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Hemant kumar 102nd Birth Anniversary: हेमंत कुमार (Hemant Kumar) के नाम से प्रसिद्ध गायक का नाम हेमंत मुखोपाध्याय था. सुर-संगीत के पुजारी भले ही आज दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने पीछे संगीत की ऐसी शानदार विरासत छोड़ गए हैं जिसकी ताजगी सदियों तक बनी रहेगी. हेमंत दा के नाम से प्रसिद्ध सिंगर ने हिंदी,बंगाली के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं, गुजराती, मराठी, असमी, पंजाबी, तमिल, संस्कृत, कोंकणी, उर्दू और भोजपुरी भाषाओं में गाने गाए थे. 16 जून 1920 को वाराणसी में पैदा हुए हेमंत दा की 102वीं जयंती हैं. इस खास मौके पर उनके गायिकी के सफर के साथ-साथ एक ऐसा किस्सा बताते हैं जिसे सुन मान जाएंगे कि वह सिर्फ कलाकार ही नहीं थे बल्कि एक अच्छे इंसान भी थे, ऐसा हम क्यों कह रहे हैं, ये जानने के लिए पढ़िए आगे.

म्यूजिक डायरेक्टर और सिंगर हेमंत दा का जन्म ही गायन-वादन के केंद्र वाराणसी में हुआ था. बाद में उनकी फैमिली कोलकाता (उस समय कलकत्ता) शिफ्ट हो गई थी. टीनएज से ही संगीत में रुचि रखने वाले हेमंत दा एक ऐसे सिंगर और कंपोजर थे जिनकी प्रतिभा के कायल संगीत प्रेमी पहले भी थे और आज भी हैं. कई फिल्में ऐसी होती हैं जिसकी कहानी में भले ही दम ना हो लेकिन संगीत की बदौलत हिट हो जाया करती हैं. कुछ ऐसा ही करिश्मा हेमंत दा के संगीत में भी हुआ करता था. उनकी गायिकी में सुरों का कमाल तो था ही साथ ही पवित्रता भी थी. हर आम-खास को अपनी आवाज से दीवाना बना देने वाले हेमंत दा ने बंगाली सिनेमा से करियर की शुरुआत की थी.

Hemant kumar
वाराणसी में पैदा हुए थे हेमंत कुमार.

हेमंत दा का संगीतमय सफर

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अपनी गायिकी से हेमंत दा ने ऐसी अमिट छाप छोड़ है कि बरसों बाद भी बंगाली सिनेमा में उस मुकाम को कोई हासिल नहीं कर सका. उत्तम कुमार की आवाज के तौर प्रसिद्ध 1941 में ‘निमाई सन्यास’ बंगाली फिल्म से शुरुआत की थी. 1944 में हिंदी फिल्म ‘इरादा’ के लिए आवाज दी थी जिसे संगीत पंडित अमरनाथ ने दिया था. 1952 में संगीतकार के तौर पर हेमंत दा को पहचान दिलाने वाली फिल्म ‘आनंदमठ’ थी. लता मंगेशकर के साथ गाया ‘वंदे मातरम’ से उन्हें खूब वाहवाही मिली थी. हेमंत दा ने अपनी फिल्मी करियर के शुरुआत में कमल दासगुप्ता, पंडित अमरनाथ, सलिल चौधरी जैसे बड़े संगीतकारों से आत्मीय रिश्ते बनाए थे.

हेमंत दा के संगीत ने ‘नागिन’ को हिट करवाया था

रविंद्र संगीत से प्रभावित हेमंत दा को जिस फिल्म से नाम और शोहरत मिली वह थी ‘नागिन’ जो 1954 में रिलीज हुई थी. ‘नागिन’ फिल्म का एक फेमस गाना है ‘मन डोले मेरा तन डोले’, जिसे लता मंगेशकर ने आवाज दी थी और इसे संगीत से संवारा हेमंत दा ने था. कहते हैं कि जब ये फिल्म रिलीज हुई तो दर्शकों की कसौटी पर नहीं उतरी. फिल्म का गाना जबकि बेहद जबरदस्त था और वह दौर रिकॉर्ड्स का था. फिल्म निर्माता शशिधर मुखर्जी ने करीब 1 हजार रिकॉर्ड्स होटल और रेस्टोरेंट में फ्री में बंटवा दिए थे. वहां पहुंचने वाले लोगों को गाना ऐसा पसंद आया कि दर्शक ‘नागिन’ देखने के लिए सिनेमाघर पहुंचने लगे और इस तरह फिल्म हिट हो गई. कहते हैं कि इस गाने की पॉपुलैरिटी ने हेमंत दा का करियर भी संवार दिया था.

मुंबई-कोलकाता के डेली एयर पैसेंजर बन गए थे हेमंत दा

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चूंकि हेमंत दा बंगाली और हिंदी दोनों ही फिल्मों के लिए समान रूप से काम करते थे तो आलम ये हो गया कि हर फिल्म निर्माता उन्हें अपनी फिल्मों में संगीत के लिए लेना चाहता था. कहते हैं कि वह इतने बिजी हो गए कि उन्हें हर दिन मुंबई-कोलकाता के लिए हवाई यात्रा करनी पड़ती थी. उनकी यात्रा पर मशहूर संगीत लेखक पंकज राग ने अपनी किताब ‘धुनों की यात्रा’ में लिखा है कि एयर इंडिया ने उन्हें डेली पैसेंजर का खिताब दे दिया था.

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अपने संगीत की वजह से अमर हो गए हेमंत कुमार.

‘अपना दिल तो है आवारा’ को कौन भूल सकता है?

हेमंत दा ने 1958 में आई फिल्म ‘सोलवां सावन’ के लिए ‘अपना दिल तो है आवारा’ गाया जिसकी सफलता के बारे में किसी को बताने की कोई जरूरत नहीं है. इतने साल भी ये गाना संगीतप्रेमियों की लिस्ट में शामिल है. एसडी बर्मन के लिए करीब 13 गाने हेमंत कुमार ने गाए थे जिसमें 12 को देव आनंद पर फिल्माया गया था, जिसमें ये गाना सबसे पॉपुलर रहा. वहीं फिल्म ‘जाल’ के लिए ‘ये रात ये चांदनी फिर कहां’ गाकर हेमंत कुमार देव आनंद की आवाज बन गए थे.

हेमंत दा पर डाक टिकट भी जारी हुआ था

हेमंत कुमार एक वर्सेटाइल पर्सनैलिटी थे, करीब 50 फिल्मों में संगीत देने वाले संगीतकार फिल्ममेकर भी थे. 1960 में अपना प्रोडक्शन हाउस खोला और इसके बैनर तले ‘बीस साल बाद’, ‘फरार’, ‘खामोशी’, ‘बीवी और मकान’ जैसी फिल्में भी बनाई. हेमंत दा के सम्मान में उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी हुआ था.

हेमंत दा एक अच्छे इंसान भी थे

हेमंत कुमार सिर्फ अच्छे संगीतकार और फिल्मकार ही नहीं थे, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भरे हुए इंसान भी थे. बंगाल में पड़े अकाल के दौरान जब लाखों लोगों की भूख ने जान ले ली थी तब वह इप्टा नामक संगठन से जुड़ गए थे. बंगाल और आसाम के गांव-गांव गए, भूख से बेहाल इलाकों का दौरा किया. कैफी आजमी, इस्मत चुगतई, सलिल चौधरी, चेतन आनंद, होमी भाभा जैसे लोग भी इप्टा के सदस्य थे.

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संगीत का ईश्वरीय वरदान मिला था

हेमंत दा एक ऐसे संगीत के पुजारी थे जिनके लिए मशहूर संगीतकार सलिल चौधरी कहते थे कि अगर ईश्वर गाना गाते तो उनकी आवाज हेमंत कुमार की तरह होती. वहीं लता मंगेशकर भी उनकी गायिकी की मुरीद थीं,कहा करती थी कि जब हेमंत दा गाते हैं तो ऐसा लगता है कि कोई पुजारी मंदिर में बैठकर गा रहा है.

हेमंत दा की बहू हैं मौसमी चटर्जी

हेमंत कुमार के परिवार की बात करें तो उनकी पत्नी का नाम बेला मुखोपाध्याय था. इनके दो बच्चे जयंत मुखर्जी और रानू मुखर्जी हैं. कम लोगों को पता होगा कि फिल्म इंडस्ट्री की दिग्गज एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी हेमंत कुमार की बहू हैं. मौसमी की शादी जयंत से हुई है. अपनी गायिकी और संगीत से देश ही नहीं दुनिया में भारतीय संगीत का झंडा बुलंद करने वाले हेमंत 26 सितंबर 1989 को दुनिया को अलविदा कह गए.

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