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2014 में जब पीएम नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने दिल्ली की सत्ता संभाली, उसके पहले की राजनीति को याद करने पर एक बेबसी-सी छा जाती है. पॉलिसी पैरालिसिस से लेकर भ्रष्टाचार तक, हर रोज हो रहे खुलासों ने दुनिया भर में भारत की छवि खराब कर रखी थी. काला धन, महंगाई और ढुलमुल गति से चली यूपीए सरकार ने एक आम भारतीय के दिल में गर्व की भावना उठनी, तो दूर की बात थी. ऊपर से आलम ये कि विकासशील देशों की श्रेणी में खड़ा हमारा देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे बड़े बाजार होने का फायदा तक नहीं उठा पा रहा था. ऐसी ही मुश्किल घड़ी में देश की जनता ने सत्ता गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी को सौंपी. दशकों बाद अपने दम पर कोई भी पार्टी बहुमत लेकर आयी थी. अच्छे दिन आने वाले हैं… जैसे नारों ने लोगों की उम्मीदें जगा दीं. कुछ ऐसे ही माहौल में 26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी ने पीएम पद की शपथ ली, लेकिन देश बदल रहा है, आगे निकल रहा है, के नारे ने ये बात पुख्ता कर दी है कि पीएम मोदी पर जनता का भरोसा बरकरार है. हो भी क्यों न… आखिर अंतिम पायदान पर खड़े भारतीयों को उनकी ताकत का अहसास कराने में पीएम मोदी सफल रहे हैं.

पीएम मोदी के 8 साल के कार्यकाल की समीक्षा करें, तो साफ हो जाता है कि उनकी सरकार द्वारा उठाया गया हर कदम, उनकी हर बात राष्ट्र निर्माण की दिशा में बढ़ते देश की जनता के कदम थे. धारा 370 हटाना, तीन तलाक के खिलाफ कानून, सीएए, कृषि कानून, नोटबंदी, सीमा पर चीन को पीछे धकेलना, सर्जिकल स्ट्राइक, परीक्षा पर चर्चा—जैसे मुद्दों पर खूब चर्चा हुई, मोदी सरकार की तारीफों के पुल बांधे गए. 8 सालों में पीएम मोदी के नेतृत्व में ऐसे कामों की कमी नहीं, जिनके दम पर वे चुनाव जीतते रहे. हम बात करेंगे उन मुद्दों पर जिनको पीएम मोदी ने खुद चुना और उन्हें ऐसी दिशा दी जिससे देश दुनिया में बसा हर भारतवासी कह उठा कि हमें भारतीय होने पर गर्व है.

दुनिया भर में बसे भारतीयों को नयी आवाज दी
पीएम पद की शपथ लेने के वक्त जब नरेन्द्र मोदी ने अपनी पहली कूटनीतिक चाल चली, तो दुनिया भर से एक ही आवाज आई कि मोदी जी ने कमाल कर दिया. सार्क देशों के तमाम राष्ट्रध्यक्ष शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे. इस पहल ने साफ कर दिया कि जिस मुख्यमंत्री मोदी को अमेरिका वीजा नहीं देता था, वो खुले दिल से दुनिया को अपने साथ लेकर चलना सिखाने आया है. फिर क्या था दुनिया भर के दौरे शुरु हुए. अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीयों को एकजुट करने का काम पीएम मोदी ने अपने विदेशी दौरों में शुरू किया. तमाम मंत्रियों की ड्यूटी लगी कि वो उन देशों मे जाएं जहां पीएम और विदेश मंत्री नहीं जा पाएं. आलम ये है कि इन 8 सालों के मोदी राज में 180 से ज्यादा देशों में भारत पहुंच चुका है और संबंध वापस कायम कर लिए हैं. इसके ऊपर से भारतीयों के साथ पीएम मोदी के कार्यक्रमों ने वहां बसे अप्रवासी भारतीयों को भारत माता की जय और मोदी-मोदी जैसे नारों के साथ अपनी राष्ट्रीयता जताना आम बात हो चुका है.

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मोदी 1.0 में विदेश विभाग ने एक ट्विटर सेवा शुरू की थी. उसके तहत विदेशों में फंसे भारतीय महज एक ट्वीट कर विदेश मंत्रालय या विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को टैग करना ही उन्हें मुश्किलों से उबार देता. यही चाल थी, जिसने दूर देश में बैठे या फिर किसी मुश्किल में फंसे अप्रवासी भारतीयों को ताकत दी कि कोई उनकी सुनने वाला है. भारतीय दूतावासों के बंद दरवाजे भी मोदी सरकार के दौरान यू टर्न लेते हुए आम भारतीयों के लिए खुल गए. पीएम मोदी खुद दुनिया भर के देशों में जाकर भारतीय समुदाय के साथ मुलाकातें करते रहे. अप्रवासी भारतीयों के लिए मानो एक वरदान था कि उनके देश का शीर्ष नेतृत्व उनके साथ खड़ा है और उनसे अपने देश के विकास के लिए सहयोग भी मांग रहा है. पीएम मोदी का यही जज्बा दुनिया भर मे बसे भारतीयों का स्वाभिमान जगा गया. अब इंडिया-इंडिया के नारे सिर्फ खेल के मैदान पर नहीं, बल्कि दुनिया के हर कोने से आने लगे हैं.

स्वच्छता अभियान बना जन आंदोलन
पीएम मोदी की कार्यशैली यही रही है कि देश से जुडे़ मुद्दे को सफल बनाने के काम में हर तबके, हर समुदाय और हर उम्र के लोगों को भागीदारी देने की बात करते हैं. 2014 में सत्ता संभालते ही पीएम मोदी ने स्वच्छता अभियान शुरु किया. दिल्ली के राजपथ पर जब उन्होंने झाडू पकड़ी और ऐलान किया कि स्‍वच्‍छता अभियान शुरू होगा तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि ये जन आंदोलन का रूप ले लेगा. कभी विदेशों से आने वाले सैलानी हों, तो कभी विदेशी मेहमान, भारत की गंदगी का ही जिक्र करते थे. विदेशी पत्रिकाओं में देश की गंदगी प्रमुखता से छपती थी. लेकिन स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन में बदल कर पीएम मोदी ने पूरे देश में एक ऐसा स्वाभिमान जगाया जिसमें बड़े तो बड़े, बच्चे भी बराबर के भागीदार बने. आज चाहे ऐतिहासिक स्थल हों या फिर पूज्य स्थल, पर्यटन क्षेत्र हों या फिर सरकारी दफ्तर, स्वच्छता अभियान का असर अब हर जगह नजर आने लगा है. अब जबकि भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार होने लगा है, तब हर भारतीय का मस्तक स्वाभिमान से भरा नजर आता है. आखिर जो काम आजादी के 60 साल बाद तक नहीं हो पाया था, उसे सबकी भागीदारी ने कैसे सफल बना दिया और दुनिया ने दांतों तले अंगुली दबा ली.

नारी शक्ति का सशक्तिकरण
बिहार में हुए विधानसभा चुनावों के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि उन्हें साइलेंट वोटरों ने जीत दिलायी है. एक के बाद एक चुनावी समर में बीजेपी को मिली जीत ये साबित कर रही है कि पीएम का पद संभालने के बाद नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं के 100 फीसदी सशक्तिकरण के लिए जितने भी कदम उठाए, उनका सीधा असर अब नजर आने लगा है. ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ के साथ सफर शुरू करते हुए पीएम मोदी ने स्वच्छता अभियान के तहत हर घर टॉयलेट बनाने का जो काम देश के कोने-कोने में शुरू करवाया, उसे भी महिला शक्ति ने जन आंदोलन का रूप लेने में देर नहीं लगी. खुले में शौच एक ऐसा अभिशाप था, जिससे महिलाओं को आजादी के इतने सालों के बाद भी मुक्ति नहीं मिल पायी थी और जब मोदी सरकार अपने कार्यकाल के 8 साल पूरे कर रही है, तो ये कहा जा सकता है कि इस अभिशाप से मुक्ति मिल रही है. पीएम मोदी की एक और महत्वाकांक्षी योजना है, घर-घर मुफ्त गैस सिलिंडर पहुंचाने की. एक ऐसी योजना जिसने दूर-दराज में रहने वाली शोषित और वंचित महिलाओं को एक चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलायी. कोरोना काल में भी ये योजना जारी रही. जन धन खातों के माध्यम से महिलाओं के खाते में सीधे पैसे पहुंचे तो साफ हो गया कि मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर कितनी प्रतिबद्ध है. जाहिर है सशक्तिकरण के साथ स्वाभिमान भी आता है. अल्पसंख्यक महिलाओं को तीन तलाक जैसे आदिम जमाने की कुरीति से छुटकारा दिलाना भी देश दुनिया में बड़ा संदेश दे गया. इन महिलाओं का स्वाभिमान वापस दिलाना ही साबित करता है कि इस वंचित तबके को भारतीय होने पर कितना गर्व महसूस होता है.

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सेना का मनोबल बढ़ा
वो दिन गए जब सीमा पार से तोपें चलती थीं, तो जवाब देने के लिए दिल्ली के जवाब का इंतजार करना पड़ता था. आतंकवादी सीमा पर से ऐसे घुसे चले आते थे, मानो अपने क्षेत्र में घूम रहे हों. लेकिन अब सीमा पर बैठे जवानों को दिल्ली के निर्देश का इंतजार नहीं करना पड़ता. पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक हो या फिर चीन से गलवान को लेकर दो टूक, सबको करारा जवाब दिया है. सीमा पर चीन आंखे नहीं तरेर सकता. आतंकी घटनाएं भी लगातार कम होती ही जा रहीं हैं क्योंकि पाकिस्तान का ही मनोबल गिर रहा है. अमीर पश्चिमी देश अब भारत को अपने मुताबिक नहीं चला सकते. कोरोना हो या यूक्रेन का युद्ध, पीएम मोदी ने अपनी कुशल कूटनीति और राजनीति की ऐसी छाप छोड़ी है कि अब हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया है.

अरसे से एक लीक पर चल रहे नौकरशाहों को विकास के काम पर लगाया
पीएम पद की शपथ लेने के बाद पीएम मोदी ने एक के बाद एक बैठक कर साफ कर दिया कि अब नौकरशाह अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे. अब सरकारी बाबू अपनी कुर्सियों पर मिलते हैं. समय पर कार्यालय आते हैं और काम पूरा करके ही घर के लिए निकल पाते हैं. कई प्रशासनिक सुधार जैसे सेल्फ अटेस्टेशन से लेकर आधार जैसे पहचान पत्र बनाना, रोजमर्रा के भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाना जैसे कदमों ने आम आदमी को सशक्त किया. पीएम मोदी ने ये सुनिश्चत किया कि नौकरशाह अब विकास की राह में पीछे छूट गए आखिरी मील पर खड़े वंचित लोगों तक सरकारी योजनाओं का फायदा पहुंचा कर ही दम लें, तो ही बेहतर होगा. सौ से ज्यादा सबसे पिछड़े जिलों का चयन कर वहां बड़े अधिकारियों को निगरानी के काम पर लगाया और पूरा जिला प्रशासन विकास के काम में लग गया. पीएम मोदी ने खुद प्रगति की बैठकें कर राज्यों के अधिकारियों के साथ विकास के काम का जायजा लिया. ब्रिटिश सरकार के दौरान स्टील फ्रेम कहीं जाने वाली सेवाएं मोदी राज में पिघलने लगीं हैं. अब आम आदमी का काम लालफीताशाही में नहीं फंसता. ये तो हर भारतीय के लिए गर्व की बात है.

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भ्रष्टाचार मुक्त भारत
28 मई को अपने गुजरात दौरे पर पीएम मोदी ने कहा था कि उनके 8 साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का एक आरोप नहीं लगा. ये उनकी सरकार के लिए एक गौरवशाली पल है. शुरुआत से ही पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी है. आलम ये है कि 7 सालों में मंत्रियों और नौकरशाहों को काम के अलावा कुछ नहीं सूझा और दिल्ली में दशकों से घूमने वाले दलाल भी धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर हो गए. दुनिया के बड़े रिसर्चों में ये पाया जाता है कि देशवासियों का अपनी सरकार पर भरोसे में भारत अव्वल तो है ही, लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में भी भारत अब पिछली पायदानों से खासा ऊपर आ गया है. भ्रष्टाचार मुक्त भारत ही हर भारतीय को गर्व से भर देता है.

कोरोना काल में बढ़ाया भारत का मान
जब पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से जूझ रही थी, तब पीएम मोदी ये सुनिश्चित करने में लगे थे कि लोगों के जान-माल को ज्यादा नुकसान नहीं हो और साथ ही कोई रोजगार के अभाव में भूखा नहीं सोए. हर रोज मॉनिटरिंग के साथ-साथ पीएम मोदी ने इस बात पर भी नजर रखी कि कोरोना की दवा भी भारत, दुनिया के अन्य देशों से पहले बना ले ताकि हमें दूसरों पर निर्भर नहीं होना पड़ा. हुआ भी कुछ ऐसा ही. पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने न सिर्फ अपने लिए दवा बनाई, बल्कि ऑपरेशन मैत्री के तहत दुनिया भर के देशों को दवा भी भेजी. साथ ही कोरोना काल में देश भर में गरीबी रेखा के नीचे रह रहे लोगों को मुफ्त अनाज भी पहुंचाया. ये योजना अब भी जारी है. जान-माल का नुकसान भी दुनिया के दूसरे विकसित देशों से कम ही हुआ. इस लड़ाई को फ्रंट से लीड करने वाले पीएम मोदी ने सभी देशवासियों को कहने पर मजबूर कर दिया कि गर्व से कहो हम भारतीय हैं.

अभी तो हम मोदी सरकार के 8 साल के काम काज का लेखा जोखा ले रहे हैं. लेकिन जब इस पल का इतिहास लिखा जाएगा तो देश-दुनिया को याद रहेगा कि पीएम मोदी ने भारतीयों के मन में क्या मंत्र फूंका है. जाहिर है कि कश्मीर से 370 हटाने से लेकर, दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराने और देश में आखिरी मील पर खड़े वंचित व शोषित समाज का सशक्तिकरण करने में पीएम मोदी ने जो सफलता पायी है वो शायद किसी और के बस में नहीं था.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: Modi Sarkar, Prime Minister Narendra Modi

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