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नई दिल्ली: आरजे और लेखक युनूस खान ने एक चर्चा के दौरन फिल्मी दुनिया से जुड़े कई अनसुने किस्से सुनाए. उन्होंने एक साहित्य चर्चा के दौरान बताया कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पुराने दौर में किस तरह गाने लिखे जाते थे. हर गीतकार को गाने लिखने के लिए अलग तरह के माहौल की दरकार होती है. उन्होंने गीतकार राजेंद्र कृष्ण (Rajendra Krishan) को याद किया, जिन्होंने मशहूर गाना ‘न झटको जुल्फ से पानी ये मोती टूट जाएंगे’ लिखा था.

युनूस खान ने ‘साहित्य आजतक’ में बताया कि गीतकार राजेंद्र कृष्ण को फिल्म मेकर करीब एक महीने पहले साइन कर लेते थे. दिलचस्प बात यह है कि वे एक दिन छोड़कर महीने के बाकी दिनों मौज-मस्ती करते थे. युनूस कहते हैं, ‘वे तकिए पर बैठकर सिर्फ आधे दिन में गाना लिख देते थे.’

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राजेंद्र कृष्ण काफी तेजी से गाने लिखते थे. उन्हें म्यूजिक डायरेक्टर गाने की धुन सुना देते थे. उन्हें 30 दिन में गाना लिखने के लिए कहा जाता था, जिसमें से 29.5 दिन वह सिर्फ मौज में बिताते थे और बाकी बचे आधे दिन में गाना तैयार कर देते थे. वे आम जिंदगी की घटनाओं को गानों में बयां करते थे.

युनूस ने बताया, ‘वे गाना लिखने के लिए अपने बेडरूम के तकिए पर बैठते थे. वे एक दिन कुछ चिंतित थे, तभी उनकी पत्नी नहाकर कमरे में आईं और अपने गीले बालों को तौलिए से झाड़ने लगीं. इससे पानी की बूंदें उनके कागजों पर भी गिरीं. उन्होंने इस घटना पर मशहूर गाना ‘न झटको जुल्फ से पानी ये मोती टूट जाएंगे’ लिख दिया.’ जिंदगी की छोटी-छोटी घटनाओं पर गाने लिखना ही राजेंद्र कृष्ण की कला थी.

Tags: Bollywood news, Throwback

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