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अरबपति पिता का बेटा व्यापार छोड़कर बना किसान, बिना जुताई वाली खेती अपनाई

11/9/2026, 5:53:19 pm
अरबपति पिता का बेटा व्यापार छोड़कर बना किसान, बिना जुताई वाली खेती अपनाई
बेतिया जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले रोहित कुमार ने हाल ही में एक चौंकाने वाला निर्णय लिया. उनके पिता एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कारोबारी हैं, जिनकी संपत्ति अरबों में आंकी जाती है. लेकिन रोहित ने परिवार के व्यवसाय में शामिल होने के बजाय अपनी जड़ों की ओर मुड़ने का फैसला किया. उन्होंने खेती को अपना नया पेशा चुना. सबसे noteworthy बात यह है कि उन्होंने पारंपरिक जुताई‑आधारित खेती छोड़कर, बिना जुताई वाली (no‑till) तकनीक को अपनाया. इस विधि में मिट्टी को overturn नहीं किया जाता, जिससे उसकी प्राकृतिक संरचना बनी रहती है. बिना जुताई वाली खेती में बीज सीधे पहले की फसल के अवशेषों पर बोए जाते हैं. इससे मिट्टी का कटाव कम होता है और जल स्तर स्थिर रहता है. रोहित बताते हैं कि इस पद्धति से ईंधन की खपत भी घटती है, क्योंकि ट्रैक्टर को कम चलाना पड़ता है. इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी noticeable कमी आती है. उन्होंने शुरुआत में कुछ हेक्टेयर जमीन पर परीक्षण किया. पहले फसल के परिणाम उत्साहजनक रहे: उत्पादन में लगभग दस प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि 입력 लागत में पंद्रह प्रतिशत की गिरावट आई. स्थानीय कृषि विशेषज्ञों ने उनकी पहल की सराहना की. उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचारों से छोटे और मध्यम किसानों को भी लाभ हो सकता है, खासकर जल‑संकट वाले क्षेत्रों में. रोहित का संदेश स्पष्ट है: धन और कारोबार की दौड़ में सुख शांति नहीं मिलती, जबकि मिट्टी से जुड़ना सच्ची समृद्धि देता है. उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे अपने पैतृक zawod को न केवल धन‑के‑लिए देखें, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदार बनें. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला, जिसमें वे खेत में काम करते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो को हज़ारों बार देखा गया और कई प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें दोनों प्रशंसा और जिज्ञासा शामिल थीं. सरकारी कृषि विभाग ने भी उनकी पहल को नोटिस लिया और उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने का न्यौता दिया. रोहित कहते हैं कि वे इस ज्ञान को आगे बढ़ाकर अन्य किसानों को भी無耕作 विधि सिखाना चाहते हैं. इस प्रकार, एक अरबपति के बेटे ने दिखाया कि सच्चा सफलता माप नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव से होती है. उनकी कहानी अब कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन रही है. अंत में, रोहित ने कहा कि वे भविष्य में जैविक खाद और फसल विविधीकरण पर भी काम करेंगे, ताकि खेती को और अधिक स्थायी बनाया जा सके. उनका मानना है कि जब हर किसान छोटा‑सा कदम उठाएगा, तो बड़ा बदलाव संभव है.
समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)

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