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भागलपुर2 घंटे पहले

भागलपुर के बूढ़नाथ मंदिर में नवरात्रि के वक्त पिछले 34 साल से मुस्लिम समुदाय के लोग शहनाई बजाते आ रहे है। उनका कहना है कि कलाकार का कोई धर्म नही होता। कलाकार बस अपने कला का प्रदर्शन करता है। ये लोग चार की संख्या में बनारस से हर साल नवरात्रि में भागलपुर आते है। फिर दसों दिन सुबह और शाम शहनाई बजाते हैं। बदले में उन्हें मंदिर की तरफ से मेहनताना दिया जाता है। वे लोग खुशी खुशी उसे अपने पास रख लेते है। उनमें से एक नजाकत अली भागलपुर में ही रह रहे है। उन्होंने भागलपुर में ही अपना घर बना लिया है। बाकी तीन काजिम हुसैन, जमीन हुसैन, आदम हुसैन हर साल बनारस से आते है।

कब और क्यों आए थे पहली बार

नजाकत अली बताते है कि साल 1981 में सबसे पहली बार आकाशवाणी में प्रोग्राम करने आए थे। इसके बाद यहां के बूढ़ा नाथ मंदिर में भी शहनाई बजाया था, उस वक्त मंदिर के अधिकारियों ने प्रसन्न होकर हमे हर साल नवरात्रि में आने को कहा। इसके बाद से हमलोग यहां हर साल आते है। 10 दिनों तक यहां मंदिर में ही एक कमरे में रुकते है। फिर सुबह 5 बजे से 7 बजे तक और शाम 5 बजे से 7 बजे तक शहनाई बजाते है।

रमजान और नवरात्रि दोनों में दिल से बजाते हैं

नजाकत कहते हैं कि हम कलाकार हैं, कलाकार का कोई जात और कोई धर्म नहीं होता है। हम रमजान में भी शहनाई बजाते है और नवरात्रि में भी। उन्होंने बताया कि हम कला की देवी मां सरस्वती को भी पूजते है। नजाकत कहते है कि मैं जब यहां शहनाई बजाता हूं तो माता की आराधना करता हूं। मैं दिल से बजाता हूं ताकि दुर्गा मां मेरी आवाज सुने,हमे आशीर्वाद दे। उन्होंने कहा कि भक्ति से ही कोई काम होती है। हमारे अंदर ना सरस्वती की दी हुई कला है जिसे मैं और मेरी टीम मां दुर्गा के सामने प्रदर्शित करते है।

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