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जनारदन के देख के लछुमन कहले, 2017 में बिहार के राज्यपाल राष्ट्रपति बनल रहन, अब 2022 में झारखंड के पूर्व राज्यपाल राष्ट्रपति बनिहें. बिहार-झारखंड के भइयारी राष्ट्रपति चुनाव में भी पूरा हो जाई. जनारदन कोयला मजदूर यूनियन के नेता रहन. धनबाद के पाथरडीह में आदिवासी समाज के बीच बहुत काम कइले रहन. ऊ झारखंड के पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के बारे में बहुत कुछ पढ़ले-सुनले रहन. जनार्दन कहले, अब एह बात के पूरा संभावना बा कि द्रौपदी मुर्मू 21 जुलाई के राष्ट्रपति बन जइहें. भारत के इतिहास में पहिला बेर कौनो आदिवासी नेता एह प्रतिष्ठित पद पर पहुंचिहें. एक गरीब महिला के संघर्ष, साहस अउर सफलता के कहानी प्रेरित करे वला बा. मई 2015 से जुलाई 2021 तक ऊ झारखंड के राज्यपाल रही.

बिन मांगे मोती मिले…

जनारदन कहले, द्रौपदी मुर्मू के राजनीत सहज, सरल अउर सादगीपूर्ण रहल बा. राज्यपाल पद से हटला के बादो उनकर जीवनशैली बहुत सहज रहे. ऊ अपना गांव महुलडीहा (मयूरभंज,ओडिशा) में साधारन जीवन गुजारत रही. राज्यपाल बने के उपलब्धि से ही बहुत खुश रही. एह से बेसी के कवनो तमन्ना उनका मन में ना रहे. कहल भी गइल बा कि बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख. राष्ट्रपति बने खातिर मने-मन बहुत नेता खेयाली पोलवा पकावत रहन. लेकिन सौभाग्य के फल गिरल ओकरा झोली में जे एकरा बारे में कुछ सोचते ना रहे. मंगर के दिन द्रौपदी मुर्मू आपन गांव महुलडीहा में रही. उनका साथे बेटी इतिश्री भी रही. इतिश्री बतवली कि कइसे माई के ई शुभ संबाद मिल रहे. सांझ ढले पs रहे कि एगो फोन आइल. फोन सुनला के बाद माई चुप्पी साध लेलस. शायद PM के फोन आइल रहे. ओकरा बाद खुशी के मारे उनकर आंख में लोर भर गइल. आंख डबडबाइल रहे. मुंह से कुछ बोली ना फूटत रहे. कइसहूं-कइसहूं उनका मुंह से बस एतने निकल, धन्याबाद. इतिश्री के बात बहुत मारमिक बा. सचमुच ई खुशी के बात बा. अइसन खुशी जवन कल्पना से परे रहे. बिन मंगले मोती मिल गइल. द्रौपदी मुर्मू गरीबी अउर दुख से लड़ाई लड़ के आज ई मोकाम पर पहुंचल बाड़ी.

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शायद माई के PM के फोन आइल रहे

लछुमन पूछले, ओडिशा में मंतरी, झारखंड में राज्यपाल रहला के बादो का ऊ गांव-देहात में रहे ली ? जनार्दन कहले, द्रौपदी मुर्मू निजी जिंदगी में बहुत तकलीफ उठवले बाड़ी. उनकर दू जवान लइका के असमय मौत हो गइल. पति श्याम चरण मुर्मू के भी हार्ट अटैक से मौत हो गइल. संतान के रूप में उनकर लइकी इतिश्री ही अब सहारा बाड़ी. इतिश्री के शादी हो चुकल बा. 2021 में उनका लइकी भइल रहे. इतिश्री बैंक में नौकरी करे ली अउर भुनेसर में रहे ली. लेकिन अपना माई के देखभाल खातिर महुलडीहा आवत जात रहे ली. महुलडीहा गांव ओडिशा के मयूरभंज जिला के रायरंगपुर तहसील में आवे ला. एही गांव के श्याम चरण मुर्मू के उनक शादी भइल रहे. द्रौपदी मुर्मू के नइहर रायरंगपुर से 25 किलोमीटर दूर बैदापोसी गांव में बा. चूंकि ऊ दू बेर बिधायक, एक बेर मंतरी अउर राज्यपाल रह चुल बाड़ी एह से अब गांव में उनकर नाया घर बन चुकल बा. इहे दूमंजिला घर में ऊ रहे ली. उनकर नइहर में भी एक मंजिला घर बा. उहां उनकर भाई लोग के परिवार रहे ला. द्रौपदी मुर्मू के बजह से महुलडीहा अउर बैदापोसी अब बिकसित गांव बन गइल बा. उनकर नइहर अब अब डिजिटल गांव बन गइल बा. हर घर में बैंक खाता बा. सरकारी जोजना से लोग के घर भी बन गइल बा. गांव मे सपलाई बाटर के भी सुबिधा बा.

अइसे बनल रही राज्यपाल

धनबाद में रहे के चलते जनारदन, द्रौपदी मुर्मू के बारे में बहुत कुछ जानत रहन. जब ऊ राज्यपाल बनल रही तब झारखंड के कई अखबार में उनकर कहानी छपल रहे. जनारदन कहले, द्रौपदी मुर्मू के जीवन में कवनो देखावा नइखे. हरमेसा सादा जीवन ही गुजरली. बिधायक ना रहला के बाद ऊ कुछ दिन गांव में रहली. फेन भुनेसर चल गइल रही. बिधायक अउर मंतरी बने के पहिले ऊ भुनेसर सचिवालय में काम करत रही. जब बिधायकी खत्म हो गइल तब ऊ फेन सचिवालय में कनटैक्ट पs काम करे लागल रही. पूर्व मंतरी होखे के कवनो गुमान ना रहे. सचिवालय के अफसर लोग के भी अचरज होत रहे कि एक पूर्व मंतरी कइसे क्लर्क के काम कर रहल बाड़ी. मई 2015 में एक दिन ऊ सचिवालय में आपन काम करत रही. तबहीं उनका भिरी एगो फोन आइल. उनका के सूचना दिहल गइल, कल आपको प्रधानमंत्री महोदय ने मिलने के लिए बुलाया है. ई फोन के बाद ऊ बहुत देर तक कुछ सोंचत रहली. फेन आफिस से निकल के दिल्ली जाए के तइयारी करे लगली. परधानमंत्री से मिलला के बाद मालूम भइल कि उनका के झारखंड के राज्यपाल बनावल गइल बा.

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द्रौपदी मुर्मू अउर नवीन पटनायक में अच्छा तालमेल

द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति उम्मीदवार बने से ओडिशा में बहुत खुशी बा. एनडीए के उम्मीदवार होखे के बाद भी मुखमंतरी नवीन पटनायक उनकर समरथन कइले बाड़े. दूनो नेता के बीच बहुत अच्छा रिश्ता रहल बा. 2000 से 2004 तक द्रौपदी मुर्मू, पटनायक सरकार में मंतरी रही. ऐह से इनका लोग में बहुत निमन तालमेल रहल बा. जब झारखंड के राज्यपाल बनल रही तब एक बेर ऊ प्रोटोकॉल के अनदेखी कर मुखमंतरी से मिले खातिर उनका सरकारी आवास पर पहुंच गइल रही. एकरा पs कई लोग सवाल भी उठइले रहे. लेकिन ऊ एह सवाल पs धेयान ना देली. नवीन पटनायक के समर्थन से उनकर जीत के संभावना बढ़ गइल बा. नवीन पटनायक के पाटी, बिजू जनता दल के कुल 21 सांसद बाड़े. 12 लोकसभा के अउर 9 राज्यसभा के. बिधानसभा में बीजद के 114 बिधायक बाड़े. ई सांसद अउर बिधायक के भोट से उनकर जीत के संभावना बढ़ गइल बा.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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