पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक में संकट से निपटने के लिए विशेष समूह बनाने का निर्णय लिया गया। बैठक में तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई को सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया गया।
करीब साढ़े तीन घंटे चली इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक सेक्टर की स्थिति की समीक्षा की। सरकार का मुख्य फोकस सप्लाई बाधित न होने पर था, जिसके लिए लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिन बड़े फैसलों पर चर्चा की गई, उनमें आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाना, राज्य सरकारों के साथ समन्वय बढ़ाना, और ऊर्जा सप्लाई को बनाए रखने का निर्णय शामिल है। इसके अलावा, खाद्य, ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी विद्युत संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार है, जिससे बिजली संकट नहीं होगा। सरकार ने आयात स्रोतों में विविधता लाने के लिए भी उपायों पर चर्चा की एवं नए निर्यात गंतव्य विकसित करने की योजना बनाई गई।
बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी चिंता जताई गई, जो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का महत्वपूर्ण मार्ग है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह हालात पर नजर रख रही है और हर संभावित स्थिति के लिए तैयार है।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित —
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