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Review: दिलीप कुमार अच्छे अभिनेता थे. उनके भाई नासिर नहीं चले. अशोक कुमार और किशोर कुमार अच्छे अभिनेता थे, लेकिन अनूप कुमार नहीं चले. सुनील दत्त अच्छे अभिनेता थे लेकिन उनके भाई सोमदत्त नहीं चले. कुछ ऐसा हो सकता है सनी कौशल के साथ जो विक्की कौशल के भाई हैं. वैसे विक्की कौशल को भी उनकी अभिनय क्षमता से ज़्यादा “उरी” के हाउज़ द जोश के लिए या फिर फिलहाल कटरीना कैफ के बॉयफ्रेंड के तौर पर जाना जाता है. फिल्मी परिवार से सम्बंधित सनी कौशल की लीड एक्टर के तौर पर पहली फिल्म ‘शिद्दत’ हाल ही में डिज़्नी+ हॉटस्टार पर रिलीज हुई है. फिल्म टुकड़ों टुकड़ों में अच्छी है, बाकी बहु-प्रचलित फॉर्मूलों से भर कर इस च्युइंग गम में शकर डाल कर मीठा बनाया जा रहा है.

जोगिन्दर ढिल्लों उर्फ़ जग्गी (सनी कौशल) एक मनचला शोहदा है. किसी भी शादी में मुफ्त की शराब पीने और खाने खाने घुस जाता है. हॉकी खेलता है, दिन भर हँसता रहता है और किसी बात से उसकी जिन्दगी में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता। लड़कियों की तैराकी टीम को घूरने के उद्देश्य से अपने दोस्तों के साथ जाता है, बिना पूछे उनकी फोटो खींचता है और एक तैराक लड़की कार्तिका (राधिका मैदान) को पटा लेता है. उसे कुछ दिनों में इतना प्यार हो जाता है कि वो उस से शादी करने के लिए लंदन तक चल पड़ता है. गैरकानूनी तरीके से लंदन जाने के उसके रास्ते में कई अड़चनें आती हैं. गौतम (मोहित रैना), पेरिस में भारतीय विदेश सेवा के अफसर हैं, जग्गी उनकी मदद से कार्तिका तक जाने के कई हथकंडे आजमाता है, जैसे 560 किलोमीटर लम्बे इंग्लिश चैनल को तैर कर फ्रांस से लंदन पहुंचना. कार्तिका को कभी भी ये यकीन नहीं होता है कि कोई उसे इतना प्यार कर सकता है. दिन दिन भर लड़की का पीछा करने वाले लड़कों के लिए खुशखबरी सी लगती है जब कार्तिका के मन में भी जग्गी के लिए प्यार जाग जाता है. क्या जग्गी और कार्तिका मिल पाते हैं, क्या जग्गी की शिद्दत से की गयी चाहत पूरी होगी, ये देखने के लिए फिल्म देखना होगी.

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अभिनय से शुरू करते हैं. सनी कौशल, दिल्ली के लौंडे लगते हैं. लफंडर किस्म के. मनचले शोहदे. हर समस्या का एक ही जवाब होता है – अरे तो कौनसी बड़ी बात हो गयी? लड़कियों की स्विमिंग करते हुए फोटो खींचना और उन्हें सोशल मीडिया के ज़रिये वायरल करने की हरकत भी फेंक देते हैं. पार्ट टाइम हॉकी खेलते हैं और लड़की देख कर उन्हें स्विमिंग में जीतने के लिए मोटिवेशनल कोचिंग भी देते हैं. सनी ने भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई है लेकिन इसका दुष्परिणाम ये होगा कि इन्हें शायद इसी तरह की भूमिकाएं मिला करेंगी. इन्हें कॉलेज के पंजाबी लड़के के अलावा किसी और भूमिका में देखना शायद मुश्किल हो. पिताजी श्याम कौशल हिंदी फिल्मों में स्टंट मास्टर रहे हैं. सनी भी सिक्स पैक एब्स लेकर घूमते हैं और पूरे कपडे उतारने में भी इन्हें कोई संकोच नहीं होता. फिल्म के आखिरी पलों में थोड़ा चेहरा सीरियस हो जाता है और वो सच में एक इल्लीगल इमिग्रेंट लगने लगते हैं.

राधिका मदान का किरदार ज़बरदस्त गढ़ा गया है. नए ज़माने की लड़की। लड़कों के लॉकर रूम में घुस कर उनकी नहाते हुए तस्वीरें खींचने का काम करती है. पूरी फिल्म में कन्फ्यूज़न बनाये रखा है. आजकल के समय की लड़की है. एक रात किसी अनजान लड़के के साथ गुज़र भी जाए तो अगले दिन कमिटमेंट की चिंता नहीं होती. चेहरे पर एक्सप्रेशंस भी अच्छे आते हैं लेकिन सभी भाव तकरीबन एक जैसे लगने लगते हैं. आखिर के सीन्स में ओवरएक्टिंग भी कर ली है जिसमें वो बिलकुल असहज लगती हैं. मोहित रैना, डायना पेंटी और कम से कम आधा दर्ज़न कलाकार और पात्र फिल्म में क्या कर रहे थे? उनके किरदार लिखे ही क्यों गए थे? एम्बेसी में काम करने वाले, अपनी सुविधा से इल्लीगल इमिग्रेंट्स को शहर घुमाते हैं, ये पहली बार देखने में आया है. मोहित रैना का अभिनय अच्छा है, रोल निहायत ही बकवास सा है. डायना पेंटी को अभिनय करने के सभी सपने देखना छोड़ देना चाहिए, ये उनके बस की बात है नहीं.

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कहानी श्रीधर राघवन और धीरज रतन ने मिल कर लिखी है. फिल्म देखने से कुछ चीज़ें साफ़ नज़र आती हैं. किरदार श्रीधर ने रचे होंगे और उनकी गतिविधियां धीरज का दिमाग है. धीरज ने अब तक कम से कम डेढ़ दर्ज़न पंजाबी फिल्में लिखी हैं और सनी के सारे सीन्स पर उनकी छाप दिखाई देती है. पूजा लढा सूरती के लिखे डायलॉग अच्छे हैं खास कर सनी कौशल के हिस्से जो पड़े हैं. मोहित रैना के मुंह से फिलॉसॉफी की बातें अच्छी नहीं लगती. सारा फोकस सनी कौशल पर है इसलिए मज़ेदार बातचीत भी उन्हें के हिस्से पड़ी है. इस फिल्म का संगीत सचिन जिगर का है और बेहतर है. हालाँकि ओटीटी रिलीज़ की वजह से म्यूज़िक प्रमोशन का समय कम मिलता है. श्रीलंका की सिंगर योहानी जिनका वायरल गाना “मणिके मगे हिथे” लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गया है, उन्होंने ने भी फिल्म में एक गाना गाया है. “अखियां उडीक दियाँ” कव्वाली वैसे तो उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खान ने गयी है, इस फिल्म में उसके रीक्रिएटेड वर्शन को बहुतायत से इस्तेमाल किया गया है और योहानी ने भी वही गाना गाया है. शिद्दत का टाइटल ट्रैक भी अच्छा सुनाई देता है.

निर्देशक कुणाल देशमुख की ये पहली फिल्म है जिसमें उन्होंने इमरान हाश्मी को नहीं लिया है. इसके पहले वो हाश्मी को लेकर 4 फिल्में बना चुके हैं. सनी के किरदार में इमरान हाश्मी के किरदारों के अंश नज़र आएंगे. निर्देशन अच्छा है. समस्या कहानी की है. किरदारों पर भरोसा नहीं होता. लड़की का पीछा करना, ज़बरदस्ती फ़्लर्ट करने के बेतुके तरीके ढूंढना, फिर प्यार में इतना पागल हो जाना कि लड़की को पाने के लिए दुनिया के सबसे कठिन काम करना, इस सफर में मसीहा किस्म का कोई बाशिंदा मिलना. ये बहुत ही थके हुए स्टोरी-प्लॉट्स हैं. फिल्म अगर देश के बाहर शूट नहीं हुई होती तो शायद, इतना देख पाना भी भारी पड़ता. च्युइंग गम का मीठापन ख़त्म होने के बाद उसमें शक्कर डाल के मीठा करने से क्या मज़ा आता है?

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डिटेल्ड रेटिंग

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Tags: Hotstar, Radhika Madan, Sunny Kaushal

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