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हाइलाइट्स

देश के सबसे बड़े स्नैक्स ब्रांड हल्दीराम ने आईपीओ के लिए योजना बनानी शुरू कर दी है.
गंगा बिशन अग्रवाल ने 1950 के दशक में कोलकाता में ‘हल्दीराम भुजियावाला’ ब्रांड शुरू किया था.
मूलचंद के सबसे छोटे बेटों मनोहरलाल और मधुसूदन ने 1984 में दिल्ली में हल्दीराम की शुरुआत की.

नई दिल्ली. स्नैक्स और नमकीन बनाने वाली दिग्गज कंपनी बीकाजी (Bikaji foods) की शेयर मार्केट में लिस्टिंग के बाद देश के सबसे बड़े ब्रांड हल्दीराम (Haldiram’s) ने भी आईपीओ के लिए योजना बनानी शुरू कर दी है. हल्दीराम बीकाजी के प्रमोटर के शिव रतन अग्रवाल के भाइयों की कंपनी है. सीएनबीसी-टीवी18 को मिली जानकारी के मुताबिक हल्दीराम का आईपीओ अगले 18 महीने में आ सकता है.

दरअसल, ज्यादातर लोग यह नहीं जानते हैं कि अभी हल्दीराम की दो कंपनियां है. नागपुर की हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल को सबसे बड़े भाई शिव किशन अग्रवाल चलाते हैं. वहीं दिल्ली की हल्दीराम स्नैक्स को छोटे भाई मनोहर अग्रवाल और मधुसूदन अग्रवाल चलाते हैं. अब दोनों भाई मिलकर हल्दीराम ब्रांड को देश में और मजबूत बनाने के लिए दिल्ली और नागपुर के अपने बिजनेस का विलय करने जा रहे हैं. जबकि हाल में ऊनी कंपनी का आईपीओ लाने वाले बीकाजी के मालिक भी इनके ही भाई हैं.

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बीकानेर की भुजिया के दुनियाभर में दीवाने
बीकानेर की भुजिया दुनियाभर में मशूहर है. इसे चना दाल के आटे या बेसन से बनाया जाता था लेकिन गंगाबिशन ने अलग तरह से भुजिया बनाने का फैसला किया. गंगा बिशन अग्रवाल जब 11 साल के थे, तब उन्होंने पिता के भुजिया बिजनेस में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था. बचपन में उन्हें घर पर हल्दीराम के नाम से पुकारा जाता था. उन्होंने जो नई तरह की भुजिया बनाई वो थोड़ी पतली थी जिसे बेसन की जगह मोठ आटे से बनाया जाता था. उनका यह प्रयोग कामयाब हुआ और हल्दीराम का कारोबार बढ़ता चला गया. पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में हल्दीराम की दोनों कंपनियों का कंबाइंड रेवेन्यू करीब 9000 करोड़ रुपये था.

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कोलकाता से शुरू हुआ हल्दीराम भूजियावाला का बिजनेस
गंगा बिशन अपने बेटे सत्यनारायण और रामेश्वरलाला के साथ 1950 के दशक में कोलकाता आ गए. उन्होंने ‘हल्दीराम भुजियावाला’ ब्रांड शुरू किया. गंगा बिशन के तीन बेटे थे- मूलचंद, सत्यनारायण और रमेश्वरलाल. मूलचंद के चार बेटे और एक बेटी अभी स्नैक की अलग-अलग कंपनियां चला रहे हैं. उनके साथ गंगा बिशन के सबसे बड़े पोते शिव किशन भी हैं. कोलकाता में बिजनेस को कामयाब करने के बाद गंगा बिशन बीकानेर लौट गए.

एक छोटी सी दुकान से देश के सबसे बड़े ब्रांड तक
गंगा बिशन 1960 के दशक में कोलकाता का कारोबार रामेश्वरलाला और सत्यनारायण के जिम्मे छोड़ कर वापस बीकानेर लौट गए. फिर सत्यनारायण ने अपनी अलग ब्रांड ‘हल्दीराम एंड संस’ की शुरूआत की. लेकिन, उन्हें अपने पिता जैसी सफलता नहीं मिली. इसके बाद रामेश्वरलाल भी अपने भाई मूलचंद से अलग हो गए. इस तरह कोलकाता और बीकानेर का कारोबार दो अलग-अलग हाथों में चला गया. पवित्र कुमार ने 2016 में Bhujia Barons: The Untold Story of How Haldiram Built a Rs 5000-crore Empire नाम से एक किताब लिखी. इस किताब के मुताबिक, मूलचंद अपनी पत्नी और तीन बेटों के साथ मिलकर बीकानेर में भुजिया की दुकान चलाते थे. कोलकाता में उनके भुजिया के बिजनेस की शानदार ग्रोथ के बाद इनकी लिस्ट में और भी कई चीजें शामिल हो गई.

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दिल्ली में ऐसे हुई हल्दीराम की शुरुआत
मूलचंद के सबसे छोटे बेटों मनोहरलाल और मधुसूदन ने 1984 में दिल्ली में हल्दीराम की शुरुआत की. वहीं उस दौरान शिव किशन अग्रवाल और उनकी बहन सरस्वती ने महाराष्ट्र में अपने कारोबार का विस्तार करना शुरू किया. इस तरह हल्दीराम का बिजनेस एक राज्य से कई राज्यों में फैल गया. मूलचंद के बेटे शिव रतन ने बीकानेर में ही भुजिया के बिजनेस को आगे बढ़ाया. यह आजकल बीकाजी नाम से मशहूर है. कुछ हफ्ते पहले इसकी बीकाजी ने शेयर मार्केट में अपना आईपीओ पेश किया है. मौजूदा समय में इनका बिजनेस देश के बाहर भी काफ़ी फैला हुआ है.

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ब्रांड नाम को लेकर भाइयों के बीच खत्म हुआ विवाद
‘हल्दीराम भुजियावाला’ ब्रांड के इस्तेमाल को लेकर इनका अपने चचेरे भाई प्रभु के साथ लंबी कानूनी लड़ाई चल रही है. इसकी शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत में हुई थी. इसी कानूनी लड़ाई के चलते दिल्ली के कारोबार को अपना नाम बदलकर ‘हल्दीराम्स’ (Haldiram’s) करना पड़ा. 2010 में जब प्रभु और उनके भाई पर दिल्ली में ‘हल्दीराम्स’ या ‘हल्दीराम’ के इस्तेमाल पर रोक लग गई तब जाकर यह लड़ाई खत्म हुई.

अभी कौन चला रहा हल्दीराम का बिजनेस?
हल्दीराम का बिजनेस अभी हिस्सों में बंटा हुआ है. ये सभी बिजनेस कंपनी अलग-अलग कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड है. हल्दीराम के दिल्ली के बिजनेस को मनोहरलाल और मधुसूदन अग्रवाल चलाते हैं. वहीं नागपुर बिजनेस को शिव किशन अग्रवाल चलाते हैं. जबकि बीकानेर का बिजनेस शिव रतन अग्रवाल के जिम्मे है. कोलकाता का बिजनेस रामेश्वरलाल के बेटे प्रभु अग्रवाल के जिम्मे है.

इतना है कंपनियों का रेवेन्यू
रेवेन्यू के लिहाज से दिल्ली की कंपनी इसमें से सबसे बड़ी है. इसका रेवेन्यू करीब 5 हजार करोड़ रुपये है. इसके बाद कोलकाता वाले बिजनेस का नम्बर आता है. इसका रेवेन्यू 4 हजार करोड़ रुपये है. वहीं बीकानेर बिजनेस का रेवेन्यू 1,600 करोड़ रुपये है. बीकाजी की शेयर मार्केट में लिस्टिंग के बाद तीनों भाई अब अपने कारोबार का विलय कर अगले 18 महीनों में हल्दीराम का आईपीओ पेश करने का प्लान बना रहे हैं.

Tags: Bikaner news, IPO

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