वैश्विक अर्थव्यवस्था में उच्च अमेरिकी टैरिफ से हड़कंप मचा है। भू-राजनीति तेजी से बदल रही है। इस चुनौतीपूर्ण माहौल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को सुधार आधारित बजट पेश करेंगी। यह बजट देश की विकास दर को गति देने और भारत को सुरक्षित निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखेगा। बजट-2026 का मुख्य संदेश आक्रामक सुधार और तेज वृद्धि है।
वित्त मंत्री रिकॉर्ड नौवीं बार बजट पेश करने जा रही हैं और निवेश बढ़ाने के लिए इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड की घोषणा कर सकती हैं। यह फंड हरित ऊर्जा, एमएसएमई और युवा कौशल विकास में सहायता करेगा। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में पिछले एक साल में 73 फीसदी की वृद्धि हुई है, जिसमें 47 अरब डॉलर का निवेश भारत आया है।
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत विनिर्माण और निर्यात में 20 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 37 फीसदी बढ़कर 4.15 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। स्मार्टफोन निर्यात भी 30 अरब डॉलर के पार है। सरकार का लक्ष्य अमेरिका पर निर्भरता घटाना और नए बाजारों की खोज करना है।
सरकार 150 लाख करोड़ रुपये की इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन पर खर्च जारी रखेगी और कारोबार सुगमता को बढ़ाने के लिए 1,000 करोड़ का डिजिटलीकरण कोष बनाने का विचार कर रही है। इसके साथ ही, सुधारों के अंतर्गत नए श्रम कानून और एफडीआई सीमाओं में ढील देने की योजना है। भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए यह बजट महत्वपूर्ण रहेगा।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित —
www.amarujala.com








