मध्य प्रदेश में मौसम में लगातार परिवर्तन देखने को मिल रहा है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सिस्टम के प्रभाव से पिछले दो दिनों में प्रदेश के लगभग 60 फीसदी हिस्से में ओले, बारिश और तेज हवाएं चलीं। अब बारिश थमने के बाद गुरुवार सुबह आधे से अधिक प्रदेश में घना कोहरा छा गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, यह राहत ज्यादा दिन की नहीं है, क्योंकि 31 जनवरी से एक नया सिस्टम सक्रिय होगा, जो फिर से मावठा गिराने की संभावना दिखा रहा है।
गुरुवार सुबह ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के कई जिलों में घना कोहरा देखा गया। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, विदिशा, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली और शहडोल के जिलों में दृश्यता कम रही। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सीहोर, रायसेन और राजगढ़ में हल्का कोहरा छाया रहा।
मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। हालांकि, ठंडी हवाओं की वजह से दिन में ठिठुरन बनी रहेगी और अधिकतम तापमान में गिरावट आ सकती है। राहत की बात यह है कि रात के तापमान में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं होगी।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 30 जनवरी को उत्तर-पश्चिम भारत में नया सिस्टम सक्रिय होगा, जिसका असर एक-दो दिन बाद मध्य प्रदेश में दिखाई देगा। 31 जनवरी और 1 फरवरी को कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है।
पिछले दो दिनों में प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में ओले और बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं, चना और सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। किसानों का कहना है कि इससे दाने की गुणवत्ता में गिरावट आएगी और मंडी में कम दाम मिलेंगे।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित —
www.amarujala.com




