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पटना13 मिनट पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे बुधवार को पटना पहुंचे। उन्होंने तेजस्वी यादव से मुलाकात की। दोनों ने एक दूसरे का खूब स्वागत किया। आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की। इस दरम्यान बिहार को युवा चेहरे याद आए। एक राहुल राज का और दूसरा सुशांत सिंह राजपूत का। राहुल राज के पिता की आंखों के आंसू अभी भी सूखे नहीं है।

राजनीति जरूर रंग बदल रही है। बात 27 अक्टूबर 2008 की है। राहुल राज को एनकाउंटर में मुंबई में इसलिए मार गिराया गया था कि वह बिहारियों से मारपीट का बदला लेने कट्टा लेकर मुंबई पहुंच गया था। तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद दोनों ने एक मंच पर आकर इस एनकाउंटर की आलोचना की थी। नई राजनीति के तहत बिहार के दो बड़े राजनेताओं द्वारा आदित्य ठाकरे के स्वागत के बाद भास्कर ने रोहित राज के पिता से उनके कदमकुआं स्थित आवास पर गुरुवार को मुलाकात की।

इस मुलाकात पर सियासत गरमाई है।

इस मुलाकात पर सियासत गरमाई है।

अपनी राजनीति के लिए नफरत फैलाने वाले गले मिल रहे !

राहुल राज के पिता कुंदन कुमार सिंह कुछ बोलने से पहले लंबी सांस लेते हैं। उनकी आंखों में आंसू भर आते हैं। वे कहते है कि ‘ मराहाष्ट्र के नेताओं ने वहां बिहारियों के खिलाफ जो नफरत फैलायी हुई है उसी का शिकार मेरा बेटा हो गया। उस समय रेलवे की परीक्षा में बिहारी छात्रों को मुंबई में बेरहमी से पीटा गया था। उसमें मेरे बेटे का दोस्त भी था। दोस्तों ने पटना आकर जो बातें बतायीं उससे मेरे बेटे के दिल में आग लग गई। इसके बाद उसका खून खौल उठा। वह मुंबई चला गया। मेरे बेटे को वहां फर्जी मुठभेड़ में मारा गया।

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उसके पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि उसके सीने में जहां गोली लगी, वहां गन पाउडर जमा है। ऐसा बहुत नजदीक से गोली मारने पर होता है। अब नफरत फैलाने वाले लोग गले मिल रहे हैं, अपनी राजनीति के लिए ! बिहारी अस्मिता की बात ये लोग करते हैं, बिहारी स्वाभिमान की बात करते हैं, जाकर बिहार दिवस मनाते हैं लेकिन जब बिहारियों को मारा-पीटा जाता है तो कोई मदद नहीं करता।’

लाल घेरे में राहुल राज।

लाल घेरे में राहुल राज।

बिहार सरकार मदद करती तो मैं मुंबई में केस लड़ लेता

कुंदन कुमार सिंह बताते हैं कि ‘मराठियों के अंदर बिहारियों को लेकर वहां के नेताओं ने इतनी नफरत भरी कि मेरे बेटे का पार्थिक शरीर जब पटना भेजा गया तो वे देखकर हतप्रभ थे। कहते हैं कि मराठियों से तो सम्मान की उम्मीद ही नहीं करनी चाहिए। मेरे बेटे का मृत शरीर जिस कॉफिन में भेजा गया था उसमें मैंने देखा कि उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। कफन तक नहीं था। कफन तो हम लोगों ने दिया।

मेरी आंखों में तो उस समय यह सब देखकर आंसू आ गए थे। बिहारियों का अपमान करने का कोई मौका वे लोग नहीं चूकना चाहते। मैं पूछता हूं कि राहुल राज अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए वहां गया था क्या? वो इमोशनल था। इमोशन में जाकर उसने अपनी जान दे दी। मैंने बेटे की मौत की लड़ाई पटना हाईकोर्ट तक लड़ी।

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि आप मुंबई कोर्ट में जाइए। मैं वहां तक नहीं जा सका। उस समय राज ठाकरे काफी एक्टिव थे और शिवसेना भी उनके साथ थी। बिहार सरकार ने मेरी मदद की होती तो मैं मुंबई कोर्ट में खड़ा हो जाता। तब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे। वे आज भी तो हैं ही। मैंने नीतीश कुमार को पत्र भी लिखा था, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं लिया। नीतीश कुमार, लालू प्रसाद, शत्रुघ्न सिन्हा, पप्पू यादव जैसे नेता उस समय मेरे घर पर जरूर आए थे।’

उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे।

उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे।

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बिहारी स्वाभिमान के सवाल पर उसने बंदूक उठा लिया था, वह तेज छात्र था, क्रिमिनल नहीं था

आपके बेटे राहुल राज के बारे में लोग कहते हैं कि कहीं वो दिमाग से कमजोर तो नहीं थे कि कट्टा लेकर मुंबई चले गए बिहारियों के हुई बर्बरता का बदला लेने के लिए ? इस सवाल के जवाब में वे कहते हैं कि ‘ स्वाभिमान के लिए कोई बंदूक लेकर खड़ा हो जाता है तो लोग उसे दिमागी रूप से कमजोर कह ही देते हैं। शहीदों को भी लोग इसी तरह कहते थे। लेकिन जब बेटे का खून गरम हो गया और बिहारी स्वाभिमान का सवाल जाग गया तो उसने बंदूक उठा लिया। वह दिमागी रूप से कमजोर होता तो मैट्रिक, इंटर, ग्रेजुएशन कैसे कर जाता? एक्स- रे टेक्नीशियन कैसे बन जाता ? कभी उसका क्रिमिनल बैगग्राउंड नहीं रहा।’

ये सब बताते हुए कुंदन कुमार सिंह कहते हैं कि महाराष्ट्र पुलिस ने मामले को लीपने पोतने के लिए एक मिनट से कम समय का वीडियो फुटेज दिखाया था। बहुत चीजें छिपायी गईं। सच यह है कि मेरे बेटे को पकड़ कर मारा गया। उसे गिरफ्तार किया जा सकता था, लेकिन हत्या कर दी गई। मारने से पहले मार पीट कर उसके कपड़े फाड़े गए। इसलिए उसकी डेथ बॉडी बगैर कपड़े के पटना भेजी गई। बिहार के लिए मेरा बेटा शहीद हो गया।

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