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कीव.रूस-यूक्रेन युद्ध को 115 दिन से भी ज्यादा हो गए हैं लेकिन अब तक युद्ध के खत्म होने के कोई आसार नहीं दिख रहे है. इस बीच रूस का हमला लगातार जारी है और उसने लुहान्स्क पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए हमले को और तेज कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक लुहान्स्क क्षेत्र के दो शहरों पर ही उसका कब्जा रह गया है और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस तरह से रूस ने हमला तेज किया है, उससे इस पूरे क्षेत्र को कब्जा करने में उसे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा.

रिपोर्ट के मुताबिक रूस दोनों शहरों सिविरोदोनेत्सक और लिसिचन्स्क के आसपास के गांवों को कब्जा करने के लिए भीषण लड़ाई लड़ रहा है. रूसी सेना ने सोमवार को भी यूक्रेन पर भारी गोलाबारी जारी रखी.

गांवों पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच लड़ाई
यूक्रेन का पूर्वी लुहान्स्क क्षेत्र हाल के दिनों में लड़ाई का एक प्रमुख केंद्र बन गया है और रूस इस पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए भारी गोलीबारी कर रहा है. कई गांवों पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी है. स्थानीय गवर्नर सेरही हैदई के अनुसार लुहान्स्क क्षेत्र के दो शहरों सिविरोदोनेत्सक और लिसिचन्स्क पर अभी तक रूसी सैनिकों का कब्जा नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि इन दोनों शहरों के आसपास के गांवों पर नियंत्रण के लिए लड़ाई चल रही है और सिविरोदोनेत्सक के औद्योगिक बाहरी इलाकों में रूसी गोलाबारी और हवाई हमले तेज हो गए हैं.

थोड़ी देर के लिए भी गोलीबारी नहीं रूक रही
हैदई ने एपी से सोमवार को कहा कि सिविरोदोनेत्सक में स्थिति ‘बहुत खराब है और यूक्रेनी सैनिकों का सिर्फ एक क्षेत्र पर नियंत्रण रह गया है और उस क्षेत्र में एजोत रासायनिक संयंत्र में करीब 500 नागरिकों के साथ कई यूक्रेनी लड़ाकों ने शरण ले रखी है. उन्होंने कहा कि वहां गोलाबारी में सब कुछ बर्बाद हो रहा है और गोलाबारी एक घंटे के लिए भी नहीं रुक रही है. रूस ने इस युद्ध को वर्षों तक चलने की चेतावनी दी है. इसके बाद दुनिया भर में भोजन और ईंधन की आपूर्ति को लेकर लोगों की आशंकाएं बढ़ने लगी हैं.

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इधर एक रूसी गवर्नर ने कहा कि यूक्रेन की सीमा के पास एक रूसी गांव पर यूक्रेन की गोलाबारी में एक व्यक्ति घायल हो गया. ब्रांस्क क्षेत्र के गवर्नर अलेक्जेंडर बोगोमाज ने कहा कि इस हमले में एक बिजली घर को भी नुकसान हुआ जिससे गांव के कुछ हिस्सों में बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई.

रूस की सेना थक रहे हैः ब्रिटेन
उधर, यूक्रेन पर रूसी हमले के साथ-साथ कोविड-19 महामारी के कारण पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर दुनिया भर में परेशानी बढ़ रही है. ऊर्जा की कीमतें मुद्रास्फीति का एक प्रमुख कारण हैं जो दुनिया भर में तेजी से ऊपर जा रही है और इससे जीवन यापन का खर्च बढ़ता जा रहा है. यूरोपीय संघ के वरिष्ठ राजनयिक यूक्रेन और खाद्य सुरक्षा पर वार्ता के लिए सोमवार को लक्जमबर्ग में एकत्र हुए. यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने रूस से यूक्रेनी बंदरगाहों से नाकेबंदी हटाने का आह्वान किया ताकि निर्यात के लिए प्रतीक्षारत लाखों टन अनाज को गंतव्य तक पहुंचाने में मदद मिल सके.

इस बीच ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बेहतर सैन्य स्थिति होने के बाद भी युद्ध में रूस को अपेक्षित कामयाबी नहीं मिलती दिख रही है. मंत्रालय ने सोमवार को एक खुफिया रिपोर्ट में कहा कि रूसी थल सैनिक ‘थक गए’ हैं. रिपोर्ट के अनुसार जमीन पर रूसी सैनिकों के तेजी से आगे नहीं बढ़ पाने का कारण खराब हवाई समर्थन है.

रूसी पत्रकार ने नीलाम किया अपना नोबल पुरस्कार
इस बीच, रूस के पत्रकार दिमित्रि मुरातोव ने शांति के लिए मिले अपने नोबेल पुरस्कार की सोमवार रात न्यूयॉर्क में नीलामी कर दी. वह नीलामी से मिलने वाली धनराशि यूक्रेन में युद्ध से विस्थापित हुए बच्चों की मदद के लिए सीधे यूनीसेफ को देंगे. अक्टूबर 2021 में स्वर्ण पदक से सम्मानित मुरातोव ने स्वतंत्र रूसी अखबार ‘नोवाया गजट’ की स्थापना की और वह मार्च में अखबार के बंद होने के समय इसके मुख्य संपादक थे. यूक्रेन पर रूस के हमले के मद्देनजर सार्वजनिक असंतोष को दबाने और पत्रकारों पर रूसी कार्रवाई के चलते यह अखबार बंद कर दिया गया था. मुरातोव ने पुरस्कार की नीलामी से मिली 5,00,000 डॉलर की नकद राशि धर्मार्थ दान करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि इस दान का उद्देश्य ‘‘शरणार्थी बच्चों को भविष्य के लिए एक मौका देना है.

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Tags: Russia, Ukraine

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