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महाराष्ट्र की राजनीति में पुणे से निर्दलीय विधायक पारी शुरू करने वाले हर्षवर्धन पाटिल अब बीजेपी का चेहरा है. 10 साल कांग्रेस में गुज़ारने के बाद उन्होंने पीएम मोदी की नीतियों और विचारधारा से प्रभावित होकर कांग्रेस छोड़ दी और अगले ही दिन बीजेपी में शामिल हो गए.

निर्दलीय चुनाव जीतकर बने मंत्री

हर्षवर्धन पाटिल उन नेताओं में शुमार करते हैं जो कि लगातार 4 बार सरकार में मंत्री रह चुके हैं. साल 1995 से 1999 तक शिवसेना-बीजेपी सरकार में मंत्री रहे तो बाद में 1999 से  2014 तक कांग्रेस-एनसीपी सरकार में मंत्री रहे हैं.

हर्षवर्धन पाटिल ने अपनी सियासी पारी का आगाज़ साल 1995 में हुआ. वो पुणे की इंदापुर सीट से  निर्दलीय विधायक चुने गए. इंदापुर सीट से 4 बार विधायक का चुनाव जीता.  1995, 1999 और 2004 तक निर्दलीय विधायक रहे जबकि  2009 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद पहली बार कांग्रेस के टिकट पर  विधायक बने. जिसके बाद उन्हें महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार में सहकारिता मंत्री बनाया गया.

साल 2014 में मिली पहली हार

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में हर्षवर्धन पाटिल को हार का सामना करना पड़ा. दरअसल ये चुनाव कांग्रेस और एनसीपी ने अलग-अलग लड़ा. हर्षवर्धन पाटिल ये चुनाव एनसीपी के दत्तात्रेय भरणे से 14 हज़ार 173 वोट से हार  गए थे. बारामती लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली इंदापुर सीट पर उन्हें एनसीपी के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा.

राजनीतिक परिवार से ताल्लुक

हर्षवर्धन शाह पाटिल का जन्म 21 अगस्त 1963 को इंदापुर के बवाड़ा में हुआ. वो पूर्व सांसद शंकर राव बाजीराव पाटील के भतीजे हैं. हर्षवर्धन पाटील की शादी भाग्यश्री से हुई. उनकी एक बेटी अंकिता और एक बेटा राजवर्धन है. उनकी बेटी अंकिता पुणे जिला परिषद की सदस्य हैं.

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साल 2014 की हार के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस में हर्षवर्धन पाटील पांच साल तक खामोशी से समय गुज़ारते रहे. अशोक चव्हाण के इस्तीफे के बाद उनके अध्यक्ष बनने की भी चर्चा थी लेकिन बाला साहब थोराट को महाराष्ट्र कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया. जिसके बाद फिर 9 सितंबर को हर्षवर्धन पाटिल ने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया और 11 सितंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हो गए. खुद सीएम फडणवीस ने हर्षवर्धन पाटिल के लिए कहा कि वो पांच साल से उनके बीजेपी में आने का इंतज़ार कर रहे थे.

हर्षवर्धन पाटिल का बीजेपी में शामिल होना कांग्रेस के लिए दूसरा बड़ा झटका था. हर्षवर्धन से पहले कांग्रेस के दूसरे सीनियर लीडर राधाकृष्ण विखे पाटिल ने लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस छोड़ दी थी और उन्हें फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था.

सम्मान का सवाल बन गई है इंदापुर सीट

एक बार फिर इंदापुर सीट से हर्षवर्धन पाटिल चुनावी मैदान में हैं. इंदापुर विधानसभा सीट पुणे जिले में आती है. साल 2014 का चुनाव हारने के बाद वो जीतकर वापसी करना चाहेंगे. अबतक निर्दलीय और कांग्रेस के टिकट पर  वो 1995 से 2009 तक इंदापुर सीट पर लगातार जीतते रहे. ऐसे में इस बार विधानसभा चुनाव में सबकी निगाहें हर्षवर्धन पाटिल और इंदापुर सीट पर हैं क्यों पहली बार वो बीजेपी के उम्मीदवार होंगे तो साथ ही सवाल इंदापुर सीट से जुड़े सम्मान का भी है जो साल 2014 में हार से आहत हुआ था.

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Tags: BJP, Maharashtra asembly election 2019, Maharashtra Assembly Election 2019

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