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गंगा में इफ़्तार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए इरादा ही निर्णायक

21/5/2026, 1:42:26 am
गंगा में इफ़्तार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए इरादा ही निर्णायक
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गंगा नदी में ईद का इफ़्तार मनाने के बाद गिरफ्तार हुए एक व्यक्ति के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आ रहा है। इस विवादित मामले में अदालत ने पहले ही एक महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किया है - किसी भी धार्मिक आपत्तिजनक कृत्य के लिए जानबूझकर की गई धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इरादा साबित होना अनिवार्य है। कोर्ट के इस बयान का संदर्भ 2015 की एक घटना से जुड़ा है जब एक व्यक्ति को गंगा नदी में इफ़्तार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि इस कृत्य से हिंदू भावनाओं को चोट पहुँची है। लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल आक्रोश के आधार पर नहीं, बल्कि अभियुक्त के इरादे और कृत्य के प्रसंग पर विचार किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धार्मिक संवेदनशीलता का हवाला देकर नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वास्तव में कोई जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहा है। अदालत ने बार-बार तर्क दिया है कि अलग-अलधार्मिक अभ्यासों या रीति-रिवाजों के बिना किसी अपराध की बात नहीं की जा सकती। यह फैसला सामाजिक सद्भाव के लिए भी महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि धार्मिक आधार पर गलत तरीके से मुकदमे दर्ज करने से फैलने वाले तनाव को रोकने में मदद मिलेगी। अब इस मामले में जजगीरी अदालत को यह देखना होगा कि आरोपित व्यक्ति का कृत्य वास्तव में किसी धार्मिक भावना को जानबूझकर आहत करने का था या नहीं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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