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10 सेकंड की वायरल रील ने 9 साल बाद खोए बेटे को परिवार से मिलाया, घर आने पर लगा गहरा सदमा

4/9/2026, 6:07:07 am
10 सेकंड की वायरल रील ने 9 साल बाद खोए बेटे को परिवार से मिलाया, घर आने पर लगा गहरा सदमा
बेट्टiah, बिहार से एक आश्चर्यजनक घटना सामने आई है, जब इंस्टाग्राम पर अपलोड की गई दस सेकंड की वायरल रील ने नौ साल से लापता बच्चे को उसके परिवार से मिलवा दिया। यह क्लिप कुछ घंटों में हजारों बार देखी गई और इससे परिवार को लंबे समय बाद आशा की किरण मिली। घटना की शुरुआत 2015 के स्थानीय मेले में हुई, जहाँ आठ वर्षीय आर्यन (नाम बदलकर दिया गया) भीड़ में बिछड़ गया था। उसके माता‑पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और अपने स्तर पर खोजबीन शुरू की, लेकिन भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ परिवार की उम्मीद कम होती गई, फिर भी उन्होंने हर संभव प्रयास नहीं छोड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लापता बच्चे की foto शेयर की, स्थानीय NGOs के साथ मिलकर अभियान चलाया और पुराने फोटो को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया। हालांकि इन कोशिशों से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला और case धीरे‑धीरे ठंडा पड़ गया। इस बीच, एक अज्ञात इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता ने अपने प्रोफाइल पर दस सेकंड की क्लिप अपलोड की। वीडियो में एक बच्चा एक गांव की कच्ची सड़क पर चलते हुए दिख रहा था और पृष्ठभूमि में एक znan किराना दुकान का साइन बोर्ड स्पष्ट था। बच्चे के चेहरे की कुछ झलक से कई दर्शकों ने सोचा कि वह आर्यन जैसा दिखता है। क्लिप को देखते ही उसे हजारों शेयर मिले और टिप्पणियों में लोगों ने परिवार के संपर्क मांगे। परिवार के एक रिश्तेदार ने उस वीडियो को देखा और तुरंत पहचान कर ली। उन्होंने inmediatamente पुलिस को जानकारी दी और बच्चे के अंतिम znan स्थान का पता लगाया। पुलिस ने एक टीम भेजी जो क्लिप में दिखाए गए दुकान के पास पहुँची। वहाँ उन्होंने एक लड़का पाया जो खुद को आर्यन बताता था और अपने हाथ में एक पुरानी फोटो रखे हुए था जिसमें वह अपने माता‑पिता के साथ दिख रहा था। लड़के को लेकर जब परिवार मिला तो खुशी के साथ एक गहरा सदमा भी लगा। बच्चे की बोलचाल, व्यवहार और शारीरिक स्थिति पहले से बिल्कुल अलग थी। वह थोड़ा अस्पष्ट बोलता था और कुछ ऐसी हरकतें करता था जो उसके उम्र के अनुसार नहीं लग रही थी। परिवार ने तुरंत मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने का निर्णय लिया और बच्चे की फिर से सामाजिक रूप से शामिल होने की प्रक्रिया शुरू की। इस घटना से दो सबक स्पष्ट होते हैं। पहला, सोशल मीडिया एक शक्तिशाली उपकरण बन सकता है जो सूचना को तेज़ी से फैलाता है और लापता लोगों को खोजने में मदद करता है। दूसरा, ऐसी सूचनाओं की पुष्टि करना आवश्यक है क्योंकि गलत पहचान या अप्रत्याशित परिस्थितियाँ मानसिक और भावनात्मक रूप से těž्क हो सकती हैं। अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि कोई भी संदिग्ध वीडियो देखकर सीधे कार्रवाई करने से पहले पुलिस से संपर्क करे। समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)

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