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सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया: पितृत्व जांच में निजता से ज्यादा मायने रखता है सत्य, DNA टेस्ट अब संभव
1/6/2026, 1:29:57 am

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सुप्रीम कोर्ट ने देश के कानूनी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे के भविष्य और हितों के संबंध में पितृत्व की पहचान करने की जरूरत पड़ने पर निजता का अधिकार पूरी तरह से असीमित नहीं होगा। फैसले के मुताबिक, अब ऐसे मामलों में DNA टेस्ट का इस्तेमाल सबूत के रूप में किया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि निजता निश्चित रूप से एक मूलभूत अधिकार है, लेकिन यह सभी स्थितियों में पूरी तरह से असीमित नहीं है। खासकर तब जब बच्चे के भविष्य पर सीधा असर पड़ने वाले मामलों में जैसे उत्तराधिकार, नागरिकता या दायित्वों का निर्धारण हो। ऐसे स्थितियों में सत्य की खोज को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जो लंबे समय से पितृत्व के विवाद से जूझ रहे हैं। अब अदालतें DNA जांच के आदेश दे सकेंगी, जो न केवल पिता की पहचान में मदद करेगी बल्कि बच्चे के हितों की भी रक्षा करेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला भारतीय कानून में निजता और जनहित के बीच एक स्वस्थ संतुलन स्थापित करेगा।
इस फैसले से प्रभावित होकर अब कई जटिल मामलों में तेजी से फैसला हो सकेगा। इसके अलावा, यह सुनिश्चित करेगा कि न्याय न केवल निजता के दायरे में रहे, बल्कि सत्य की भी रक्षा करे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नियम सिर्फ उन मामलों पर लागू होगा जहां बच्चे के हित में सत्य की जरूरत हो।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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