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हाइलाइट्स

टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (TMF) 7 से 7.25 फीसदी तक ब्याज देते हैं.
फिलहाल, RBI पिछले 5 महीनों से सिस्टम में कम रहा है लिक्विडिटी.
पिछले 2 वर्षों में डेट्स फंड्स ने नहीं किया है अच्छा प्रदर्शन, पर अब अच्छा मौका.

नई दिल्ली. यदि आपके पास कुछ पैसा है, जिसे आप अगले कुछ वर्षों तक बैंक में फिक्सड डिपॉजिट (FD) में रखना चाहते हैं को रुकिए. ऐसा करने से पहले आपको कुछ दूसरे विकल्पों को देख लेना चाहिए, जो बैंक की FD से सुरक्षित ब्याज दे सकें और वह निवेश FD जितना ही सुरक्षित भी हो. आप सोच रहे होंगे कि भला ऐसे कौन-से निवेश विकल्प होंगे. आज हम आपको कुछ डेट्स फंड्स और फिक्सड डिपॉजिट से जुड़ी कुछ चीजें बता रहे हैं, जिससे आपके सामने निवेश का एक और ऑप्शन होगा.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रेपो रेट्स में वृद्धि कर रहा है. यह वह दर है, केंद्रीय बैंक दूसरे बैंकों को उधार देता है. आरबीआई पिछले 5 महीनों में सिस्टम में लिक्विडिटी को कम कर रहा है. मई 2020 से इसे लंबे समय तक प्रमुख बेंचमार्क दर में वृद्धि रखने के बाद, मैच्योरिटी अवधि के दौरान बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हुई है. उदाहरण के लिए, बेंचमार्क 10-वर्षीय G-Sec यील्ड्स पिछले 2 वर्षों में लगभग 160 आधार अंक बढ़कर 7.49 प्रतिशत हो गया है.

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बॉन्ड की कीमत बनाम NAV
यदि आज (सोमवार, 21 नवम्बर) को मौजूदा FD ब्याज दरों पर नजर डालें तो 2 करोड़ रुपये से कम की राशि पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 3.00% से 6.10%, HDFC बैंक 3.00% से 6.25%, ICICI बैंक 3.00% से 6.35% तक, पंजाब नेशनल बैंक 3.50% से 7.00% तक, बैंक ऑफ बड़ौदा 3.00% से 5.65% तक ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं. जबकि कुछ टारगेट मैच्योरिटी फंड 4 से 6 साल की अवधि पर 7 से 7.25 फीसदी तक ऑफर करते हैं.

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पिछले 2 वर्षों में, डेट फंडों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, क्योंकि उनकी अपनी होल्डिंग्स की कीमतों में गिरावट आई है. इसका कारण यह है कि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, बांड की कीमतें गिरती हैं, और चूंकि डेट म्यूचुअल फंडों को अपने NAV को बाजार में दैनिक रूप से चिह्नित करने की आवश्यकता होती है. बॉन्ड की कीमतों में गिरावट के साथ एनएवी भी गिरती है.

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ट्रस्ट म्यूचुअल फंड्स के सीईओ संदीप बागला ने बिजनेस टुडे को बताया, “इस कैलेंडर वर्ष में डेट फंडों ने निवेशकों को करीब 2 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं और रिटर्न ज्यादातर 3-4 फीसदी के बीच सकारात्मक रहा है.”

FD से अच्छा रिटर्न देने की क्षमता
लेकिन बॉन्ड के यील्ड-टू-मैच्योरिटी बढ़ने के साथ, कई विशेषज्ञों का कहना है कि डेट फंडों में निवेश करने का यह एक अच्छा समय है. उदाहरण के लिए, यदि किसी के पास मध्यम अवधि (4-6 वर्ष) है, तो रिटर्न में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से कोई फर्क नहीं पड़ता है, और यदि वह टैक्स के बाद रिटर्न देख रहा है, तो डेट फंड्स में से कुछ खास फंड्स फिक्स्ड डिपॉजिट से अधिक रिटर्न दे सकते हैं. इन डेट फंड्स को टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (Target Maturity Funds) कहा जाता है.

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NAV के अस्थायी उतार-चढ़ाव पर न दें ध्यान
बजाज कैपिटल लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर आलोक अग्रवाल कहते हैं, “टारगेट मैच्योरिटी फंड्स 4 से 6 साल की मैच्योरिटी पर 7 से 7.25 फीसदी की रेंज में यील्ड (नेट YTM) ऑफर करते हैं. वे मुख्य रूप से सरकारी प्रतिभूतियों, पीएसयू बॉन्ड और राज्य विकास ऋण (SDLs) में निवेश करते हैं, और योजना की मैच्योरिटी तक इन्हें होल्ड किया जाता है. यदि कोई उन्हें ओपन-एंडेड फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (FMPs) की तरह मानता है, तो वे अच्छे निवेश विकल्प हैं. ये अच्छा रिटर्न देने में सक्षम हैं. इनसे संबंधित एकमात्र चेतावनी यह है कि निवेशक को NAV में अस्थायी उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए.” अग्रवाल कहते हैं कि इस तरह यदि कोई ब्याज-दर में उतार-चढ़ाव का लाभ उठाना चाहता है, तो यह डेट फंड्स में निवेश करने का एक अच्छा समय है.

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