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सुबह 9 से शाम 5 तक: यूपी के एक ग्रेजुएट की नौकरी खोज की दास्तान

14/9/2026, 11:08:09 am
सुबह 9 से शाम 5 तक: यूपी के एक ग्रेजुएट की नौकरी खोज की दास्तान
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अभि उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर से स्नातक की डिग्री हासिल करके नोएडा आ गए हैं। उनकी पढ़ाई पूर्ण हो चुकी है, लेकिन अब उन्हें अपनी पहली स्थायी नौकरी की तलाश है। हर सुबह ठीक नौ बजे वे अपना लैपटॉप खोलते हैं और प्रमुख नौकरी पोर्टलों पर नई लिस्टिंग्स देखते हैं। अभि का मानना है कि सुबह का समय सबसे उत्पादक होता है, इसलिए वे इसी घंटे में अपने आवेदन भेजने की कोशिश करते हैं। वे हर आवेदन के लिए अपने रिज़्यूमे को उस पद की आवश्यकतानुसार थोड़ा‑थोड़ा बदलते हैं। कवर लेटर में वे अपने अकादमिक प्रोजेक्ट्स और छोटे‑मोटे इंटर्नशिप का उल्लेख करते हैं, जिससे recruiter को उनका प्रेक्टिकल अनुभव दिख सके। दोपहर में वे अक्सर वॉक‑इन इंटरव्यू के लिए公司的办公室 जाते हैं, हालांकि कई बार उन्हें केवल ऑनलाइन स्क्रीनिंग का ही अवसर मिलता है। प्रत्येक असफल प्रयास के बाद वे फीडबैक नोट्स लेते हैं और अपनी कमजोरियों पर काम करने की योजना बनाते हैं। जीने‑मरने की लागत नोएडा में काफी ज्यादा है; किराया, यात्रा और खाने‑पीने का खर्च महीने में पंद्रह‑बीस हजार तक पहुंच जाता है। अभि को अपने माता‑पिता की आर्थिक मदद पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनका आत्मविश्वास कभी‑कभी डगमगा जाता है। पैसे बचाने के लिए वे अक्सर सार्वजनिक लाइब्रेरी या कॉफी शॉप की फ्री वाई‑ファイ का इस्तेमाल करते हैं। वहां वे शांतिपूर्वक अपने डॉक्युमेंट्स अपडेट करते हैं और ऑनलाइन कोर्सेज़ के वीडियो देखते हैं। अभि लिंक्डइन पर सक्रिय रहते हैं; वे इंडस्ट्री के विशेषज्ञों से जुड़ते हैं, वेबिनार में भाग लेते हैं और अपने स्किल सेट को अपग्रेड करने के लिए मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्सेज़ करते हैं। इस कोशिश से उन्हें कुछ साक्षात्कार में तकनीकी प्रश्नों का बेहतर जवाब देने का आत्मविश्वास मिला है। हर असफलता के बावजूद वे हिम्मत नहीं हारते; प्रत्येक इंटरव्यू को एक सीखने का मौका मानते हैं और अपने जवाबों को सुधारने पर ध्यान देते हैं। उनका मानना है कि धैर्य और निरंतर प्रयास ही最终 सफलता की कुंजी हैं। सरकार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 20‑24 आयु वर्ग के लगभग दस प्रतिशत युवा अभी भी नौकरी की तलाश में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कौशल‑आधारित शिक्षा और उद्यमिता प्रोत्साहन से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। अभि की कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की वास्तविकता को दर्शाती है। नीति‑निर्माताओं को नौकरी सृजन,skill development और रोजगार मेलों तक आसान पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि हर प्रतिभाशाली उम्मीदवार को उसका हक़ मिल सके।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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