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नई दिल्ली. हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूशन रैंकिंग फ्रेमवर्क- 2022 (NIRF Rankings-2022) की लिस्ट जारी हुई थी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने ऑवरऑल, यूनिवर्सिटीज, कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज और फॉर्मेसी कॉलेज समेत कुल 11 कैटेगरीज में टॉप संस्थानों की सूची जारी की थी. मेडिकल कॉलेज (Medical College) की बात करें तो इस लिस्ट में दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) टॉप पर रहा. टॉप फर्मेसी कॉलेज की लिस्ट में जामिया हमदर्द नई दिल्ली पहले स्थान पर रहा. लेकिन, पहले कभी टॉप संस्थानों में अपना नाम दर्ज कराने वाला मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (Maulana Azad Medical College Hostel)  पिछले कुछ सालों से लगातार पिछड़ता ही जा रहा है. कुछ साल पहले तक तो दिल्ली सरकार के अधीन आने वाला यह कॉलेज टॉप-5 में आता था. लेकिन अब यह टॉप -20 में भी जगह नहीं बना पा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की रैंकिंग गिरने का कारण क्या है.

आपको बता दें कि एनआईआरएफ रैंकिंग-2022 के शीर्ष 25 मेडिकल कॉलेज की बात करें तो राजधानी के चार मेडिकल कॉलेजों ने इसमें स्थान बनाया है. पिछले साल दिल्ली के पांच संस्थान टॉप-5 में शामिल थे, लेकिन इस बार एक की संख्या घट गई है. एनआईआरएफ 2022 के अनुसार एम्स दिल्ली मेडिकल कॉलेजों की लिस्ट में पहले नंबर पर है. एम्स के अलावा आईएलबीएस, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज टॉप-25 में स्थान बनाने में कामयाब रहे हैं. जीटीबी अस्पताल से जुड़ा यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस भी 28वें स्थान पर है.

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. कुछ साल पहले तक तो दिल्ली सरकार के अधीन आने वाला यह कॉलेज टॉप-5 में आता था.

एनआईआरएफ की रैंकिंग में कौन मेडिकल कॉलेज अव्वल
अगर बात दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की करें तो यह कॉलेज एनआईआरएफ के मानदंडों पर लगातार पिछड़ता ही जा रहा है? साल 2021 में एनआईआऱएफ रैंकिंग में इस कॉलेज ने 17वीं रैंक हासिल की थी. साल 2020 में भी 17वीं रैंक ही मिली थी. हालांकि, 2019 में इस कॉलेज ने 14वीं रैंक हासिल की थी. 2018 में इस कॉलेज को टॉप-25 में भी जगह नहीं मिली थी.

लगातार पिछड़ता जा रहा है मौलान आजाद मेडिकल कॉलेज
इस कॉलेज से जुड़े छात्रों की मानें तो बीते कुछ सालों में पढ़ाई कई कारणों से बाधित रही है. इसके साथ ही मैनेजमेंट का छात्रों के साथ रवैया भी असंतोषजनक है. पढ़ाई से लेकर रिसर्च की बात करें तो सब किसी न किसी कारण बाधित रहता है. 2019 के बाद तो कोविड-19 महामारी के कारण यह कॉलेज बूरी तरफ प्रभावित हो गया है. कोविड में जहां इस कॉलेज से संबंधित लोक नायक अस्पताल ने देश में अलग मुकाम हासिल किया, वहीं एनआईआरएफ की रैंकिंग ने इस कॉलेज को काफी पीछे पहुंचा दिया.

कोविड मैनेजमेंट में रहा अव्वल
आपको बता दें कि कोविड के कारण मौलना आजाद मेडिकल कॉलेज से संबंधित लोक नायक अस्पातल एवं अन्य अस्पतालों के कोविड समर्पित अस्पताल बनाए जाने की वजह से अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ा है और कॉलेज छात्रों की पढ़ाई तो बाधित हुई ही है.

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अभी भी कोविड की वजह से LNJP अस्पताल के कई विभाग अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य नहीं कर पा रहे हैं

एलएनजेपी अस्पातल से जुड़ा है मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज
उल्लेखनीय है कि अभी भी कोविड की वजह से इस अस्पताल के कई विभाग अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य नहीं कर पा रहे हैं और मरीजों के इलाज में काफी पेरशानी उठानी पड़ रही है. अब तो मंकीपॉक्स का भी इलाज दिल्ली में इसी अस्पताल में शुरू होने जा रहा है. इससे अगले साल की रैंकिंग पर भी बुरा असर पड़े इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. दिल्ली में किसी भी तरह के कोविड के मरीजों का स्पेशल ट्रीटमेंट के लिए एलएनजेपी ही भेजा जाता है. इससे एनआईआरएफ के जो मानदंड हैं, पढ़ाई-लिखाई, रिसर्च, पब्लिकेशन उन मानदंडों पर कॉलेज खड़ा नहीं उतर पा रहा है और इस वजह से रैंकिंग में गिरावट हो रहा है.

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आपको बता दें कि एनआईआरएफ रैंकिंग पहले चार कैटेगरी में जारी होती थी. अब यह 11 कैटेगरी में जारी होती है. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से हर साल नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क रैंकिंग जारी की जाती है. देश के विश्वविद्यालयों, मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और फार्मेसी संस्थानों की रैंकिंग के लिए एनआईआरएफ संस्था बनाई गई है. इससे पूर्व रैकिंग के लिए कोई सरकारी संस्था नहीं थी. प्राइवेट संस्थाएं रैकिंग जारी करती थीं, जिस पर तरह-तरह के सवाल उठते थे. लेकिन अब केंद्र सरकार विभिन्न मानकों के आधार पर सरकारी और प्राइवेट संस्थानों को रैंकिंग जारी करती है.

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