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श्रीनगर. जम्मू एवं कश्मीर के कुलगाम जिले में मारी गई हिंदू शिक्षिका रजनी बाला (36) का आज सुबह 11 बजे अंतिम संस्कार किया गया. रजनी जम्मू के साम्बा जिले की रहने वाली थीं और कुलगाम के गोपालपोरा में एक सरकारी स्कूल में उनकी नियुक्ति हुई थी. कश्मीर में मई महीने में यह 7वीं हत्या है. आतंकियों ने इसी महीने में दूसरी बार किसी गैर मुस्लिम सरकारी कर्मचारी को अपना निशाना बनाया है. रजनी की मौत के बाद उनके पति ने मुख्य शिक्षा अधिकारी पर अपनी पत्नी के कुलगाम जिले से स्थानान्तरण करने में देर लगाने का आरोप लगाया है. उनका कहना था कि पहली मौत के बाद ही रजनी ने 4 बार सीईओ के पास स्थानान्तरण की अपील की थी, लेकिन सीईओ ने उनकी प्रार्थना को कोई तरजीह नहीं दी.

रजनी की मौत के बाद कश्मीरी पंडितों में आक्रोश और बढ़ गया है. उनका कहना है कि अगर उन्हें अगले 24 घंटे में किसी सुरक्षित जगह पर नहीं पहुंचाया गया तो घाटी से बड़े पैमाने पर पलायन होगा. सैंकड़ों कश्मीरी पंडितों ने खुद के पुनर्वास की मांग को लेकर कुलगाम और श्रीनगर हाइवे को जाम कर दिया था. इस दौरान उन्होंने उपराज्यपाल के विरोध में नारे लगाते हुए न्याय की मांग की. दरअसल केंद्र सरकार ने 6 अप्रैल को संसद में जानकारी दी थी कि 2021 में कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित लोगों की हत्या चरम पर थी. 2019 से 14 हिंदुओं को आतंकवादियों ने मौत के घाट उतार दिया था, इसमें 4 कश्मीरी पंडित थे. सभी हत्याएं अनंतनाग, श्रीनगर, पुलवामा और कुलगाम जिले में दर्ज की गईं.

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2017 में 11 लोगों की हुई हत्या
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर में पिछले पांच सालों में अल्पसंख्यक समुदाय के करीब 34 लोगों की हत्या की है, जिसमें 2021 में मारे गए 11 लोग भी शामिल हैं.

कश्मीरी हिंदुओं पर हमले की लिस्ट
17 मई 2022: आतंकियों ने बारामुला जिले के दीवान बाग इलाके में नई खुली शराब की दुकान पर ग्रेनेड फेंक दिया था. इस हमले में 52 साल के रंजीत सिंह की मौत हो गई और तीन लोग बुरी तरह से घायल हुए.

12 मई 2022ः सरकारी कर्मचारी राहुल भट को आतंकवादियों ने मध्य कश्मीर के बड़गाम जिले के चडूरा शहर के तहसील कार्यालय के अंदर गोली मार दी. उन्हें 2010-11 में प्रवासियों के लिए दिए गए विशेष पैकेज के तहत यहां क्लर्क की नौकरी मिली थी.

13 अप्रैल 2022ः जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने खुलेआम गोलीबारी करते हुए सतीश कुमार सिंह राजपूत को मौत के घाट उतार दिया. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी मौत हो गई. काकरां के रहने वाले सतीश पेशे से ड्राइवर थे.

इस घटना के बाद आतंकी संगठन लश्कर ए इस्लाम ने कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए ‘काफिर के नाम एक पत्र’ लिखते हुए कहा कि कश्मीरी हिंदू या तो घाटी छोड़ें या उन्हें मार दिया जाएगा.

4 अप्रैल 2022ः बाल कृष्ण भट (39) भी कश्मीरी पंडित ही थे. शोपियां में उनके घर के पास एक संदिग्ध आतंकी ने उन्हें मार दिया था.

17 अक्टूबर 2021ः बिहार के अरविंद कुमार साह को भी आतंकवादियों ने अपना निशाना बनाया. अरविंद घाटी में गोल गप्पे की रेहड़ी लगाता था.

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7 अक्टूबर 2021ः सिख स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और एक कश्मीरी पंडित शिक्षक दीपक चंद को श्रीनगर शहर के सरकारी स्कूल के अंदर मार दिया गया था.

5 अक्टूबर 2021ः इसी तरह श्रीनगर के इक़बाल पार्क में चर्चित बिंद्रू मेडिकल स्टोर के मालिक कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंद्रू को आतंकियों ने गोली मार दी थी. बिंद्रू की मौत ने कश्मीरी समुदाय को हिला कर रख दिया. इसी दिन बिहार के वीरेंद्र पासवान, जो अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे, उन्हें भी आतंकियों ने मार दिया. वह श्रीनगर में चाट का ठेला लगाया करते थे.

Tags: Jammu and kashmir, Kashmiri Pandits

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