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India vs Ireland T20I: भारतीय टीम को आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज खेलनी है. ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या इस सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे. पंड्या ने हाल ही में गुजरात टाइटंस को बतौर कप्तान आईपीएल जिताया है. इस वजह से उनकी कप्तानी पर खास नजर रहने वाली है.

Source: News18Hindi Last updated on: June 22, 2022, 11:56 AM IST

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आयरलैंड के दौरे पर भले ही दो टी20 मैचों के लिए ही सही टीम इंडिया की कप्तान हार्दिक पंड्या के हाथों में रहेगी. लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं हो सकता है कि वडोदरा के ऑलराउंडर इस प्रोन्नति के हकदार नहीं थे. आलोचकों को दरअसल ऐसा लग सकता है कि भाई किस्मत हो तो पंड्या जैसी कि देखो जुम्मा-जुम्मा आठ दिन नहीं हुए टीम में वापसी किए हुए और उन्हें कप्तानी मिल गई. अगर आप पंड्या के करियर पर नज़र दौड़ाएंगे तो आपको ये दिखेगा कि जीवन में अचानक से ही प्रोन्नति पाने की घटना उनके लिए अब एक आदत सी बन गई है. आखिर 2016 में किसने सोचा था कि पंड्या का चयन टीम इंडिया में हो जाएगा जब वो वडोदरा के लिए फर्स्ट क्लास या फिर लिस्ट एक क्रिकेट में कोई आग नहीं लगा रहे थे. लेकिन, पंड्या के करियर का ग्राफ ही कुछ ऐसा है. उनमें कभी कोच तो कभी चयनकर्ता तो कभी कप्तान तो कभी फ्रेंचाइजी के मालिक कुछ ख़ास देखते हैं और उन पर दांव लगाते हैं और अक्सर ये दांव सही बैठता है.

इस साल आईपीएल में गुजरात टाइटंस के लिए पंड्या ने तो यही किया ना! भला जिस टूर्नामेंट में विराट कोहली जैसे दिग्गज कप्तान को 2013 से लेकर 2021 तक लगातार कप्तानी करने के बाद ट्रॉफी नहीं मिली, पंड्या के साथ के एल राहुल को 3 सालों से कप्तानी करने के बाद फाइनल तक में जाने का मौका नहीं मिला और ऋषभ पंत, संजू सैमसन और श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ी बेहतरीन उम्मीद जगाने के बावजूद अब तक ट्रॉफी नहीं जीत पाए हैं. वहीं पंड्या ने कप्तान के तौर पर पहले ही सीज़न में आकर हल्ला बोल दिया. और हल्ला ऐसा बोला कि सीधे उन्हें 1 महीने बाद ही टीम इंडिया की कप्तानी मिल गई. ऐसा तो रोहित शर्मा के साथ भी नहीं हुआ था जब 2013 में उन्होंने पहले ही सीज़न में मुंबई इंडियंस की कप्तानी करते हुए पहली चैंपियनशिप जीत दिलाई थी. दरअसल, कई मायनों में पंड्या ही रोहित की विरासत को आगे ले जाने वाले कप्तान के विकल्प के तौर पर सही दावेदार के तौर पर उभरते दिख रहे हैं.

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पंड्या के कट्टर आलोचक ये तर्क भी दे सकते हैं कि जिस खिलाड़ी ने ऑलराउंडर के तौर पर खुद को पूरी तरह से स्थापित भी नहीं किया उसे भला इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी और वो भी इतनी जल्दी कैसे दी जा सकती है. देखिये, अगर आप पंड्या में ज़बरदस्ती महान कपिल देव की छाया देखने को कोशिश करेंगे तो आपको मायूसी ही हाथ लगेगी लेकिन अगर आप ग़ौर से ये देखेंगे कि जिस मुल्क में कपिल देव तो दूर की बात, इरफान पठान और यहां तक कि अजीत अगरकर की तरह भी कोई हरफनमौला खिलाड़ी आसानी से नहीं मिलता है. वहां पंड्या ने एक सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर के तौर पर तगड़ी उम्मीदें जगाई हैं. ये पंड्या की प्रतिभा पर ही भरोसे का नतीजा था जिसके चलते अचानक ही 2016 में उन्हें टी20 इंटरनेशनल खेलने का मौका मिल गया जबकि उन्होंने अपने घरेलू टीम वड़ोदरा के लिए कोई तहलका नहीं मचा दिया था. एमएस धोनी से लेकर विराट कोहली और रोहित शर्मा से लेकर राहुल द्रविड़ या फिर अनिल कुंबले से लेकर गैरी कर्स्टन या फिर आशीष नेहरा जैसे तमाम दिग्गजों को पंड्या की स्वाभाविक प्रतिभा में हमेशा से ही वो चमक दिखी जिसके चलते इस खिलाड़ी को चयनकर्ताओं ने भी काफी बैक किया. लेकिन, क्या अब चेतन शर्मा और उनके साथी खिलाड़ी पंड्या पर एक और बड़ा दांव खेल सकते हैं. वैसे तो शुरुआत उन्होंने कर दी है. चयनकर्ता और फैंस तो छोड़िए, खुद पंड्या ने कप्तान बनाए जाने पर ये कहा कि भला कोई 6-7 महीने पहले इस बात की कल्पना भी कर सकता था क्या!

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लेकिन, ऐसा यूं ही नहीं हो गया. पंड्या के सितारे गर्दिश में थे लेकिन वो परेशान नहीं थे. पंड्या ने भारतीय ड्रेसिंग रुम में धोनी, कोहली और रोहित शर्मा को करीब से देखा है और उनके शागिर्द रहें हैं. उन्हें ये पता है कि अगर धोनी, रोहित और कोहली के लिए हालात विपरीत हो जाते हैं और उलसके बावजूद वो भी वापसी करतें है तो वो खुद ऐसा कर सकते हैं. और यही ज़ज्बा पंड्या को मौजूदा पीढ़ी के खिलाड़ियों में थोड़ा अलग करता है.

ये सच है कि आंकड़ों के लिहाज से पंड्या ना तो इंग्लैंड के बेन स्टोक्स की तरह कामयाब है और ना ही वेस्टइंडीज़ के जेसन होल्डर की तरह प्रभावशाली. लेकिन, जितना कुछ पंड्या के पास है उससे वो टीम इंडिया को एक ज़बरदस्त टीम बनाने में योगदान देते हैं. अगर पंड्या को कप्तानी दे दी जाए तो उनका खेल ठीक उसी तरह से और निखर जायेगा जैसा कि गुजरात लॉयंस की कप्तानी करते हुए उन्होंने आईपीएल में कमाल दिखाया. हो सकता है कि भारतयी चयनकर्ताओं ने पंत को ऑयरलैंड दौरे के लिए इसलिए कप्तानी नहीं दी क्योंकि उन्हें बर्मिंघम में होने वाले इकलौते टेस्ट में खेलना है. दो फॉर्मेट के बीच अंतर महज 2 दिनों का है और शायद ये किसी भी खिलाड़ी के लिए विदेशी ज़मीं पर तुरंत मोड स्विच करना मुमकिन नहीं होगा. लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू ये भी है कि पंत ने साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ में अपनी कप्तानी से ऐसा जलवा नहीं बिखेरा कि हर कोई सहज़ तरीके से उनका मुरीद हो जाए. इसका मतलब ये कतई नहीं है कि पंत की कप्तानी का आकलन सिर्फ एक सीरीज़ के आधार पर हो. यहां पर कोच राहुल द्रविड़ की दलील सही लगती है कि पंत का आकलन करने के समय हड़बड़ी नहीं दिखानी चाहिए. लेकिन, फिलहाल पंत के लिए चुनौती एक नये कप्तान के तौर पर खुद को एक प्रबल दावेदार साबित करने की बजाए सफेद गेंद की क्रिकेट में एक विकेटकीपर बल्लेबाज़ के तौर पर अपनी जगह उसी तरह से पक्की करनी है जैसा कि उनके साथ टेस्ट क्रिकेट में है. अगर इस नज़रिये से देखें तो ये भी मुमकिन है कि इंग्लैंड दौरे पर 3 मैचों की टी20 सीरीज़ में भी कप्तानी की ज़िम्मेदारी गुजरात के लॉंयन यानि शेर पंड्या पर ही हो!

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(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)

ब्लॉगर के बारे में

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: June 22, 2022, 11:56 AM IST

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