e0a4b0e0a582e0a4b8 e0a4ace0a4bfe0a4b9e0a4bee0a4b0 e0a495e0a587 e0a485e0a4ade0a4af e0a4b8e0a4bfe0a482e0a4b9 e0a4a8e0a587 e0a4b0e0a4bf
e0a4b0e0a582e0a4b8 e0a4ace0a4bfe0a4b9e0a4bee0a4b0 e0a495e0a587 e0a485e0a4ade0a4af e0a4b8e0a4bfe0a482e0a4b9 e0a4a8e0a587 e0a4b0e0a4bf 1

कुर्स्क (रूस). पश्चिमी रूस (Russia) के कुर्स्क शहर में बिहार (Bihar) के अभय सिंह ने डेप्यूटेंट का चुनाव भारी मतों से जीत लिया है. अभय सिंह मूलत: बिहार के पटना शहर (Patna City) के रहने वाले हैं. रूस में डेप्यूटेंट (Deputent) का चुनाव दूसरी बार जीता है. डेप्यूटेंट का पद भारत में राज्‍य विधायक (MLA) जैसा होता है. रूस में असेंबली चुनाव (Assembly Election) हाल ही में संपन्‍न हुए हैं. इसमें राष्‍ट्रपति पुतिन के नेतृत्‍व वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने जीत हासिल की है और अभय सिंह भी इसी पार्टी से उम्‍मीदवार थे.

रूस में डेप्यूटेंट जैसे राजनीतिक पद पर रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज कराने वाले अभय सिंह इकलौते भारतीय हैं. उन्‍होंने पटना के लोयोला हाई स्‍कूल से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद 1990 के दशक में वे रूस चले गए और वहां मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया. डॉक्‍टर बनने के बाद वे भारत लौटे और कुछ समय प्रैक्टिस की. इसके बाद एक बार फिर वे रूस गए और वहीं बस गए. रूस में उन्‍होंने पुतिन की पार्टी ज्‍वाइन की और अपनी लोकप्रियता के कारण वे चुनाव जीते. इस बार का चुनाव तो वे करीब 70 प्रतिशत वोट पाकर जीते हैं जो एक रिकॉर्ड बन गया है.

रूस में मिल रहा सम्‍मान, पर जीत इतनी आसान नहीं थी
अभय सिंह के बारे में बताया जाता है कि आज वे रूस के बड़े बिजनेसमैन हैं और उनके पास कई संपत्तियां हैं. वे रियल एस्‍टेट से कारोबारी भी हैं. हालांकि रूस में उन्‍हें कड़ा संघर्ष भी करना पड़ा. रंगभेद और अन्‍य कारणों से उन्‍हें भी कई चुनौतियां आईं. अभय सिंह के बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था. इसके बाद कई जिम्‍मेदारियां उन्‍हें उठानी पड़ीं.

READ More...  UN में तैनात रूसी राजनयिक ने इस्तीफा दिया, यूक्रेन युद्ध को बताया 'शर्मनाक'

ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |

FIRST PUBLISHED : September 13, 2022, 21:13 IST

Article Credite: Original Source(, All rights reserve)