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एआई बेकाबू हुआ तो क्या? किल स्विच की मांग क्यों बढ़ रही है

20/9/2026, 12:03:51 am
एआई बेकाबू हुआ तो क्या? किल स्विच की मांग क्यों बढ़ रही है
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की रफ्तार इतनी तेज है कि वैज्ञानिक और नीति‑निर्माता दोनों चिंतित हैं। चैटबॉट से लेकर स्वायत्त हथियार तक, एआई हर क्षेत्र में घुस चुका है। लेकिन अगर कोई मॉडल अचानक गलत फैसले लेने लगे या खुद को अपडेट करके इंसानी कंट्रोल से बाहर निकल जाए, तो क्या होगा? इसी सवाल ने “किल स्विच” यानी एक बटन दबाकर पूरे सिस्टम को बंद करने की मांग को जन्म दिया है। यूरोपीय संघ के एआई एक्ट और अमेरिका के नए कार्यकारी आदेश में ऐसे सुरक्षा तंत्र को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है। भारत में भी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क का मसौदा जारी किया है, जिसमें किल स्विच का जिक्र है। तकनीकी हकीकत हालांकि इतनी सरल नहीं। आधुनिक एआई मॉडल हजारों सर्वरों पर फैले होते हैं, जिनमें से कई क्लाउड प्रोवाइडर के पास होते हैं। एक केंद्रीय बटन से सभी नोड्स को एक साथ काटना नेटवर्क लेटेंसी, डेटा सिंक्रनाइजेशन और कानूनी अधिकार क्षेत्र की वजह से मुश्किल है। बड़ी टेक कंपनियां — गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई — आंतरिक “रेड टीम” टेस्टिंग करती हैं, पर बाहरी ऑडिट अभी सीमित है। शोधकर्ता “एयर‑गैप्ड” टेस्ट एनवायरनमेंट और हार्डवेयर‑लेवल फ्यूज जैसे विकल्प सुझा रहे हैं, ताकि बेकाबू मॉडल को फिजिकली रोका जा सके। आम उपभोक्ता के लिए फिलहाल सीधा असर नहीं, लेकिन भविष्य में स्वायत्त कार, मेडिकल डायग्नोसिस या फाइनेंशियल ट्रेडिंग में एआई की गलती जानलेवा हो सकती है। इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि किल स्विच केवल तकनीकी फीचर नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी का हिस्सा बने। वैश्विक स्तर पर ISO और IEEE जैसी संस्थाएं किल स्विच के मानक तय करने में जुटी हैं। इन मानकों में स्वचालित शटडाउन, लॉगिंग और ऑडिट ट्रेल जैसी शर्तें शामिल हैं, ताकि किसी भी घटना की जांच संभव हो। सैन्य और खुफिया एजेंसियां भी स्वायत्त हथियार प्रणालियों में किल स्विच को अनिवार्य मानती हैं, क्योंकि एक गलत आदेश से बड़ा नुकसान हो सकता है। नागरिक समाज के संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकारें पारदर्शी रेगुलेशन बनाएं और कंपनियों को जवाबदेह ठहराएं। जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों में एआई सुरक्षा पाठ्यक्रम शुरू करने की बात चल रही है। तभी आम नागरिक समझ पाएंगे कि किल स्विच क्यों जरूरी है और कैसे काम करेगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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