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नई दिल्ली. भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने 26/11 जैसे आतंकवादी हमले के हालात में सुरक्षा बलों को दुश्मनों के कब्जे वाली इमारत के अंदर से एक लाइव वीडियो फीड प्रदान करने के मकसद के साथ अपनी प्रयोगशाला में ‘चूहा साइबोर्ग’ का पहला बैच तैयार किया है. दरअसल, इनकी मदद से सेना के जवान उस वक्त की स्थिति को भी अच्छी तरह से समझने में सक्षम होंगे. चूहा साइबोर्ग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत एक काल्पनिक चूहा जिसकी शारीरिक क्षमताओं को शरीर में निर्मित यांत्रिक तत्वों द्वारा सामान्य सीमाओं से परे बढ़ाया जाता है. कहने का मतलब है कि उसकी ताकत में कई गुणा इजाफा किया जाता है.

हैदराबाद के युवा शोधकर्ताओं के एक समूह द्वारा विकसित, चूहा साइबोर्ग और कुछ नहीं बल्कि मानक प्रयोगशाला में तैयार कुतरने वाला जीव है, जिनके मस्तिष्क में वैज्ञानिकों ने एक इलेक्ट्रोड स्थापित किया है जो बाहर से संकेत प्राप्त कर सकता है. लाइव तस्वीरों को कैप्चर करने के लिए इसके पीछे एक छोटा कैमरा भी लगा होगा. डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई.

एक बार एक इमारत के अंदर छोड़े जाने के बाद, ऐसे उपकरणों से लैस चूहा साइबोर्ग कहीं भी जा सकता है, एक दीवार पर चढ़ सकता है और वेश बदलने की अपनी प्राकृतिक क्षमता का इस्तेमाल करके दुश्मन से छिप सकता है. फिलहाल वैज्ञानिक उस तरीके को पूरी करने की प्रक्रिया में हैं, जिसमें बाहरी संकेतों का उपयोग करके चूहों को नियंत्रित किया जा सके.

हैदराबाद में डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी (डीवाईएसएल) के निदेशक पी शिव प्रसाद ने भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 108वें सत्र में असंयमित प्रौद्योगिकियों (Asymmetric Technologies) पर एक प्रस्तुति देते हुए कहा, ‘हमारा उद्देश्य आक्रामक मस्तिष्क इलेक्ट्रोड के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक कमांड के साथ चूहों को नियंत्रित करके खुफिया जानकारी एकत्र करना है.’

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यह उभरती हुई रणनीतिक तकनीकों में से एक है जिसे डीवाईएसएल ने अधिक विशिष्ट रोबोटों के विकल्प के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया है, क्योंकि गतिशीलता के मामले में उन रोबोट्स की अपनी कुछ सीमाएं हैं, जबकि चूहे अधिक लचीला विकल्प प्रदान करते हैं.

Tags: DRDO, Indian army, Rat

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