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प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है. इन दोनों कहावतों को चरितार्थ कर दिखाया है जोधपुर के तिंवरी इलाके के चौराई गांव के एक गरीब किसान के बेटे पुखराज ने. तंगहाली और अभावों के बीच पढ़ाई करने वाले इस गुदड़ी के लाल पुखराज ने वो कमाल कर दिखाया है, जिसकी उम्मीद बेहद कम होती है.

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पुखराज ने बुधवार को घोषित राजस्थान बोर्ड की 12वीं साइंस के परीक्षा परिणाम में 97.80 फीसदी अंक हासिल किए हैं. पुखराज के पिता भोमाराम और मां पारुदेवी किसानी और मजदूरी करते हैं. इसके जरिए घर में महज दो समय की दाल-रोटी का जुगाड़ भी बमुश्किल हो पाता है. पढ़ाई के लिए सुविधा तो कोसों दूर की बात है. पुखराज ने बिना किसी ट्यूशन और कोचिंग के केवल अपनी मेहनत और लगन के दम पर साइंस वर्ग में 97.80 फीसदी अंक हासिल माता-पिता के सपनों को पंख लगा दिए हैं. घर में खुशियों का माहौल है. बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है.

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संघर्ष भरी कहानी है
माता-पिता ने पुखराज को दसवीं तो जैसे-तैसे करके करवा दी थी, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए खर्चा वहन करने की स्थिति में नहीं थे. लेकिन कहते हैं कि जहां चाह होती है वहां राह भी मिलती है. ऐसा ही कुछ हुआ पुखराज के साथ. वह दसवीं पास करने के बाद बकरियां चरा रहा था. इस दौरान वह पढ़ाई तो कर रहा था, लेकिन साथ में घर चलाने के लिए भी संघर्ष कर रहा था. इसी दौरान क्षेत्र में स्थित शहीद-ए-आजम विद्यालय के व्यवस्थापक नृसिंह भार्गव अपनी स्कूल के किसी काम से चैराई गए. वहां उनकी मुलाकात बकरी चरा रहे पुखराज से हुई.

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परिजनों के साथ पुखराज।फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

मन मांगी मुराद मिली तो झौंक दिया खुद को
पुखराज की पृष्ठभूमि जानने के बाद नृसिंह भार्गव ने उसे अपनी स्कूल में दाखिला देने का प्रस्ताव दिया. उसे पुखराज और उसके परिजनों ने मान लिया. पुखराज को तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई. पुखराज की मेहनत और लगन को देखकर स्कूल के शिक्षकों ने भी उसका हरसंभव सहयोग किया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है. बकौल पुखराज उसने अपने माता-पिता को सम्मान दिलाने और आराम से जीवन यापन कराने का वादा कर रखा है. इसलिए वह जी तोड़ मेहनत कर रहा है. पुखराज अपनी सफलता का श्रेय नृसिंह भार्गव व शिक्षकों की मेहनत और माता-पिता के आशीर्वाद को दे रहा है.

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