गया है आश्चर्यजनक रूप से, इन जहाजों की आमद के कारण बंगाल की खाड़ी को कभी कलिंग सागर के रूप में जाना जाता था. समुद्री मार्गों पर कलिंगों के प्रभुत्व को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि कालिदास ने अपनी महारचना रघुवंश में कलिंग के राजा को ‘समुद्र के भगवान’ के रूप में संदर्भित किया.

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ओडिया व्‍यापारियों ने इंडोनेशिया में पहुंचाया हिंदू धर्म 

कलिंग के लोग अक्सर बाली द्वीप के साथ व्यापार करते थे. वस्तुओं के आदान-प्रदान के परिणामस्वरूप विचारों और विश्वासों का आदान-प्रदान भी हुआ. ओडिया व्यापारियों ने बाली में बस्तियां स्थापित कीं. इन व्‍यापारियों की अपनी संस्कृति और नैतिकता से बाली के लोग भी प्रभावित हुए और इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में हिंदू धर्म का प्रसार हुआ. हिंदू धर्म, बाली की अवधारणाओं के साथ अच्छी तरह से मिला हुआ है. और आज भी उनकी अधिकांश आबादी ‘बालिनी हिंदू धर्म’ का पालन करती है. वे शिव, विष्णु, गणेश और ब्रह्मा जैसे हिंदू देवताओं की पूजा करते हैं. शिव पीठासीन देवता के रूप में पूजनीय रहे और उन्हें बुद्ध का बड़ा भाई माना जाता रहा.

कैसे मनाया जाता है बाली जात्रा महोत्सव?
लोकप्रिय ओडिशा त्योहार बाली जात्रा महोत्सव पूर्णिमा के दिन शुरू होता है और महानदी नदी पर गदगड़िया घाट पर सात दिनों तक चलता है. यहां लोग त्योहार के देवता भगवान कार्तिकेश्वर की पूजा करते हैं. यह त्योहार उस दिन की याद में मनाया जाता है, जब ओडिशा के नाविकों ने जावा, बाली, बोर्नियो, श्रीलंका और सुमात्रा की दूर की भूमि पर अपना पहला धर्मयुद्ध शुरू किया था. उनके सम्मान में, स्थानीय लोग कागज, केले के पेड़ की छाल और कॉर्क से एक कृत्रिम नाव बनाते हैं और उसे पानी में तैराते हैं.

बोइता बंदना: नाव में दीपक जलाने की परंपरा 

वहीं, यह महोत्‍सव नाव में दीपक जलाने की परंपरा को भी देखता है, जिसे बोइता बंदना के नाम से जाना जाता है. टूर माई इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दीपकों से जगमगाती अनगिनत नावों का यह एक अविश्वसनीय परिदृश्य है. इसी उत्‍सव में शिल्प बाजार एक और आकर्षण है. यहां लगभग 150 स्टालों पर हस्तशिल्प और पारंपरिक चांदी की बिक्री होती है. इसके अलावा पर्यटकों और आगंतुकों के लिए नौका विहार के अवसरों का आयोजन होता है. कटक में, बाली जात्रा हर साल बाराबती किला क्षेत्र के पास एक बड़े खुले मेले के रूप में मनाया जाता है. इसमें कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं.

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Tags: G20 Summit, Pm narendra modi

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