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हाइलाइट्स

झारखंड की महिला फुटबॉलर्स ने हाल के दिनों में अपना परचम लहराया है
100 फुटबॉलरों की ट्रेनिंग में हर महीने प्रति खिलाड़ी 1 लाख रुपये खर्च किये जा रहे हैं
खिलाड़ियों के इस समूह को ग्रुप 100 का नाम दिया गया है

रांची. खेल प्रदेश कहे जाने वाले झारखंड में हर खेल से जुड़ी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं. इस कड़ी में फुटबॉल का नाम भी तेजी से उभर कर सामने आ रहा है. झारखंड के कई खिलाड़ियों ने हाल के दिनों में फुटबॉल में देश और दुनिया में अपनी धमाकेदार दस्तक दी है. ऐसे में मिशन ओलंपिक को लेकर झारखंड में तैयारी जोर-शोर से शुरू हो चुकी है..

खेल की दुनिया में जोरदार दस्तक दे रही झारखंड की प्रतिभाओं ने अब फुटबॉल की दुनिया में जोरदार किक मारी है. पिछले महीने फीफा महिला वर्ल्ड कप अंडर 17 में जिस तरह झारखंड की चार खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय टीम में शामिल होकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. उससे उत्साहित होकर झारखंड में फुटबॉल का सफर अब आगे बढ़ चला है. रांची के खेलगांव में मिशन ओलंपिक को लेकर टैलेंटेड फुटबॉल खिलाड़ियों का ग्रुप 100 बनाया गया है. इसमें 50 लड़कियां और 50 लड़के शामिल हैं.

कई नेशनल खिलाड़ियों से भरे इस ग्रुप 100 को मिशन ओलंपिक के लिए फोकस कर प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं. इन खिलाड़ियों में रांची, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, बोकारो समेत राज्य भर के 9 से 16 साल तक की उम्र के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेंड किया जा रहा है. खिलाड़ियों के कोच सोमनाथ सिंह ने बताया कि एक तरफ जहां खिलाड़ियों को मैदान पर ट्रेनिंग दी जा रही है तो वहीं दूसरी ओर उन्हें मैसी, रोनाल्डो और नेमार जैसे दिग्गज फुटबॉलर के खेलने की शैली से परिचित कराया जा रहा है. इस ग्रुप 100 को 20 नवंबर से कतर में शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप के मैच को दिखाया जाएगा.

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वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए ब्राजील, फ्रांस और अर्जेंटीना जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की टीमों और बड़े खिलाड़ियों के खेलने की शैली से रूबरू कराया जाएगा. ग्रुप 100 में शामिल हर एक खिलाड़ी पर प्रति महीने करीब 1 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं. इसमें खिलाड़ियों की पढ़ाई, उनके रहने, पोषाहार, खेल से संबंधित किट और उनके प्रशिक्षण के लिए बाहर आने जाने का खर्च शामिल हैं. प्रयास यही है कि इन प्रतिभाओं को निखार कर दुनिया के सामने झारखंड का नाम ऊंचा किया जा सके.

राज्य सरकार और सीसीएल की ज्वाइंट वेंचर JSSPS के खेल प्रबंधक अजय मुकुल टोप्पो ने बताया कि मिशन ओलंपिक को लेकर 9 से 15 साल तक की उम्र की लड़कियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जबकि लड़कों में यह उम्र सीमा 9 से 16 साल तक रखी गयी है. ग्रुप 100 में शामिल इन बच्चों को दिनभर में दो बार खेलगांव में ट्रेनिंग दी जा रही है. उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की पढ़ाई लिखाई से लेकर खेल तक की उनकी तमाम जरूरतों का ख्याल रखा गया है.

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