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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में कहा कि हमारा देश युवाओं का देश है, जब युवा स्वस्थ समाज निर्माण के बारे में सोचेंगे तभी देश समृद्ध बनेगा. इसके लिए न सिर्फ किताबी ज्ञान बल्कि मानवता के मूल्यों को अपने जीवन में उतारना विद्यार्थियों की प्राथमिकता में होनी चाहिए. आज समूचा विश्व युवा भारत की ओर देख रहा है. युवा शक्तियों की जिम्मेदारी है कि वे तकनीक के साथ करुणा का भी वैश्वीकरण करें.

गोदरेज ग्रुप के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने कहा कि आप एक ऐसे समय में ग्रेजुएट हुए हैं जब भारत आपको राष्ट्र निर्माण में महान अवसर प्रदान करता है. अब जब कि डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया हमारे सभी सपनों का भारत बनाने के लिए प्रेरणा दे रहे हैं, इसलिए आपके पास एक उज्ज्वल भविष्य है.

सत्यार्थी ने कहा कि आज भी कई घरों और स्कूलों में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं. उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाना होगा और समाधान ढूंढना होगा. वर्तमान में करीब 15 करोड़ बच्चे कहीं न कहीं बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, बाल शोषण जैसी गुलामी में जकड़े हुए हैं. आजादी के साथ ही इनकी शिक्षा को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है, जिसके लिए पूरे विश्व में राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए. सत्यार्थी ने युवाओं से आह्वान किया कि अपनी तकनीकी शिक्षा के जरिये सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की दिशा में काम करें.

समारोह में एमिटी विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. अशोक के चौहान, एमिटी विश्वविद्यालय (हरियाणा) की कुलपति डॉ. असीम चौहान, उप-कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) पीबी शर्मा समेत कई शिक्षाविदों की मौजूदगी में सत्र 2017 के विभिन्न संकायों के 1318 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई. समारोह में सत्यार्थी समेत तीन अन्य हस्तियों को भी विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया. इस दौरान ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर, सत्याशी फाउंडेशन और गुड वेब इंटरनेशनल के संस्थापक व वर्ष 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के नाम पर एमिटी विश्वविद्यालय ने’कैलाश सत्यार्थी सेंटर फॉर चाइल्ड राइट’ की भी नींव रखी.

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दीक्षांत समारोह में कैलाश सत्यार्थी के साथ-साथ गोदरेज समूह के अध्यक्ष पद्मभूषण आदि गोदरेज, बायोकॉन लिमिटेड की अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक पद्मभूषण किरण मजूमदार शॉ, मैकिनसे के ग्लोबल मैनेजिंग पार्टनर डोमिनिक बार्टन को डॉक्टरेट को मानद उपाधी से सम्मानित किया गया.

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