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हाइलाइट्स

ऐसे आयोजन में हिस्सा लेने वाले देशों की तरफ से सुरक्षा कारणों से वॉरशिप को तैनात किया जाता है.
किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इन वॉरशिप की तैनाती की जाती है.
ये वॉरशिप हर देश अपने राष्ट्रप्रमुख के सुरक्षा प्रोटोकाल के लिए भेजते हैं.

नसा दुआ ( इंडोनेशिया). G-20 शिखर सम्मेलन खत्म होने के बाद सभी देशों के वॉरशिप अपने अपने देश के लिए रवाना हो गए हैं. ये सभी वॉरशिप G-20 शिखर सम्मेलन की वजह से बाली के समंदर में तैनात थे. ऐसे आयोजन में सभी हिस्सा लेने वाले देशों की तरफ से सुरक्षा कारणों से इन वॉरशिप को तैनात किया जाता है. किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इन वॉरशिप की तैनाती की जाती है. ये वॉरशिप हर देश अपने राष्ट्रप्रमुख के सुरक्षा प्रोटोकाल के लिए भेजते हैं. अब G-20 शिखर सम्मेलन खत्म होने के बाद नेताओं की वापसी होने के साथ ही नुसा दुआ समंदर तट से इन वॉरशिप के भी लौटने की शुरुआत हो गई है.

दुनिया की सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने बुधवार को इंडोनेशिया के बाली में दूसरे दिन मुलाकात की. G-20 के नेताओं की संयुक्त घोषणा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले दिए गए बयान को ही एक बार फिर दोहराया गया. जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि ‘आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए.’ सितंबर में समरकंद में एक द्विपक्षीय बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से पीएम मोदी ने कहा था कि ‘यह युद्ध का युग नहीं है.’

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G-20 नेताओं के संयुक्त बयान में कहा गया कि शांति और स्थिरता की रक्षा करने वाले अंतर्राष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय प्रणाली को बनाए रखना जरूरी है. इसमें संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित सभी उद्देश्यों और सिद्धांतों का बचाव करना और सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सहित अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना शामिल है. बयान में कहा गया कि परमाणु हथियारों के उपयोग या उपयोग की धमकी अस्वीकार्य है. संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान, संकटों को दूर करने के प्रयास के साथ ही कूटनीति और संवाद महत्वपूर्ण हैं. आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए.

(इनपुट- नीरज) 

Tags: G-20 Summit, Indonesia, Indonesia News

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