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पटना6 घंटे पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव। – फाइल फोटो

मोकामा और गोपालगंज में विधान सभा उपचुनाव के बाद कुढ़नी उपचुनाव पर सभी की नजरें हैं। साल 2020 के बिहार विधान सभा चुनाव के बाद तारापुर, कुशेश्वर स्थान, बोचाहां, मोकामा और गोपालगंज में अब तक उपचुनाव हुए हैं। इस बीच नीतीश सरकार का स्वरुप भी बदला।

तारापुर, कुशेश्वर स्थान और बोचहां उपचुनाव के समय नीतीश कुमार और भाजपा का साथ था। वहीं मोकामा और गोपालगंज उपचुनाव में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव साथ रहे, भाजपा अलग-थलग रही। पांचों उपचुनावों में भाजपा को सिर्फ एक सीटिंग सीट का नुकसान झेलना पड़ा है। इसके बावजूद भाजपा का दावा है कि बिना नीतीश कुमार के हम तेजी से बढ़ रहे हैं।

कुढ़नी पर सभी की नजर

अब कुढ़नी विधान सभा उपचुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया गुरुवार से शुरू है। कुढ़नी से राजद के विधायक अनिल सहनी की विधायकी चली गई। उनपर तब जाली ई-टिकट और बोर्डिंग पास के जरिए 23 लाख 71 हजार रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा था। कुढ़नी में नामांकन की प्रक्रिया 17 नवंबर तक चलेगी। 18 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 21 नवंबर तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं। 5 दिसंबर को वोटिंग होगी और 8 दिसंबर को वोटों की गिनती की जाएगी।

विधान सभा चुनाव 2020 के बाद हुए उपचुनावों में किसकी कितने वोट से जीत हुई, यह देखिए –

  • तारापुर और कुशेश्वर स्थान उपुचनाव

इन दोनों सीटों पर हुए उपचुनाव में जदयू की जीत हुई। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से लोगों को काफी उम्मीदें थीं। दिनों बाद लालू प्रसाद दोनों जगहों पर चुनाव प्रचार में गए, मंच से भाषण भी किया लेकिन दोनों जगह लालू का जादू नहीं चला। उल्टे सवर्णों का वोट बैंक रातों-रात बिगड़ गया।

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तारापुर में जदयू के उम्मीदवार राजीव कुमार सिंह ने आरजेडी के उम्मीदवार अरुण कुमार साह को 3821 मतों से हराया। यहां लालू प्रसाद का वैश्य कार्ड फेल हो गया। कुशेश्वर स्थान में हजारी परिवार की ताकत बरकरार रही। कुशेश्वर स्थान में JDU के अमन हजारी ने 12 हजार 698 वोटों से जीत दर्ज की और गणेश भारती को हराया। कांग्रेस के अतिरेक तीसरे स्थान पर रहे।

लालू यादव का मुसहर कार्ड यहां काम नहीं आया। तारापुर और कुशेश्वर स्थान में कांग्रेस ने अकेले चलने का मन बनाया और अपना अलग उम्मीदवार दिया था।

  • बोचहां उपचुनाव

बोचहां में आरजेडी के अमर पासवान ने जीत हासिल की थी। भाजपा की बेबी कुमारी को 36,653 मतों से उन्होंने शिकस्त दी थी। यहां वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी ने रमई राम की बेटी गीता कुमारी को टिकट दिया था। वह तीसरे स्थान पर रही थीं। कांग्रेस ने बोचहां में भी अकेले चलना तय किया और अपना उम्मीदवार दिया।

  • मोकामा और गोपालगंज उपचुनाव

इन दोनों उपचुनावों की खासियत यह थी कि ये पहला विधान सभा उपचुनाव है, जो 2020 के विधान सभा चुनाव के बाद ऐसी परिस्थिति में हुआ, जब नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव फिर से साथ हुए। दोनों जगह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पेट में दर्द की वजह से प्रचार में नहीं गए। पटना से ही संदेश जारी किया।

विधान सभा चुनाव के बाद मोकामा-गोपालगंज में यह पहला विधान सभा उपचुनाव था, जिसमें कांग्रेस भी राजद के साथ रही। मोकामा में बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने भाजपा की सोनम देवी को 16,707 वोटों से हराया और गोपालगंज में भाजपा की कुसुम देवी ने राजद के मोहन गुप्ता को 2183 वोटों से हराया।

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मोकामा में भूमिहार और यादव वोटरों ने अनंत सिंह की पत्नी राजद उम्मीदवार नीलम देवी को भरपूर वोट किया तो गोपालगंज में साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव ने यादवों का वोट काट लिया। बाकी कमी AIMIM ने पूरी कर दी। अपने गढ़ में तेजस्वी राजद को हार से नहीं बचा पाए। लालू परिवार के अंतर्कलह की वजह से यहां राजद को बड़ा नुकसान हुआ। गोपालगंज में राजद का वैश्य कार्ड तारापुर उपचुनाव की तरह ही फेल हो गया। कांग्रेस की स्थिति तो ऐसी रही कि गोपालगंज से कांग्रेस लड़ती थी, लेकिन कांग्रेस ने यह सीट नहीं मांगी।

  • तारापुर – जदयू के राजीव कुमार सिंह जीते
  • कुशेश्वर स्थान – जदयू के अमन हजारी जीते
  • बोचहां – राजद के अमन पासवान जीते
  • मोकामा – राजद की नीलम देवी जीतीं
  • गोपालगंज – भाजपा की कुसुम देवी जीतीं

कहां-किसकी सीटिंग सीट थी
पांच उपचुनावों में राजद की एक सीटिंग सीट थी मोकामा में। जदयू की दो सीटिंग सीटें थीं, तारापुर और कुशेश्वर स्थान में। भाजपा की दो सीटिंग सीट थी बोचहां और गोपालगंज में। यानी पांच उपचुनावों में भाजपा को एक सीट का नुकसान झेलना पड़ा है।

इस हार पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल कहते हैं कि नीतीश कुमार से अलग होने के बाद बिहार की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो गई हैं। लेकिन भाजपा ने अपने वोट बैंक को ज्यादा मजबूत किया है। बगैर नीतीश कुमार के हमारी ताकत बढ़ी है। हम नीतीश कुमार के साथ जब थे, तब जितना वोट ला रहे थे, अब उससे ज्यादा वोट ला रहे हैं। यह हमारी उपलब्धि है।

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पटेल के अनुसार नीतीश कुमार की प्रासंगिकता नहीं रह गई है। बिना नीतीश कुमार के हमारे वोटों में क्षरण नहीं है। चुनाव की हार-जीत कई कारणों से होती है। आनेवाले समय में भाजपा की ताकत और बढ़ेगी। पार्टी अपने बलबूते बढ़ने और लड़ने की ताकत रखती है।

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