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नई दिल्ली. बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चटगांव से करीब 40 किलोमीटर दूर सीताकुंड में आग लगने के तीन दिन बाद फायर ब्रिगेड ने मंगलवार को कंटेनर डिपो में आग पर काबू पा लिया. इस भीषण आगजनी में 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई.  एक वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारी को संदेह है कि कंपनी द्वारा सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया था. ड्रोन फुटेज में शनिवार की देर रात शुरू हुई आग से धुंआ और जले हुए कंटेनरों की कतारें दिखाई दे रही हैं. अधिकारी अभी तक इस भीषण आगजनी के कारणों का पता नहीं लगा सके हैं. लेकिन संदेह है कि हाइड्रोजन पेरोक्साइड के एक कंटेनर के चलते आग लगी थी. दमकल सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मोनिर हुसैन ने घटनास्थल से रायटर को बताया, “आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया गया है, लेकिन आगे विस्फोट का कोई खतरा नहीं है क्योंकि हमारी टीम ने एक-एक करके रासायनिक कंटेनरों को सुलझा लिया है.”

साथ ही यह भी बताया कि “हमें कोई बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपाय नहीं मिला है. बस कुछ आग बुझाने वाले यंत्र रखे हुए थे, और कुछ नहीं. उन्होंने खतरनाक रसायनों के लिए भंडारण दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है और पीड़ित लोगों को न्याय मिलेगा. बता दें कि बांग्लादेश हाल के दशकों में कपड़ों का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है, लेकिन इसके औद्योगिक सुरक्षा मानकों ने अपने आर्थिक विकास के साथ तालमेल नहीं रखा है और कारखानों और अन्य कार्यस्थलों में आग लगना आम बात हो गई है.

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वहीं मृतकों की संख्या को लेकर पुलिस ने कहा कि पीड़ितों की दोहरी गिनती के कारण मरने वालों की संख्या को 49 से घटाकर 41 कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि मरने वालों में कम से कम नौ दमकलकर्मी हैं और तीन लापता हैं. चटगांव के मुख्य चिकित्सक मोहम्मद इलियास हुसैन ने कहा कि कुछ घायलों की हालत गंभीर है. पुलिस ने कहा कि 200 या इससे अधिक घायलों में से 50 बचाव अधिकारी थे. अधिकारियों ने कहा कि नहरों और आसपास के तट पर रसायनों को फैलने से रोकने की कोशिश के लिए सैनिकों को तैनात किया गया था.

बता दें कि बांग्लादेश में आखिरी बड़ी आग पिछले साल जुलाई में लगी थी जब राजधानी ढाका के बाहर एक खाद्य प्रसंस्करण कारखाने में 54 लोग मारे गए थे. बांग्लादेश में सबसे भीषण आग 2012 में लगी थी, जब एक कपड़ा कारखाने में आग लगने से 112 श्रमिकों की मौत हो गई थी.

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