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नई दिल्ली: लाल किला की तरह ही देश की 1000 इमारतों को निजी हाथों में देने की तैयारी हो रही है. सबसे पहले एएसआई की 500 इमरातों को 15 अगस्त तक निजी हाथों में देने की योजना है. सूत्रों की मानें तो प्राइवेट घराने इन धरोहरों के रखरखाव, साफ सफाई, प्रोजेक्शन मैपिंग जैसी जिम्मेदारी का काम देखेंगे. इन धरोहरों को लेने वाले निजी घराने अपने सीएसआर फंड के तहत वन टाइम इन्वेस्टमेंट करेंगे.

केंद्र सरकार ने कुछ साल पहले मॉन्यूमेंट मित्र के तहत एएसआई की धरोहरों को निजी हाथों में देने का फैसला किया था, जिसके तहत दिल्ली में लाल किला डालमिया ग्रुप को दिया गया था. इसके बेहतर अनुभव के बाद केंद्र सरकार ने देश की 1000 एएसआई संरक्षित इमारतों को निजी हाथों में सौपने के लिए चुना है. मॉन्यूमेंट मित्र की जिम्मेदारी अब तक पर्यटन मंत्रालय के पास थी, लेकिन हाल में इसे संस्कृति मंत्रालय को दे दिया गया.

केंद्र सरकार की मॉन्यूमेंट मित्र की योजना के पीछे मकसद है कि एएसआई की धरोहरों का रख-रखाव ठीक तरीके से हो सके. उनकी ब्रांडिंग सही तरीके से हो और देसी-विदेशी पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिले. इसके साथ-साथ ऐसे मॉन्यूमेंट जो जीर्ण अवस्था मे हैं या फिर उनके कुछ अवशेष बचे हैं, उन जगहों पर उनके म्यूजिम बनाने पर भी संस्कृति मंत्रालय की योजना है, जिससे कि पर्यटक बेहतर तरीके से उन जगहों के इतिहास को जान सकें.

इतना ही नहीं, G20 के तहत भारत के 5 हजार साल पुरानी संस्कृति और विरासत को दुनियां को दिखाने की संस्कृति मंत्रालय की योजना है. यही वजह है कि G20 के अलग-अलग कार्य्रकम विभिन्न धरोहर स्थलों पर की जाएगी. बता दें कि इस साल भारत के पास जी20 की मेजबानी है और ऐसे में भारत अपने मेहमानों को भारत दर्शन कराने पर पूरा फोकस कर रहा है.

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Tags: Cultural heritage, Heritage, Historical monument

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