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हरिकांत शर्मा

आगरा. सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी की गुरुवार 28 दिसंबर को जयंती है. गुरु गोबिंद सिंह जयंती को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है. देश भर में प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. गुरुद्वारों में लंगर और कीर्तन का दौर जारी है. उत्तर प्रदेश के आगरा के हाथीघाट पर एक ऐसा प्राचीन गुरुद्वारा है, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने यमुना के किनारे 45 दिन तक प्रवास किया था और मुगल बादशाह बहादुर शाह को नया जीवनदान दिया था. बहादुर शाह और गुरु गोबिंद सिंह जी की कहानी आज भी लोगों को याद है. यह पवित्र गुरुद्वारा प्रकाश पर्व पर दुल्हन की तरह सजाया जाता है. यहां बड़ी संख्या में सिख धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ सभी धर्मों के लोग मत्था टेकने के लिए आते हैं.

आगरा शहर में मुगलिया इमारत के साथ-साथ कई प्राचीन इमारतें मौजूद हैं. इनमें कई मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे शामिल हैं. इनमें से एक आगरा के यमुना किनारे मार्ग हाथीघाट पर स्थित गुरुद्वारे से सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी का गहरा नाता रहा है. यहां के सेवादार बच्चन सिंह ने बताया कि दो अगस्त, 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसका बड़ा बेटा बहादुर शाह अपने भाई तारा आजम को युद्ध में पराजित कर राजगद्दी पर बैठा था. उस युद्ध में गुरु गोबिंद सिंह जी ने बहादुर शाह की मदद की थी. एक बार बहादुर शाह हाथी पर सवार होकर यमुना किनारे से ताजमहल जा रहा थे, तो एक मगरमच्छ ने उनके हाथी के पैर को दबोच लिया था.

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इस मंजर को देख कर बहादुर शाह की सेना के भी हौसले पस्त हो गए. तब बहादुर शाह ने गुरु गोबिंद सिंह जी को याद किया जिसके बाद उन्होंने मगरमच्छ का संहार कर मुगल बादशाह बहादुर शाह की जान बचाई थी. मौत के मुंह से लौटे बहादुर शाह ने गुरु गोबिंद सिंह जी को आगरा किले में बुलाकर उनका इस्तकबाल किया था. उन्हें अपने से ऊपर सिंघासन पर बैठाकर उन्हें हीरे-जवाहरत जड़ी पगड़ी और कलंगी भेंट की थी. इसके अलावा उन्हें सोने की 1,100 मोहरें भी भेंट में दी थीं.

डेढ़ महीने इसी गुरुद्वारे में रहे थे गुरु गोबिंद सिंह जी

यमुना किनारे मार्ग पर स्थित इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे की एक कोठरी में गुरु गोबिंद सिंह जी ने 45 दिन प्रवास किया था, जो आज भी उसी स्वरूप में स्थित है. इस कोठरीनुमा कमरे में बहादुर शाह और गुरु गोबिंद सिंह के बीच हुए इस्तकबाल का एक चित्र भी मौजूद है, जिसमें बहादुर शाह गुरु गोबिंद सिंह जी को पगड़ी भेंट करते नजर आ रहे हैं. गुरु गोबिंद सिंह जी ने कुछ दिन बहादुर शाह के आग्रह पर आगरा किले में प्रवास किया था, जिसका इतिहास की किताबों में जिक्र है. आगरा के इस गुरुद्वारे में गुरु गोबिंद सिंह जी की यादें आज भी ताजा हैं.

धूमधाम से मनाया जाता है प्रकाश पर्व

इस गुरुद्वारे के सेवादार बच्चन सिंह ने बताया कि सिख धर्म के प्रत्येक गुरु के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारे में कीर्तन और प्रसादी का कार्यक्रम होता है. सैकड़ों लोग अपने गुरु के आगे शीश नवाते है. गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां लगभग डेढ़ महीना प्रवास किया था, जिसके कारण इस पवित्र जगह का इतिहास बेहद खास है. इस प्रकाश पर्व के मौके पर आगरा के सभी गुरुद्वारों में लंगर चलाए जाते हैं. साफ-सफाई की जाती है और गुरुद्वारों को सजाया भी जाता है. इसके अलावा, सिख धर्म के अन्य गुरुओं के पैर भी आगरा की पवित्र धरती पर पड़े हैं.

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