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पंजाबी सिंगर जस्सी गिल का म्यूजिक करियर तो ठीक ठाक चल रहा है, लेकिन उनमें अभिनय करने का एक अलग जज़्बा भी जागा हुआ है, इस वजह से उन्होंने कई पंजाबी फिल्मों में बतौर हीरो काम किया फिर ‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’ से हिंदी फिल्मों में एंट्री मारी और कंगना रनौत के साथ ‘पंगा’ में बड़ा अच्छा अभिनय करने के बाद अब एक बहुचर्चित मीम पर बनी फिल्म ‘क्या मेरी सोनम गुप्ता बेवफा है’ से छोटे शहर बरेली के एक सीधे साधे लड़के की भूमिका निभाई है. इस फिल्म को देखकर लगता है कि जस्सी गिल शायद गायकी और अभिनय की दोनों नावों की सवारी कर लेंगे, अगर इसी तरह की फिल्में चुनते रहे तो.

हिंदुस्तान में दिल टूटे आशिकों की कमी तो है नहीं. देश की 80% आबादी या तो मोहब्बत में है या मोहब्बत में जूते खा रही है. बची हुई 20% आबादी की शादी हो चुकी है और वो उसी से दुखी हैं. कुछ साल पहले एक दस रुपये के नोट पर किसी ने बॉलपॉइंट पेन से लिख दिया था- सोनम गुप्ता बेवफा है. वो नोट कई जगह घूमता रहा और फिर किसी और दिलजले आशिक ने उसे इंटरनेट पर डाल कर उसकी फ्री पब्लिसिटी कर दी. वो नोट पॉपुलर हो गया और उस पर मीम बनने लगे.

इसी को देखकर लेखक निर्देशक सौरभ त्यागी को फिल्म बनाने का आयडिया आया. एक सच्ची मोहब्बत की तलाश करते सीधे से लड़के सिंटू (जस्सी गिल) को उसके शहर की एक मॉडर्न सी लड़की सोनम गुप्ता (सुरभि ज्योति) से प्यार हो जाता है जो उसे शादी करने का वादा कर के, उसके पैसे लेकर चम्पत हो जाती है. कहानी की शुरुआत में सोनम अपना नंबर एक दस रुपये के नोट पर लिख कर सिंटू को देती है तो धोखा खाने के बाद सिंटू ऐसे ही 10 के नोट पर ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’ लिख कर बाजार में उसे रुसवा कर देता है.

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जब तक ये नोट फिल्म में नहीं आता और वायरल नहीं होता, तब तक कि कहानी एक दम फार्मूला है. छोटा शहर. मां का लाडला कोई काम नहीं करता, पढाई भी 12वीं तक करने के बाद बाप के पैसों पर ऐश करता है. बाप की मैं मार्किट में अंडर गारमेंट की दुकान है. लड़की तेज़ तर्रार है, मॉडर्न है और उसे इसी तरह के लड़के घुमाने का शौक़ है उसके मां बाप उसकी शादी को लेकर परेशांन हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश के छोटे शहरों और कस्बों में इस तरह की प्रेम कहानियां बहुतायत से देखने को मिलती हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इन प्रेम कहानियों में शादी, लड़की के मां-बाप/ जाति या लड़के के नाकारा होने की वजह से नहीं हो पाती. फिल्म में लड़की का खुद का करियर बनाने का सपना इस राह में आड़े आ जाता है.

फिल्म में मुफ्त में गाली गलौच रखी गई है, क्योंकि उत्तर प्रदेश का ऑथेंटिक फील देना ज़रूरी है और वहां अक्सर लोग गालियों में बातें करते हैं. सिंगल लौंडों वाली कहानियां और उनका एक तरफ़ा लड़की से प्रेम आखिर में बियर की बोतल में ख़त्म होता है. कुछ लड़के घूरवीर होते हैं जो दिन भर लड़कियों को घूरने के अलावा कुछ काम नहीं करते. जस्सी गिल उनसे थोड़ा आगे हैं क्योंकि उनमें महत्वकांक्षा है तो सब कुछ बड़े स्केल पर करने की. इसी कड़ी में कहानी में गुप्त रोग वाला एक एंगल और जोड़ दिया गया है. फिल्म में कई जगह हंसी आती है. जस्सी ने अच्छा अभिनय किया है. सुरभि ज्योति को टेलीविज़न सीरियल देखने वाले भली भांति जानते हैं. उनका अभिनय नक़ली लगता है क्योंकि बरेली जैसे शहर में उनके जैसा किरदार पाया जाना तो मुश्किल है. टेलीविज़न का अनुभव काम आया और इसलिए उनका किरदार चल जाता है. असली मज़ा सुरेखा सीकरी, अतुल श्रीवास्तव, विभा छिब्बर और बृजेन्द्र काला की वजह से आता है, हालांकि उनके किरदार बड़े देखे भाले से लगते हैं. विजय राज को पूरी तरह से वेस्ट किया गया है. उनके किरदार में एक नए पैसे की नवीनता नहीं है.

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एक मीम पर कहानी बनाने में यही दिक्कत होती है कि उसके इर्द गिर्द कहानी बनानी पड़ती है. फिल्म में कुछ गाने हैं जो अच्छे हैं. अधिकांश गाने रीमिक्स टाइप के हैं इसलिए फिट हो जाते हैं. रोचक कोहली का बड़े बेशर्म आशिक हो या राहुल मिश्रा का लेके पहला पहला प्यार, दोनों ही मस्ती से भरे हैं. फिल्म की हाईलाइट माता के जागरण का गाना है, पायल देव का ‘वॉलपेपर मैया का’ जिसमें दिव्या कुमार ने नरेंद्र चंचल की याद दिला दी. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी आरएम् स्वामी की है और एडिटिंग सैलेश तिवारी की है. काम ठीक ही है. फिल्म में थोड़ी बहुत गाली गलौच अगर बर्दाश्त कर सकते हैं तो ‘क्या मेरी सोनम गुप्ता बेवफा है’ एक क्यूट फिल्म है. देख सकते हैं. हालांकि सिर्फ एक मीम पर फिल्म बनाने की हिम्मत करने के लिए सौरभ त्यागी को बधाई देनी चाहिए, अगली बार कोई और ऐसा कुछ कर उम्मीद ज़रा कम ही है. अच्छे अभिनय के दम पर एक कमज़ोर कहानी चल गयी है. शायद अगली बार न चल सके.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्क्रिनप्ल :
डायरेक्शन :
संगीत :

Tags: Film review, Kya meri Sonam Gupta bewafa hai

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